Indian Freedom Movement

Narendra Modi Savarkar Facebook

सावरकर को भारत रत्न देना आज़ादी के नायकों का अपमान है

क्या ऐसा शख़्स, जिसने अंग्रेज़ सरकार के पास माफ़ीनामे भेजे, जिन्ना से पहले धर्म के आधार पर राष्ट्र बांटने की बात कही, भारत छोड़ो आंदोलन के समय ब्रिटिश सेना में हिंदू युवाओं की भर्ती का अभियान चलाया, भारतीयों के दमन में अंग्रेज़ों का साथ दिया और देश की आज़ादी के अगुआ महात्मा गांधी की हत्या की साज़िश का सूत्रसंचालन किया, वह किसी भी मायने में भारत रत्न का हक़दार होना चाहिए?

भगत सिंह (फोटो: द वायर)

भगत सिंह को गांधी या नेहरू का विकल्प बताना भगत सिंह के साथ अन्याय करना है

ऐसा लगता है कि भगत सिंह के प्रति श्रद्धा वास्तव में गांधी-नेहरू से घृणा का दूसरा नाम है. जिनके वैचारिक पूर्वज ख़ुद को बचाते हुए अपने अनुयाइयों को भगत सिंह से दूर रहने की सलाह देते हुए दिन गुज़ारते रहे, उन्होंने अपनी कायर हिंसा को उचित ठहराने के लिए आज भगत सिंह को एक ढाल बना लिया है.

Court Hammer (2)

मध्य प्रदेशः दलित किसान की हत्या के मामले में 13 को उम्रक़ैद

किसान पर सितंबर 2017 में उनकी हत्या के पहले आरोपियों द्वारा दो बार हमला किया गया था, जिसको लेकर वे एससी/एसटी अधिनियम के तहत केस दर्ज करवाने की कोशिश कर रहे थे.

Kesari Poster Fb Dharma Productions

फिल्म केसरी का भगवा रंग

फिल्में जितने लोगों तक पहुंचती हैं, कोई इतिहास की किताब नहीं पहुंचती. तो केसरी के बाद सारागढ़ी के युद्ध की जो रूपरेखा इस फिल्म दिखाई गई है, वही सार्वजनिक कल्पना में इतिहास का स्थान ले लेगी.

North Block IB

इंटेलीजेंस ब्यूरो का काम ही भारत के सत्ताधीशों की भारतीयों से हिफ़ाज़त करना रहा है

1887 में ब्रिटिश राज द्वारा बनाए गए इंटेलीजेंस ब्यूरो को भारतीय क़ानून के तहत कोई अधिकार प्राप्त नहीं है. इसे आधिकारिक रूप से ‘एक नागरिक संगठन बताया जाता है, जिसके पास पुलिस जैसी शक्तियां नहीं हैं.’

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing the gathering at a function to commemorate the 75th anniversary formation of the Azad Hind Government, at Red Fort, Delhi on October 21, 2018.

मोदी को प्रधान सेवक के साथ भारत का प्रधान इतिहासकार भी घोषित कर देना चाहिए

प्रधानमंत्री इसीलिए आज के ज्वलंत सवालों के जवाब देना भूल जा रहे हैं क्योंकि वे इन दिनों नायकों के नाम, जन्मदिन और उनके दो-चार काम याद करने में लगे हैं. मेरी राय में उन्हें एक मनोहर पोथी लिखनी चाहिए, जो बस अड्डे से लेकर हवाई अड्डे पर बिके. इस किताब का नाम मोदी-मनोहर पोथी हो.

फोटो साभार: खबोर आॅनलाइन डॉट कॉम

आज़ादी की लड़ाई में संघ की भूमिका पर सवाल उठाने वाली किताब क्यों छपने नहीं देना चाहती है सरकार?

अजय आशीर्वाद बता रहे हैं कि आज़ादी की लड़ाई पर आधारित एक किताब को पिछले दो सालों से भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद प्रकाशन की अनुमति नहीं दे रहा है.