कैंपस

दिल्ली: फीस वृद्धि और ड्रेस कोड के विरोध में जेएनयू के छात्रों ने किया विरोध प्रदर्शन

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रों की मांग है कि मसौदा छात्रावास मैनुअल को वापस लिया जाए, जिसमें उनके अनुसार फीस वृद्धि, कर्फ्यू का वक्त और ड्रेस कोड जैसी पाबंदियों का प्रावधान है.

New Delhi: Jawaharlal Nehru University students try to open the gates during a protest against the administration's 'anti-students' policy, in New Delhi, Monday, Nov. 11, 2019. Students wanted to march towards the All India Council for Technical Education (AICTE), where Vice President Venkaiah Naidu was addressing the university's convocation at an auditorium. (PTI Photo)(PTI11_11_2019_000069B)

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के निकट प्रशासन की ‘छात्र-विरोधी’ नीति के खिलाफ सोमवार को सैकड़ों छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया. इससे पहले अपनी मांगों को लेकर छात्र पिछले दो हफ्ते से कैंपस के अंदर प्रदर्शन कर रहे थे.

छात्र कुलपति से मिलना चाहते थे और उनकी मांग थी कि मसौदा छात्रावास मैनुअल को वापस लिया जाये जिसमें उनके अनुसार फीस वृद्धि, कर्फ्यू का वक्त और ड्रेस कोड जैसी पाबंदियों का प्रावधान है.

छात्रों ने बताया कि सुबह शुरु हुआ यह प्रदर्शन छात्रावास के मैनुअल के विरोध के अलावा पार्थसारथी रॉक्स में प्रवेश पर प्रशासन की पाबंदी तथा छात्र संघ के कार्यालय को बंद करने के प्रयास के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों का ही हिस्सा है.

प्रदर्शन कर रहे छात्र अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) की तरफ आगे बढ़ने चाहते थे लेकिन गेटों पर अवरोधक लगा दिए गए हैं. उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू इस स्थान पर दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे.

जेएनयू से लगभग तीन किलोमीटर दूर एआईसीटीई के द्वारों को बंद कर दिया गया और सुबह शुरू हुए विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर परिसरों के बाहर सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर दिया गया.

एक अधिकारी ने बताया कि जेएनयू परिसर के उत्तरी और पश्चिमी द्वारों के बाहर और बाबा बालकनाथ मार्ग पर एआईसीटीई ऑडिटोरियम और जेएनयू के बीच स्थित सड़क पर बैरिकेड लगाये गये हैं.

पुलिस ने बताया कि छात्रों ने इन बैरिकेड को तोड़ दिया और दोपहर लगभग 11:30 बजे एआईसीटीई की तरफ मार्च करने लगे. कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया गया. इसके साथ ही छात्रों पर पानी की बौछारों का भी इस्तेमाल किया गया.

हाथों में तख्तियां लेकर छात्रों ने ‘दिल्ली पुलिस वापस जाओ’ जैसे नारे लगाये और कुलपति एम. जगदीश कुमार को एक ‘चोर’ बताया.

मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल कार्यक्रम स्थल से बाहर नहीं आ पा रहे थे. एक अधिकारी ने बताया, ‘जेएनयूएसयू अध्यक्ष आइशी घोष और उपाध्यक्ष साकेत मून को एचआरडी मंत्री के लिए रास्ता दिये जाने के लिए छात्रों से बात करने को कहा गया. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से द्वार से हटने का अनुरोध किया लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया.’

जेएनयूएसयू के पदाधिकारियों ने पोखरियाल से मुलाकात की और उन्होंने उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर गौर किया जायेगा. बहरहाल, वे कुलपति से नहीं मिल सके. प्रदर्शनकारी नारे लगा रहे थे,‘ हम कुलपति से मिलना चाहते हैं.’

घोष ने कहा, ‘हमारे लिए यह ऐतिहासिक दिन है कि हमने बैरिकेड तोड़ दिये और कार्यक्रम स्थल पहुंचे और मंत्री से मुलाकात की.’ उन्होंने कहा, ‘हमारा आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है. हम एचआरडी मंत्री से अनुरोध करते हैं कि वे कुलपति से छात्रों से बातचीत करने को कहे.’

एचआरडी मंत्री ने वादा किया कि छात्र संघ को बैठक के लिए मंत्रालय बुलाया जायेगा.

द वायर से बात करते हुए जेएनयू के छात्र अनुज ने कहा, यह विरोध इसलिए हो रहा क्योंकि जेएनयू के 18-19 हॉस्टलों की फीस अचानक से बहुत अधिक बढ़ा दी गई है. फीस वृद्धि का फैसला किया गया उनमें न तो छात्र संघ और न ही छात्रों से बातचीत की गई. हॉसट्स का डिपॉजित करीब 5500 से होता है जिसे बढ़ाकर 12000 कर दिया गया है. यदि यह फीस वृद्धि लागू होती है तो करीब 40 फीसदी छात्रों को विश्वविद्यालय छोड़ना पड़ सकता है. इसके साथ मेस कर्मचारियों और हॉस्टल कर्मचारियों की फीस छात्रों से वसूलने के लिए छात्रों पर सर्विस चार्ज भी लगा दिया गया है. यह जेएनयू के समावेशी विचार को खत्म करने की कोशिश है.

एक अन्य छात्र प्रशांत कुमार ने कहा, प्रशासन की तरफ से ऐसा कोई भी प्रयास नहीं हुआ है कि हमसे बात करने का प्रयास किया जाए. प्रशासन की ओर से ईमेल के माध्यम से हमेशा एक नोटिस आता है जिसमें हमसे तत्काल धरना खत्म करने के लिए कहा जाता है. आज भी यहां हजारों छात्र इकट्ठे हैं लेकिन प्रशासन हमें मुट्ठी भर छात्र बताकर हमारी मांगों को खारिज करने का प्रयास करता है. 2016 से लेकर आज तक जितने भी प्रदर्शन हुए हैं उनमें प्रशासन ने एक भी बार बातचीत का रास्ता नहीं अपनाया है.

उन्होंने कहा, आज यहां उपराष्ट्रपति, शिक्षा मंत्री और वाइस चांसलर उपस्थित हैं. शिक्षा के इन आला अधिकारियों की उपस्थिति के कारण ही आज यह प्रदर्शन हो रहा है लेकिन प्रशासन ने जो रवैया अख्तियार किया है उससे लगता है कि यह विरोध प्रदर्शन लंबा चलने वाला है. जब तक हम प्रशासन को झुका नहीं देंगे तब तक लड़ाई जारी रहेगी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)