Corona Vaccine

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

क्या कोरोना वायरस का टीका विकसित करने में आईसीएमआर जल्दबाज़ी दिखा रहा है?

आईसीएमआर की ओर से कहा गया है कि कोरोना वायरस का टीका तेजी से बनाने का उद्देश्य अनावश्यक लालफीताशाही कम करना है. हालांकि आईसीएमआर द्वारा 15 अगस्त तक वैक्सीन बनाने के दावों पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सवाल खड़े किए हैं. यहां तक कि टीका विकसित कर रही कंपनी भी अक्टूबर से पहले इसका ट्रायल पूरा करने से इनकार कर रही है.

कोवैक्सिन. (फोटो साभार: फेसबुक/bharatbiotech)

आईसीएमआर की कोविड-19 वैक्सीन लॉन्च करने की समयसीमा को लेकर वैज्ञानिक क्यों चिंतित हैं?

आईसीएमआर ने कोविड-19 की स्वदेशी वैक्सीन के लॉन्च के लिए 15 अगस्त की समयसीमा निर्धारित की है, जिसे लेकर डॉक्टर्स और वैज्ञानिक संशय में हैं. वैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक का भी मानना है कि ट्रायल पूरे होने में अक्टूबर तक का समय लग सकता है.

कोवैक्सिन. (फोटो साभार: फेसबुक/bharatbiotech)

देश की पहली कोविड-19 वैक्सीन को मानव परीक्षण की अनुमति मिली

‘कोवैक्सिन’ नामक टीके को भारत बायोटेक ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान के साथ मिलकर विकसित किया है.

Minara masjid wears a deserted look on the first day of the holy fasting month of Ramzan, amid unprecedented circumstances due to the coronavirus pandemic and a nationwide lockdown, in Mumbai. PTI

कोविड संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए मलप्पुरम ने एक नई राह दिखाई है

आज जब पूरे देश में धार्मिक स्थलों को खोला जा रहा है, तब बीते दिनों ‘सांप्रदायिक’ होने का इल्ज़ाम झेलने वाले केरल के मलप्पुरम ज़िले ने अपनी अलग राह चुनी है. कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र वहां की पांच हज़ार मस्जिदों को अनिश्चितकाल तक बंद रखने समेत कई धार्मिक स्थलों को न खोलने का फ़ैसला लिया गया है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस. (फोटो: रॉयटर्स)

कोरोना से जंग में अन्य देशों की मदद के लिए भारत जैसे राष्ट्रों को सलामः संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र महासिचव एंतोनियो गुतारेस का यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में भारत ने अमेरिका समेत कई देशों को कोरोना वायरस संक्रमण का संभावित उपचार मानी जा रही मलेरिया रोधी दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन की आपूर्ति की है.

(फोटोः पीटीआई)

कोरोना वायरस के मामलों में 40 फीसदी की कमी आईः केंद्र सरकार

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि 15 मार्च और 31 मार्च के बीच कोरोना संक्रमण की औसत वृद्धि दर 2.1 थी जबकि एक और 15 अप्रैल के बीच यह दर 1.2 रही. 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कोरोना के मामले दोगुना होने की दर राष्ट्रीय औसत की तुलना में कम है.

1896-97 में बॉम्बे में फैले प्लेग के दौरान मरीजों के लिए बना एक अस्थायी अस्पताल. (फोटो साभार: Wellcome Library, London)

कोरोना संकट का यह दौर प्लेग के ख़िलाफ़ संघर्ष का एक बिसरा दिया गया पन्ना याद दिलाता है

कोरोना संक्रमण की भयावहता के चलते इसकी वैक्सीन के मानव परीक्षणों के लिए एक अमेरिकी महिला के सामने आने के बाद कई वालंटियर्स सामने आए हैं. यह उस समय के बिल्कुल उलट है जब जीवविज्ञानी वाल्देमार हाफकिन को प्लेग के टीके का सबसे पहला प्रयोग स्वयं पर करना पड़ा था क्योंकि कोई और इसके लिए तैयार ही नहीं था.