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असम: पांच लोगों ने सब्जी वाले को पीट-पीटकर मार डाला, दो गिरफ्तार

मामला असम के कामरूप जिले का है. देशव्यापी लॉकडाउन के कारण नौकरी जाने के बाद सब्जी बेचने का काम शुरू करने वाले सनातन डेका की साइकिल एक कार से टकरा गई थी. इसके बाद कार सवार दो लोगों ने तीन अन्य लोगों के साथ मिलकर डेका की पिटाई की थी.

सनातन डेका. (फोटो: ट्विटर)

सनातन डेका. (फोटो: ट्विटर)

नई दिल्ली: असम के कामरूप जिले में एक सब्जी विक्रेता को बीते रविवार को पांच लोगों के एक समूह ने पीट-पीटकर मार डाला.

मामला सामने आने के बाद असम पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है.

स्थानीय खबरों के अनुसार, सब्जी बेचने वाला सनातन डेका साइकिल से बाजार से लौट रहे थे और इसी दौरान होजो कस्बे के पास मोनाहकुची गांव में उनकी टक्कर एक कार से हो गई. इसके बाद कार में सवार जलील अली और साबिर अली की डेका से झड़प हो गई. तीन अन्य लोग उनके साथ आ गए और पांचों ने मिलकर डेका को पीटना शुरू कर दिया.

स्थानीय लोगों के मौके पर पहुंचने पर पांचों भाग गए. कुछ लोग डेका को पास के अस्पताल लेकर गए जहां उनकी मौत हो गई.

डेका टेटेलिया गांव का रहने वाले थे और एक फैक्टरी में काम करते थे, लेकिन देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान उनकी नौकरी चली गई थी. इसके बाद अपना खर्च निकालने के लिए उन्होंने पास के बाजार में सब्जी बेचनी शुरू कर दी थी.

घटना के बाद मामला दर्ज कर पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू कर दी. रविवार देर रात तक दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया जबकि तीन अन्य फरार हैं.

असम पुलिस के एडीजी (कानून और व्यवस्था) ने ट्वीट कर बताया है कि सनातन डेका हत्या मामले में पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों फैजुर हक और युसूफुद्दीन अहमद आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया है.

डेका पर हमले में शामिल लोगों के मुस्लिम होने के कारण राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के मुखपत्र ‘द ऑर्गनाइजर‘ ने अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित एक रिपार्ट में समूह को इस्लामी भीड़ करार दिया है.

स्थानीय खबरों के विपरित द ऑर्गनाइजर ने दावा किया है कि हिंदू डेका पर रमजान के दौरान मुस्लिम इलाके में सब्जी बेचने के कारण हमला किया गया. हालांकि, पुलिस ने भी इस मामले में ऐसा कोई दावा नहीं किया है.

इससे पहले साल 2018 में राज्य के कर्बी आंगलांग जिले में एक भीड़ ने दो युवकों की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. इस मामले में गुवाहाटी हाईकोर्ट ने फरवरी 20020 में 12 लोगों को दोषी करार दिया था.