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मणिपुर: विवादित डिजिटल मीडिया नियम के तहत न्यूज़ पोर्टल को जारी नोटिस वापस लिया गया

केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लाए गए नए नियमों के तहत सबसे पहली नोटिस मणिपुर के न्यूज पोर्टल द फ्रंटियर मणिपुर को उसके एक कार्यक्रम को लेकर जारी किया गया है. पोर्टल को सभी संबंधित दस्तावेज़ों की प्रति मुहैया कराने को कहा गया था, जो इन नियमों के पालन को सुनिश्चित करते हों.

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सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, मणिपुर सरकार द्वारा जारी नोटिस और किशोरचंद्र वांगखेम. (इलस्ट्रेशन: द वायर)

नई दिल्ली: मोदी सरकार द्वारा लाए गए विवादित डिजिटल मीडिया नियम के तहत मणिपुर के एक न्यूज पोर्टल को कानूनी नोटिस जारी करने के बाद राज्य सरकार ने उसे वापस ले लिया है.

इम्फाल स्थित न्यूज पोर्टल द फ्रंटियर मणिपुर के कार्यकारी संपादक पाओजेल चाओबा ने द वायर  को बताया, ‘करीब शाम छह बजे मेरे ऑफिस गेट के बाहर नोटिस लगाया गया था. उसमें कहा गया है कि पूर्व में जारी की गई नोटिस को वापस लिया जाता है. इसे इम्फाल वेस्ट के उसी जिला मजिस्ट्रेट नाओरेम प्रवीण सिंह द्वारा साइन किया गया है.’

प्रशासन ने पोर्टल के वीकेंड शो ‘खानासी नैनसी’ के लिए ये नोटिस जारी किया था. बीते दो मार्च को सुबह करीब नौ बजे चाओबा के घर पर छह या सात पुलिसवाले नोटिस देने आए थे.

इसमें कहा गया था कि चूंकि ये पोर्टल सोशल मीडिया पर न्यूज एवं करंट अफेयर की खबरें प्रसारित करता है, इसलिए उन्हें निर्देश दिया जा है कि वे इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस) नियम 2021 के तहत पोर्टल को सभी संबंधित दस्तावेजों की प्रति मुहैया कराने को कहा गया था, जो इन नियमों के पालन को सुनिश्चित करते हों.

मालूम हो कि इन नियमों का चौतरफा आलोचना हो रही है. इसके तहत प्रशासन को असीमित शक्तियां दी गई हैं, जिसके तहत वह डिजिटल मीडिया के कंटेंट पर अस्पष्ट कारण बताते हुए सवाल उठा सकता है. ये सब प्रकाशक को सुनवाई का मौका दिए बिना किया जा सकता है, जबकि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए ऐसे प्रावधान नहीं हैं.

खास बात ये है कि ‘खानासी नीनासी’ शो बोलने एवं अभिव्यक्ति की आजादी पर फोकस करता है.

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मणिपुर सरकार द्वारा जारी नोटिस.

फेसबुक पर इस शो का संचालन (होस्ट) पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेम करते हैं, जो कि साल 2018 से ही एन. बीरेन सिंह सरकार के निशाने पर हैं. उनके खिलाफ कई सारे मामले दायर किए गए हैं और अभी तक तीन बार जेल जाना पड़ा है.

वांगखेम तब से मणिपुर सरकार के निशाने पर हैं, जब उन्होंने 2018 में सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड किया था, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीरेन सिंह और आरएसएस की आलोचना की थी. उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका), राजद्रोह समेत आईपीसी की कई धाराओं के तहत जेल में जाना पड़ा है.

हालांकि मणिपुर हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ लगे आरोपों को खारिज कर दिया था, लेकिन सितंबर 2020 में उन्हें एक बार फिर से राजद्रोह के आरोप में हिरासत में लिया गया. करीब दो महीने की गिरफ्तारी के बाद वे रिहा हो पाए.

हाल ही में द फ्रंटियर मणिपुर ने उन्हें एसोसिएट एडिटर बनाया है.

बीते दो मार्च को शाम में किशोरचंद्र ने द वायर को बताया, ‘मुझे भी मेरे घर पर नोटिस और उसे वापस लेने वाले आदेश की कॉपी दी गई थी. जब सरकार ने नए डिजिटल मीडिया नियमों के तहत शिकायत निवारण का कोई सिस्टम नहीं बनाया है तो वे किस तरह इम्फाल वेस्ट डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और डिप्टी कमिश्नर नोटिस जारी कर सकते हैं? क्या वे किसी दबाव में थे?’

उन्होंने आगे कहा, ‘इन सवालों का जवाब देने के लिए मैं उन्हें अपने शो पर बुला रहा हूं. मैं डिप्टी कमिश्नर के खिलाफ कानूनी कदम भी उठाऊंगा. कैसे वे नियमों का उल्लंघन कर मुझे प्रताड़ित कर सकते हैं?’


दूसरी ओर द फ्रंटियर मणिपुर के कार्यकारी संपादक पाओजेल चाओबा भी राज्य की पत्रकारिता में एक जाना-पहचाना नाम हैं और इंफाल फ्री प्रेस के लिए उन्होंने कई महत्वपूर्ण रिपोर्ट की हैं, जिनमें से एक राज्य में पुलिस द्वारा किए जा रहे फर्जी एनकाउंटर के बारे में थी.

चाओबा और द फ्रंटियर मणिपुर के संपादक धीरेन साडोकपाम दोनों पहले भी पुलिस कार्रवाइयों का सामना कर चुके हैं. धीरेन साडोकपाम इंफाल फ्री प्रेस के पूर्व प्रमुख संपादक रह चुके हैं.

पोर्टल पर प्रकाशित एक लेख के संबंध में दोनों को एक पुलिस अधिकारी की शिकायत के बाद राज्य पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया था. दिलचस्प ये है कि यही लेख इससे पहले दो अन्य स्थानीय समाचार संगठनों में प्रकाशित हो चुका था, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई थी.

कानून द्वारा अनिवार्य होने के बावजूद जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए बिना राज्य पुलिस ने चाओबा को 24 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखा था.

इतना ही नहीं द फ्रंटियर मणिपुर ने मुख्यमंत्री बीरेन सिंह के एक करीबी की संलिप्तता वाले सनसनीखेज ड्रग्स तस्करी संबंधी मामले को लेकर विस्तार में रिपोर्ट की थी. राज्य की एक पुलिस अधिकारी थोउनाओजम बृंदा ने हाईकोर्ट में दिए गए हलफनामे में कहा था कि एक शख्स लुखाउसी जू को छोड़ने को लेकर मुख्यमंत्री द्वारा दबाव बनाया गया था. उन्होंने ड्रग्स के खिलाफ अभियान को लेकर उन्हें मिला सम्मान भी लौटा दिया था.

चाओबा ने बताया, ‘खानासी नैनसी कार्यक्रम में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर आधारित ऑनलाइन चर्चा होती है. इसमें मणिपुर के अलावा अन्य जगहों से भी वक्ताओं को बुलाया जाता है. हमने अब तक चार ऐसी चर्चाएं कराई हैं.’

संयोग से इस कार्यक्रम में पिछली चर्चा सरकार के डिजिटल मीडिया को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लाए गए दिशानिर्देश को लेकर थी. इस दौरान मणिपुर की स्वतंत्र पत्रकार ग्रेस जोजो ने अपने साथ हुई एक घटना की जानकारी दी थी, जिसमें उनका सामना राज्य प्रशासन के अधिकारियों से हुआ था.

दो मार्च की सुबह खानासी नैनसी के प्रकाशक और अन्य लोगों को जिला मजिस्ट्रेट का नोटिस जारी होने से पहले राज्य पुलिस ने दो गिरफ्तारियां की थीं. एक गिरफ्तारी स्थानीय कंपनी सेवन सलाई के चेयरमैन की थी और दूसरी गिरफ्तारी इस कंपनी से जुड़े इंफाल के पत्रकार की थी. द फ्रंटियर मणिपुर के कार्यक्रम के प्रस्तोताओं में से एक सेवन सलाई भी है.

दोनों की बीते 26 फरवरी को जमानत मिल गई थी.

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