Indian National Congress

असदुद्दीन ओवैसी. (फोटो: पीटीआई)

50 साल कांग्रेस में रहे व्यक्ति ने संघ मुख्यालय पर माथा टेक दिया: ओवैसी

प्रणब मुखर्जी के संघ मुख्यालय जाने पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि जिन्होंने महात्मा गांधी के क़त्ल पर जश्न मनाया था, वह उनके दफ़्तर जाकर बहुलतावाद की बात करते हैं, किसको बेवकूफ बना रहे हैं वो.

नागपुर में संघ मुख्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी. (फोटो: रॉयटर्स)

असहिष्णुता को लेकर बतौर राष्ट्रपति चंद नसीहत भरे भाषण के अलावा प्रणब ने क्या किया था?

अगर देश के संविधान का मूल स्तंभ सहिष्णुता और धर्म-निरपेक्षता है, तो फिर मोदी सरकार के शुरुआती तीन साल तक संविधान के मुखिया के पद पर बैठकर प्रणब मुखर्जी ने क्या किया?

लाल कृष्ण आडवाणी. (फोटो साभार: यूट्यूब)

प्रणब का संघ मुख्यालय जाकर भाषण देना इतिहास की महत्वपूर्ण घटना: लालकृष्ण आडवाणी

भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि इस प्रकार खुलेपन की भावना और आपसी सम्मान के साथ विचारों के आदान-प्रदान से सहिष्णुता और सौहार्द की भावना तैयार करने में मदद मिलेगी.

Nagpur: Former president Pranab Mukherjee being welcomed by Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) chief Mohan Bhagwat at the closing ceremony of ‘Tritiya Varsha Sangh Shiksha Varg’, an Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) event to mark the conclusion of a three-year training camp for swayamsevaks in Nagpur, on Thursday, June 07, 2018. (PTI Photo)(PTI6_7_2018_000147B)

भारत की आत्मा बहुलतावाद और सहिष्णुता में बसती है: प्रणब मुखर्जी

संघ मुख्यालय, नागपुर में आरएसएस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा, ‘हमारा राष्ट्रवाद किसी क्षेत्र, भाषा या धर्म विशेष के साथ बंधा हुआ नहीं है.’

योगी आदित्यनाथ (फोटो: पीटीआई)

उत्तर प्रदेश में गोरखपुर डीएम समेत 37 आईएएस अधिकारियों का तबादला

गोरखपुर और फूलपुर संसदीय सीटों के उपचुनाव में भाजपा की हार और सरकार की किरकिरी के बाद शुक्रवार देर रात प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा फेरबदल किया गया है.

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क्या राहुल की ‘भद्रता’ उनकी कमज़ोरी को छिपाने का बहाना है?

राहुल गांधी व कांग्रेस पार्टी ने मणिशंकर अय्यर से दूरी बनाने की जितनी जल्दबाज़ी दिखाई उससे गुजरात और देश ने यह सबक नहीं लिया कि राहुल एक भद्र व्यक्ति हैं बल्कि यह संदेश गया कि राहुल में लड़ने का माद्दा नहीं है.

हार्दिक पटेल. (फोटो: ट्विटर/हार्दिक)

हार्दिक ने गुजरात में भाजपा पर बेईमानी और धनबल से चुनाव जीतने का आरोप लगाया

हार्दिक ने दावा किया, मतदान के दौरान कई जगह वाई-फाई नेटवर्क पकड़ा गया. कई स्थानों पर मतगणना से पहले ईवीएम की सील टूटी मिली.

(फोटो: पीटीआई)

गुजरात विधानसभा चुनाव: कांग्रेस के बड़े चेहरे हारे, भाजपा के ज़्यादातर दिग्गजों को मिली जीत

कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अर्जुन मोढ़वाडिया, सिद्धार्थ चिमनभाई पटेल और राष्ट्रीय प्रवक्ता शक्तिसिंह गोहिल को क़रारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है.

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क्या गुजरात में मोदी की चमक फीकी पड़ गई ​है?

गुजरात में अपनी कमज़ोरियों के कारण कांग्रेस भले ही बाज़ी नहीं पलट पायी, लेकिन मतदाताओं ने पिछली बार से डेढ़ दर्जन ज़्यादा सीटें देकर साफ कर दिया है कि वे ‘अपने’ प्रधानमंत्री के ‘कांग्रेसमुक्त भारत’ के आह्वान को कान नहीं दे रहे.

फोटो: पीटीआई

गुजरात में छठी बार लहराया​ भगवा, कांग्रेस के हाथ से हिमाचल भी गया

कांग्रेस ने गुजरात के परिणामों को बताया नैतिक जीत, राहुल ने गुजरात और हिमाचल प्रदेश की नई सरकारों को बधाई दी.

(फोटो: पीटीआई)

गुजरात चुनाव में भाजपा की जीत विपक्ष के लिए सुखद संदेश लाई है

अगर हिंदुत्ववादी आख्यान का जादू इस देश में चलेगा तो इससे यही प्रमाणित होता है कि भारत की राजनीति में विचारधारा की मौत नहीं हुई है. वह अगर दक्षिणपंथ के रूप में जिंदा है तो उसके वामपंथी या मध्यमार्गी होने की संभावना भी है.

New Delhi: AICC Vice President Rahul Gandhi interacts with street vendors at his residence in New Delhi on Saturday. PTI Photo by Atul Yadav(PTI3_15_2014_000126B)

गुजरात विधानसभा चुनाव परिणाम: कांग्रेस को उसकी मेहनत से ज़्यादा मिला है

गुजरात की जनता भाजपा सरकार से नाराज़ थी, लेकिन उनकी परेशानी को सुनने और आवाज़ उठाने वाला विपक्ष सड़कों पर नहीं था.

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गैर-कांग्रेसवाद के घाट पर ही होगा कांग्रेस उद्धार

कांग्रेस अब तक अगर विजयी होती रही है तो उसका कारण यही था कि वह अपने विरोधियों की मांगों और उनके गुणों को आत्मसात कर लेती थी. जब तक वह ऐसा करती रही तब तक चलती रही और जब छोड़ दिया तो अवसान की ओर बढ़ने लगी.

कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करने के दौरान उन्हें शुभकामनाएं देते पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी. (फोटो: ट्विटर/रणदीप सुरजेवाला)

कांग्रेस को प्रासंगिक बनाए रखना राहुल के लिए सबसे बड़ी चुनौती है

‘राहुल गांधी के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती अपने को एक विश्वसनीय नेता के रूप में साबित करने की है जिसमें वह पिछले 15 सालों से विफल रहे हैं.’

(फोटो साभार: Nehru Memorial Library)

क्या जनता के नेहरू को दिल्ली निगल गई?

1950-60 के दशक में दिल्ली ने अपने जैसा एक नेहरू बना लिया. यह 1920-30 के दशक के नेहरू से भिन्न था. समय के साथ वो नेहरू जनता की नज़र से ओझल होते गए जिसने अवध के किसान आंदोलन में संघर्ष किया था.

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नेहरू के ख़िलाफ़ किए जा रहे दुष्प्रचार की वजह क्या है?

जवाहर लाल नेहरू की असफलताएं भी गिनाई जा सकती हैं, लेकिन उसके पहले आपको नेहरू का इस देश के निर्माण में महान योगदान भी स्वीकारना होगा.

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चुनाव आयोग को नहीं है पार्टियों को चंदे के रूप में प्राप्त कर-मुक्त राशि की जानकारी

पिछले दो वित्त वर्षों में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस जैसे प्रमुख राष्ट्रीय दलों ने प्राप्त चंदे का विवरण नहीं दिया है.

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जब नेहरू ने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर ज़ुल्म हो रहे हैं तो क्या हम भी यहां वही करें?

नेहरू स्वतंत्रता आंदोलन से निकले अकेले ऐसे नायक हैं, जिनकी विचारधारा और पक्षधरता में कोई विरोधाभास नहीं है.