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‘आदर्श बहू’ बनाने वाले स्टार्ट-अप का ‘फ़र्ज़ीवाड़ा’ और मीडिया व आईआईटी बीएचयू की मेहरबानी

‘आदर्श बहू’ ट्रेनिंग की ख़बर आने के बाद आईआईटी बीएचयू ने स्टार्ट-अप ‘यंग स्किल्ड इंडिया’ से किसी भी तरह के संबंध होने से इनकार किया है लेकिन स्थानीय अख़बारों को खंगाले तो इसे ‘आईआईटी बीएचयू का स्टार्ट-अप’ बताने वाली तमाम ख़बरें लंबे समय से छपती रही हैं.

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स्टार्ट-अप यंग स्किल्ड इंडिया से जुड़ी विभिन्न अख़बारों में प्रकाशित ख़बरें और यंग स्किल्ड इंडिया के सीईओ नीरज श्रीवास्तव (कोलाज: दृगचंद्र)

बीते तीन सितंबर को हिंदी दैनिक अमर उजाला के वाराणसी संस्करण में ‘आईआईटी बीएचयू में अच्छी बहू बनने की मिलेगी ट्रेनिंग’ शीर्षक से एक खबर छपी. सोशल मीडिया के इस दौर में यह खबर तेजी से वायरल हुई.

तमाम अन्य मीडिया संस्थानों और समाचार एजेंसियों ने इसी अख़बार की खबर के आधार पर इसे छापा और प्रसारित किया. इस पर कई लोगों ने सवाल खड़े किए और विवाद खड़ा हो गया.

इसे लेकर सोशल मीडिया पर आईआईटी बीएचयू की काफी किरकिरी हुई, जिसके बाद आईआईटी बीएचयू प्रशासन की नींद खुली. अपनी सफाई पेश करते हुए उनके द्वारा भेजी गई प्रेस विज्ञप्ति भी उसी अखबार में छपी, जहां उन्होंने इस स्टार्ट-अप और ऐसे किसी ट्रेनिंग कार्यक्रम से अपने जुड़ाव से इनकार किया.

अखबार ने आईआईटी बीएचयू प्रशासन की सफाई कुछ यूं छापी है,

‘पांच दिन बाद मंगलवार को आईआईटी प्रशासन ने सफाई दी. आईआईटी बीएचयू के प्रेस एंड पब्लिसिटी सेल की ओर से जारी बयान में कहा गया कि ऐसा कोई कोर्स आईआईटी में नहीं चलाया जा रहा है और न ही संस्थान ऐसे किसी भी ट्रेनिंग या कोर्स का समर्थन करता है. आईआईटी का यंग स्किल्ड इंडिया से कोई लेना-देना भी नहीं है.’

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इसके साथ ही इंडियन एक्सप्रेस अखबार में आईआईटी बीएचयू के रजिस्ट्रार डॉ. एसपी माथुर का बयान छपा, जिसमें उन्होंने कहा, ‘इस तरह के विषय पर आईआईटी बीएचयू में कोई प्रशिक्षण या पाठ्यक्रम उपलब्ध या योजनाबद्ध नहीं है. यंग स्किल्ड इंडिया एक निजी स्टार्ट-अप है और आईआईटी बीएचयू का इस स्टार्ट-अप द्वारा योजनाबद्ध किसी ट्रेनिंग प्रोग्राम से किसी भी तरह का नाता नहीं है.’

जिस अखबार का हवाला हम शुरुआत में दे रहे हैं उसी अखबार में छपी इस खबर में कहा गया है कि आईआईटी बीएचयू की ओर से मिली फटकार के बाद यंग स्किल्ड इंडिया स्टार्ट अप के सीईओ नीरज श्रीवास्तव भी बैकफुट पर आ गए हैं और अपनी ही भेजी विज्ञप्ति से यूटर्न ले लिया है.

अख़बार ने इस संस्था द्वारा इस खबर को छापने से पहले और छपने के बाद भेजी गयी विज्ञप्तियों के साथ लिखा,

‘मंगलवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सीईओ नीरज श्रीवास्तव ने भी इस बात को नकार दिया है कि वो बेटी को आदर्श बहू बनाने जैसा कोई कोर्स चला रहे हैं जबकि 31 अगस्त को नीरज ने ‘बेटी से कुशल बहू बनने तक के सफर का सारथी बनेगा स्टार्ट-अप यंग स्किल्ड इंडिया’ शीर्षक से प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी. आईआईटी बीएचयू के मालवीय नवप्रवर्तन केंद्र में यंग स्किल्ड इंडिया नाम से स्टार्ट-अप संचालित है. नीरज श्रीवास्तव इसके सीईओ हैं. इनकी ओर से स्किल डेपलपमेंट के तहत कई खबरें भेजी गई हैं. इसी क्रम में 31 अगस्त को भी यंग स्किल्ड इंडिया के सीईओ नीरज की ओर से दोपहर 2:14 बजे ई-मेल के माध्यम से ‘बेटी से कुशल बहू’ शीर्षक से खबर भेजी गई. खबर छपी तो आईआईटी बीएचयू की खूब किरकिरी हुई.’

दिलचस्प यह है कि ये खबर छपी, वायरल हो गई, तब इससे संबंधित सारे पक्षों की सफाई आ गई, लेकिन अगर वाराणसी के बीते कुछ महीनों के अखबार पलटेंगे तो पाएंगे कि इसी संस्था के हवाले से आईआईटी बीएचयू के नाम से कई खबरें छप चुकी हैं, लेकिन खबर छापने वाले मीडिया संस्थानों ने इस पर कोई पड़ताल ही नहीं की.

किसी भी रिपोर्टर या संपादक ने इस बात पर गौर नहीं किया कि अगर आईआईटी बीएचयू के नाम से खबर छप रही है तो उसमें आईआईटी प्रशासन से जुड़े किसी व्यक्ति का बयान क्यों नहीं है? इस बात पर गौर नहीं किया गया कि एक स्टार्ट-अप अपने किसी ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए आईआईटी बीएचयू के नाम का इस्तेमाल कैसे कर सकता है?

आदर्श बहू की ट्रेनिंग को लेकर छपी खबर प्रसारित करने में भी मूल रूप से जिस अख़बार की खबर का हवाला दिया है, उस संस्थान ने सिर्फ प्रेस विज्ञप्ति के आधार पर इस स्टार्ट-अप की खबरें चलाईं हैं लेकिन सवाल यह है कि जब हर दिन सैकड़ों की संख्या में प्रेस रिलीज आ रही हैं, तो उनमें से एक निजी स्टार्ट-अप की प्रेस रिलीज बार-बार क्यों छापी जा रही है?

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बीते कई महीनों से स्थानीय अख़बारों में प्रकाशित विभिन्न ख़बरों में यंग स्किल्ड इंडिया को आईआईटी बीएचयू का स्टार्ट-अप बताया गया है.

दूसरा सवाल इन खबरों की भाषा पर है. बीते कुछ महीनों में प्रकाशित हुई लगभग हर खबर में हेल्पलाइन नंबर और मोबाइल नंबर दिया गया है, ऐसा सामान्यत: विज्ञापन वाली खबरों में ही दिया जाता है.

दूसरी तरफ सवाल उठता है कि जब वाराणसी के स्थानीय अखबार आईआईटी बीएचयू से किसी संस्था के जुड़ाव संबंधी कोई खबर लगातार छाप रहे हैं तो बीएचयू प्रशासन द्वारा इस पर संज्ञान क्यों नहीं लिया गया?

ये मानना मुश्किल है कि वाराणसी के प्रमुख अखबारों में आईआईटी बीएचयू के नाम से एक निजी स्टार्ट-अप की खबरें लगातार छप रही हैं लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन को इस बारे में कुछ भी पता नहीं चल रहा है.

बनारस से छपने वाले अखबारों को खंगाले तो जितनी बार भी इस स्टार्ट-अप से जुड़ी खबर को छापा गया है, उसमें हर बार इसे ‘आईआईटी बीएचयू का स्टार्ट-अप’ बताया गया है.

स्पष्ट दिखता है कि यंग स्किल्ड इंडिया ने तब तक मीडिया संस्थानों को धोखे में रखा, जब तक आईआईटी प्रशासन की सफाई नहीं आ गई.

यंग स्किल्ड इंडिया के फेसबुक पेज और इसके सीईओ नीरज श्रीवास्तव की फेसबुक टाइमलाइन पर भी आपको ऐसी कई खबरें मिल जाएंगी, जिन्हें पढ़कर ऐसा अंदाज़ा लगता है कि इस स्टार्ट-अप का आईआईटी बीएचयू से जुड़ाव है.

आदर्श बहू की ट्रेनिंग वाली खबर के मुख्यधारा के मीडिया में प्रसारित होने के बाद नीरज श्रीवास्तव ने विभिन्न मीडिया संस्थानों को ईमेल करके कहा कि स्टार्ट-अप यंग स्किल्ड इंडिया द्वारा ‘आदर्श बहू बनाने जैसा कोई भी कोर्स नहीं चलाया जा रहा है, जबकि अमर उजाला को संस्था द्वारा भेजी गयी विज्ञप्ति साफ कहती है कि ‘बेटी से कुशल बहू बनने तक के सफर का सारथी बनेगा स्टार्ट अप यंग स्किल्स इंडिया.’

अमर उजाला के वाराणसी संस्करण में दो सितंबर को प्रकाशित ख़बर.

अमर उजाला के वाराणसी संस्करण में दो सितंबर को प्रकाशित ख़बर.

जब द वायर  द्वारा नीरज श्रीवास्तव से इस विवाद पर बात की गयी तब उन्होंने इस सारी गलती का ठीकरा मीडिया पर फोड़ा. उनका कहना है कि मीडिया ने बिना पड़ताल किए खबर छाप दी है.

नीरज ने कहा, ‘यंग स्किल्ड इंडिया बेरोजगारी पर काम करने वाला एक स्टार्ट-अप है, जो सभी छात्र-छात्रों को प्रोफेशनल स्किल्स की ट्रेनिंग देता है. वनिता पॉलिटेक्निक के साथ मिलकर छात्रों को प्रोफेशनल स्किल, कॉन्फिडेंस बिल्डिंग के साथ-साथ जॉब इंटरव्यू स्किल्स की भी ट्रेनिंग देता है. इसका आदर्श बहू बनाने जैसे कोर्स से कोई लेना-देना नहीं है. इसका आईआईटी बीएचयू से कोई लेना-देना नहीं है.’

रिपब्लिक टीवी से हुई बातचीत में भी नीरज साफ कहते सुने जा सकते हैं, ‘इस कोर्स को डिजाइन करने में बीएचयू का कोई रोल नहीं है. यंग स्किल्ड इंडिया एक इंडिपेंडेंट बॉडी है. इंडिपेडेंट स्टार्ट-अप है.’

जब उनसे पूछा जाता है कि बीएचयू की कितनी मदद मिलती है, तो उनका जवाब होता है, ‘ये वहां का स्टार्ट-अप है. जो स्टार्ट-अप को हेल्प करता है इन्क्यूबेशन सेंटर उसने हमें जगह दी है. बस इतना ही रोल है. वहां के प्रोफेसर और बच्चों से हमारा कोई मतलब नहीं है.’

यानी साफ है कि बीते कुछ समय से इस संस्था के आईआईटी बीएचयू से जुड़ाव के नाम पर खबरें अखबारों में छपती रहीं और बड़ी संख्या में युवाओं को गुमराह किया जाता रहा है.

यह भी स्पष्ट है कि अगर आदर्श बहू की ट्रेनिंग संबंधी खबर पर हल्ला नहीं मचता तो यंग स्किल्ड इंडिया के आईआईटी बीएचयू से जुड़ाव की खबरें अखबार में छपती रहतीं और बेरोजगार युवाओं को लगता कि वो आईआईटी बीएचयू से जुड़े किसी संस्थान से स्किल ट्रेनिंग ले रहे हैं.

ऐसे में सवाल यह है कि क्या इस पूरे मामले में आईआईटी बीएचयू  प्रशासन, यंग स्किल्ड इंडिया स्टार्ट-अप और मीडिया ने मिलकर युवाओं को ठगने का काम किया है?

क्या मीडिया और विश्वविद्यालय प्रशासन को यह पता था कि एक निजी स्टार्ट-अप आईआईटी बीएचयू के नाम का दुरुपयोग कर रहा है? क्या इस पूरे गड़बड़झाले में शामिल लोगों ने जानबूझकर एक निजी स्टार्ट-अप को फायदा पहुंचाने की कोशिश की है? या फिर सिर्फ महज लापरवाही के कारण इस पर ध्यान नहीं दिया गया!

द वायर ने इस मामले पर आईआईटी बीएचयू के रजिस्ट्रार डॉ. एसपी माथुर से संपर्क किया. उनके कार्यालय द्वारा ईमेल पर सवाल भेजने को कहा गया, हमने उन्हें यह सवाल भेजे. ‘क्या यंग स्किल्ड इंडिया स्टार्टअप आईआईटी बीएचयू से संबद्ध है? अगर हां, तो यह जुड़ाव किस तरीके का है? अगर नहीं, तो हर खबर में ‘आईआईटी बीएचयू का स्टार्टअप’ होने की बात क्यों लिखी है. क्या यह आईआईटी बीएचयू प्रशासन की अनुमति से हो रहा था, अगर नहीं तो अब तक यंग स्किल्ड इंडिया स्टार्टअप पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई.’

यह सवाल भेजने के चार दिन बाद रविवार को इस पर रजिस्ट्रार की तरफ से सिर्फ एक लाइन में इतना जवाब आया है कि आईआईटी बीएचयू का यंग स्किल्ड इंडिया से कोई भी संबंध नहीं है.

गौरतलब है कि आईआईटी बीएचयू प्रशासन पहले ही यह बात बता चुका है कि उसका यंग स्किल्ड इंडिया से कोई नाता नहीं है लेकिन आईआईटी बीएचयू प्रशासन उन सवालों का जवाब नहीं देता है जो हमने उनसे पूछा है. अगर यंग स्किल्ड इंडिया स्टार्टअप का आईआईटी बीएचयू से नाता नहीं था और अखबारों में ऐसी खबर छप रही थी तो आईआईटी प्रशासन ने इसका खंडन क्यों नहीं किया और यंग स्किल्ड इंडिया स्टार्टअप पर आईआईटी के नाम का दुरुपयोग करने को लेकर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की.

ईमेल पर द वायर  ने नीरज श्रीवास्तव से सवाल किया था, ‘आपका यंग स्किल्ड इंडिया एक निजी स्टार्ट-अप है लेकिन इसके बावजूद आपके निजी स्टार्ट-अप को ‘आईआईटी बीएचयू का स्टार्ट-अप’ बताकर स्थानीय मीडिया में कई खबरें आपके फोन नंबर और बयान के साथ पिछले कई महीने से छपती रही हैं. फिर आपने उनका खंडन क्यों नहीं किया?’

जिस पर नीरज श्रीवास्तव ने ईमेल से जवाब दिया है, ‘यंग स्किल्ड इंडिया बेरोजगारी पर काम करने वाला एक स्टार्ट-अप है जो सभी छात्र-छात्रों को प्रोफेशनल स्किल्स की ट्रेनिंग देता है, जो वनिता पॉलिटेक्निक के साथ मिलकर छात्रों को प्रोफेशनल स्किल, कॉन्फिडेंस बिल्डिंग के साथ-साथ जॉब इंटरव्यू स्किल्स की भी ट्रेनिंग देता है. इसे ‘आदर्श बहू बनाने’ जैसे कोर्स से कोई लेना-देना नहीं है!’

ये वही जवाब है जिसे वे स्पष्टीकरण के रूप में पहले ही भेज चुके हैं. ‘आईआईटी बीएचयू का स्टार्ट-अप’ होने से जुड़े सवाल पर उनका कोई जवाब नहीं आया.

02 अप्रैल 2017 के अख़बार में छपी एक ख़बर में नीरज श्रीवास्तव को आईआईटी बीएचयू का छात्र बताया गया था. (साभार: संबंधित ईपेपर)

02 अप्रैल 2017 के अख़बार में छपी एक ख़बर में नीरज श्रीवास्तव को आईआईटी बीएचयू का छात्र बताया गया था.

इसके अलावा अमर उजाला अख़बार की लगभग एक साल पुरानी खबर में नीरज श्रीवास्तव को आईआईटी बीएचयू का छात्र बताया गया है. जब द वायर  ने उनसे इस बारे में पूछा तो उन्होंने आईआईटी बीएचयू से पढ़ाई से इनकार किया.

इस मामले पर द वायर  द्वारा स्थानीय मीडिया से भी संपर्क किया गया, जिसमें उन्होंने अपनी गलती मानी कि नीरज श्रीवास्तव द्वारा भेजी गयी प्रेस विज्ञप्तियों पर ठीक से पड़ताल नहीं की गयी, साथ ही उन्होंने आईआईटी बीएचयू प्रशासन के रवैये पर भी सवाल उठाए.

अमर उजाला वाराणसी के स्थानीय संपादक राजेंद्र त्रिपाठी ने द वायर  से बात करते हुए कहा, ‘जब यह मामला मेरे संज्ञान में आया है तब हमने इसकी पड़ताल कराई. नीरज श्रीवास्तव नाम के व्यक्ति ने जो प्रेस विज्ञप्ति भेजी, उसमें आईआईटी बीएचयू का उल्लेख ऐसे होता था, जैसे आधिकारिक मेल में होता है. मेल को देखकर आपको यह नहीं लगेगा कि यह आईआईटी बीएचयू से कुछ अलग मामला है. हमारे रिपोर्टर से यह गलती हुई कि उसने कभी पड़ताल की कोशिश नहीं की.’

संबंधित ख़बर में अख़बार द्वारा लगातार फोन नंबर छापे जाने पर उन्होंने कहा, ‘अमूमन किसी खबर में फोन नंबर नहीं छापा जाता है, इसमें हमें फोन नंबर नहीं छापना चाहिए था. ये भूलवश हो गया. हम उनके मार्केटिंग मैनेजर नहीं हैं. हम इसे सिर्फ प्रेस रिलीज की तरह ले रहे थे. किसी भी मीडिया दफ्तर में जैसे प्रेस विज्ञप्ति छपती है यह बिल्कुल उसी तरह से है.’

आईआईटी बीएचयू के रवैये पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, ‘हमारे रिपोर्टर से गलती हुई है कि उन्होंने ढंग से पड़ताल नहीं की, लेकिन हमारा सवाल आईआईटी बीएचयू प्रशासन से है कि पांच-छह महीने से खबरें छप रही थीं, तो उन्होंने इसका खंडन क्यों नहीं किया? यह गलती सिर्फ अमर उजाला से नहीं हुई है, बनारस के ज्यादातर मीडिया संस्थानों ने इसे ऐसे ही लिया है.’

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