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मणिपुर: मुख्यमंत्री और राज्य सरकार की आलोचना करने पर पत्रकार रासुका के तहत गिरफ़्तार

इम्फाल के पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेम को सोशल मीडिया पर राज्य की भाजपा सरकार की आलोचना करते वीडियो अपलोड करने और मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह को कथित तौर पर अपमानजनक शब्द बोलने के चलते राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ़्तार किया गया है.

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मणिपुर के पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेम (फोटो साभार: फेसबुक)

इम्फाल: मणिपुर सरकार की आलोचना करते वीडियो अपलोड करने के चलते पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेम को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत गिरफ्तार किया गया है. आरोप यह भी है कि उन्होंने मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के लिए कथित अपमानजनक शब्द भी कहे.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार उनके द्वारा प्राप्त दस्तावेजों से इस बात की पुष्टि हुई है कि 27 नवंबर को किशोर को रासुका के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था. इसके बाद अगले दिन उन्हें पश्चिम इम्फाल के सीजेएम कोर्ट से जमानत मिल गयी थी.

उस समय अदालत ने कहा था कि किशोर की टिप्पणियां ‘देश के प्रधानमंत्री और मणिपुर के मुख्यमंत्री के खिलाफ उनकी अभिव्यक्ति ठि और इसे ‘राजद्रोह’ नहीं कहा जा सकता.

किशोर की पत्नी ई. रंजीता ने इस अख़बार से बात करते हुए बताया कि किशोर को पहली बार 20 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद उन्हें 26 नवंबर को उन्हें 70,000 रुपये के मुचलके पर जमानत मिल गयी थी.

रंजीता ने आगे बताया, ‘इसके बाद 27 नवंबर को उन्हें पुलिस स्टेशन बुलाया गया. 5-6 पुलिस वाले सादे कपड़ों में हमारे घर आए और उन्हें लेकर चले गए. मुझे तो कल (गुरुवार 30 नवंबर) जाकर पता लगा कि उन्हें रासुका के तहत गिरफ्तार किया गया.’

शुक्रवार को इम्फाल में किशोर की तत्काल रिहाई के लिए प्रदर्शन भी किया गया.

19 नवंबर को सोशल मीडिया पर अंग्रेजी और मेईतेई भाषा में अपलोड की गयी कई वीडियो क्लिप्स में किशोर ने कथित तौर पर कहा है, ‘मैं वर्तमान मणिपुर सरकार के झांसी की रानी का जन्मदिन मनाने के फैसले पर दुखी और हैरान हूं. और मुख्यमंत्री खुद यह दावा कर रहे हैं कि देश के एकीकरण में और स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका के चलते भाजपा सरकार ऐसा कर रही है. लेकिन… उनका मणिपुर से कोई लेना-देना नहीं है. आप ये इसलिए मना रहे हैं क्योंकि केंद्र ने ऐसा करने को कहा है.’

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन.बीरेन को केंद्र के हाथों की ‘कठपुतली’ बताते हुए उन्होंने कहा, ‘… मणिपुर के स्वतंत्रता सेनानियों को धोखा मत दीजिये, उनका अपमान मत कीजिये. मणिपुर के वर्तमान स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान मत कीजिए. मणिपुर की जनता का अपमान मत कीजिये. इसलिए, मैं ये दोबारा कह रहा हूं, आप,  आइये, मुझे दोबारा गिरफ्तार कीजिये, लेकिन मैं फिर भी कहूंगा… आप हिंदुत्व के हाथों की कठपुतली हैं.’

कहा जा रहा है कि उन्होंने कथित तौर पर मुख्यमंत्री को गाली भी दी थी.

पश्चिम इम्फाल के सीजेएम कोर्ट ने वांगखेम को जमानत देते हुए कहा था कि ‘वीडियो में की जा रही टिप्पणियां ऐसी नहीं लगती कि वे विभिन्न समूहों, समुदायों आदि के बीच द्वेष उत्पन्न कर सकती हैं, न ही ऐसा लगता है कि यह भारत सरकार या राज्य सरकार के खिलाफ नफरत, अवमानना, असंतुष्टि फैलाने का प्रयास हैं.’

अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘यह देश के प्रधानमंत्री और मणिपुर के मुख्यमंत्री के खिलाफ व्यक्त की गई टिप्पणी है, जिसे भारत या मणिपुर सरकार के खिलाफ लोगों को हिंसा फैलाने के आमंत्रण के समान नहीं समझा जा सकता.’ साथ ही यह भी जोड़ा कि इसे राजद्रोह नहीं मान सकते.

हालांकि 27 नवंबर को पश्चिम इम्फाल के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट द्वारा एक आदेश में कहा गया कि अगले आदेश तक वांगखेम को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून 1980 की धारा 3 (2) के तहत हिरासत में रखा जाना चाहिए।

इससे पहले अगस्त महीने में भी वांगखेम को सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक रूप से भड़काऊ पोस्ट लिखने के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है.

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