मीडिया

फोन टैपिंग की फ़र्ज़ी ख़बर चलाने के आरोप में सचिन पायलट के मीडिया मैनेजर समेत दो पर केस दर्ज

राजस्थान में कुछ महीने पहले 35 दिनों तक चली राजनीतिक खींचतान के बीच सचिन पायलट खेमे ने अशोक गहलोत सरकार पर विधायकों के फोन टैप करने का आरोप लगाया था. इस घटनाक्रम के तक़रीबन दो महीने बाद फ़र्ज़ी ख़बर चलाने के आरोप में पायलट के मीडिया मैनेजर लोकेंद्र सिंह और आजतक के राजस्थान संपादक शरत कुमार के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया है.

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस नेता सचिन पायलट. (फोटो: पीटीआई)

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस नेता सचिन पायलट. (फोटो: पीटीआई)

जयपुर: राजस्थान पुलिस ने राज्य के पूर्व उप-मुख्यमंत्री रहे सचिन पायलट के मीडिया मैनेजर और एक पत्रकार के खिलाफ विधायकों के फोन टैप करने संबंधी झूठी खबर चलाने के आरोप में मामला दर्ज किया है.

आरोप है कि इन लोगों ने अगस्त महीने में राज्य में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व तत्कालीन उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच चली राजनीतिक खींचतान के दौरान एक जगह रुके कांग्रेस विधायकों व मंत्रियों के फोन टैप करने संबंधी झूठी खबर चलाई थी.

राजस्थान में 35 दिनों तक चली राजनीतिक खींचतान के बीच पायलट खेमे ने गहलोत सरकार पर विधायकों के फोन टैप करने का आरोप लगाया था. हालांकि पुलिस ने इस आरोपों से इनकार किया था.

जयपुर के विधायकपुरी थाने में एक अक्टूबर को दर्ज इस मामले में ‘राजस्थान तक’ (आज तक समाचार चैनल) के शरत कुमार और पायलट के मीडिया मैनेजर तथा एक्सवाईजेड न्यूज एजेंसी के लोकेंद्र सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया.

हालांकि पायलट ने इस ताजा घटनाक्रम पर टिप्पणी से इनकार किया है.

गहलोत व पायलट खेमे के बीच राजनीतिक खींचतान के दौरान गहलोत खेमे के विधायक अगस्त महीने में जैसलमेर के एक निजी होटल में रुके थे.

प्राथमिकी के अनुसार, इस बारे में एक परिवाद सात अगस्त को उपनिरीक्षक सत्यपाल सिंह ने दिया कि होटल में रुके विधायकों व मंत्रियों की फोन टैपिंग के बारे में भ्रामक समाचार सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है.

एक अक्टूबर को दर्ज एफआईआर के मुताबिक, जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के पुलिस कंट्रोल रूम के ड्यूटी ऑफिसर सत्यपाल सिंह ने सूचना दी थी कि सात अगस्त को कॉन्स्टेबल सुरेंद्र यादव ने उन्हें इस भ्रामक खबर की जानकारी दी थी, जिसे वॉट्सऐप पर शेयर किया गया था. इस खबर के अनुसार जैसलमेर में रुके विधायकों के फोन रिकॉर्ड किए जा रहे हैं.

एफआईआर के अनुसार, साइबर थाने की जांच में प्रथम दृष्टया इस बारे में भ्रामक व तथ्यहीन समाचार एक्सवाईजेड न्यूज एजेंसी के लोकेंद्र सिंह व राजस्थान तक (आजतक) के शरत कुमार द्वारा तैयार किए जाने का मामला सामने आया है.

इस बारे में जब सचिन पायलट से संपर्क किया गया तो उन्होंने टिप्पणी से इनकार किया जबकि लोकेंद्र सिंह ने इस प्रकरण को ‘राजनीति से प्रेरित’ बताया.

उधर, भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है.

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां ने ट्वीट किया, ‘लोकतंत्र पर खतरे की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले अशोक गहलोत लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के दमन पर उतर आए हैं. कारण है विगत दिनों पत्रकारों ने वंचितों और अबलाओं की रक्षा के लिए आवाज बुलंद की है. सरकार का यह कृत्य तो ‘विनाश काले विपरीत बुद्धि’ जैसा ही होगा.’

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक एफआईआर में कहा गया है कि इसकी जांच विशेष अपराध और साइबर अपराध पुलिस स्टेशन के एसएचओ सुरेंद्र पंचोली ने की थी. पंचोली ने लोकेंद्र सिंह और शरत कुमार के बयान दर्ज किए. आजतक के राजस्थान संपादक शरत कुमार ने टैपिंग के आरोपों पर एक टीवी रिपोर्ट बनाई थी.

सूत्रों ने कहा कि गहलोत द्वारा विश्वास मत जीतने के छह दिन बाद लोकेंद्र सिंह का बयान 20 अगस्त को पायलट के आवास पर दर्ज किया गया था.

एफआईआर में कहा गया है, ‘वे फर्जी खबर के स्रोत के बारे में पूछे जाने पर कोई तार्किक जवाब नहीं दे सके. जांच में यह स्पष्ट हो गया कि लोकेंद्र सिंह और शरत कुमार भ्रामक और फर्जी खबर फैलाने के लिए जिम्मेदार हैं.’

लोकेंद्र सिंह को उनके मोबाइल और कंप्यूटर के साथ पूछताछ के लिए बुलाया गया था, जिसके माध्यम से उन्होंने कथित तौर पर समाचार प्रसारित किया था.

शरत कुमार ने कहा, ‘सभी समाचार चैनलों ने सुबह से शाम तक इस खबर को चलाया था. सिर्फ एक चैनल को क्यों निशाना बनाया जा रहा है?’

एफआईआर में लोकेंद्र सिंह और शरत कुमार पर फर्जी खबर बनाने का आरोप लगाया गया है. कहा गया है कि कुमार ने सोशल मीडिया पर शेयर हो रहीं खबरों की सत्यता की पुष्टि किए बिना इसे 7 अगस्त को प्रसारित किया.

एफआईआर में कहा गया है कि पुलिस इस खबर को चलाने वाले अखबार राजस्थान पत्रिका और दैनिक भास्कर से भी पूछताछ की तो अखबारों ने कहा कि उन्होंने एक्सवाईजेड और आजतक की शुरुआती रिपोर्टों के बाद इसे प्रकाशित किया था.

सिंह और कुमार के खिलाफ जयपुर के विधायकपुरी पुलिस थाने में धारा 505 (1) (कोई बयान, अफवाह या रिपोर्ट बनाना, प्रकाशित या प्रसारित करना), 505 (2) (ऐसा बयान जो विभिन्न वर्गों के बीच दुश्मनी या घृणा को बढ़ावा देता हो) के तहत दर्ज किया गया. इसके अलावा भारतीय दंड संहिता की 120बी (आपराधिक साजिश) और आईटी अधिनियम की धारा 76 भी एफआईआर में जोड़ी गई है.

 

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, 7 अगस्त को पायलट खेमे ने मुख्यमंत्री पर पुलिस की मदद से जैसलमेर के होटल सूर्यगढ़ में उनके छह विधायकों के फोन टैप करने का आरोप लगाया था. उन्होंने विधायकों को किए गए कॉल की एक सूची भी साझा की थी.

पायलट खेमे ने बयान में दावा किया था, ‘सूर्यगढ़ होटल में चार जैमर लगाए गए हैं और पूरे होटल में सिर्फ एक जगह है जहां से कॉल की जा सकती है.’

इन आरोपों को खारिज करते हुए पुलिस ने कहा था कि राजस्थान पुलिस की कोई भी इकाई किसी भी विधायक या सांसद के फोन टैपिंग में शामिल नहीं है. इसके अलावा दूरसंचार पर बातचीत की रिकॉर्डिंग का आरोप भी असत्य और काल्पनिक है.

बता दें कि बीते जुलाई-अगस्त में राजस्थान में करीब एक महीने तक सियासी खींचतान चली थी. कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने बगावत कर दी थी.

कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने 18 विधायकों के साथ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ बगावत करते हुए 12 जुलाई को दावा किया था कि उनके साथ 30 से अधिक विधायक हैं और अशोक गहलोत सरकार अल्पमत में है.

इसके बाद अशोक गहलोत ने दो बार विधायक दल की बैठक बुलाई थी, जिसमें पायलट और उनके समर्थक विधायक नहीं आए. इसके बाद पायलट को उपमुख्यमंत्री पद के साथ-साथ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से भी हटा दिया गया था.

आखिर में 14 अगस्त को अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने विधानसभा में विश्वास मत जीत लिया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)