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Varanasi: Students come out after appearing in the B.Ed entrance exam, at Banaras Hindu University in Varanasi, Sunday, Aug 30, 2020. (PTI Photo)(PTI30-08-2020_000045B)

फाइनल ईयर परीक्षाएं: विद्यार्थी की जान और यूजीसी की शान

अगर यूजीसी को अंतिम परीक्षा लेने का अपना निर्णय इतना उचित लग रहा है तो वह इसके तर्क विस्तार से क्यों नहीं बता रहा और उसमें जो विकल्प हो सकते हैं उन पर विचार क्यों नहीं कर रहा? हड़बड़ी में सिर्फ अपनी सत्ता स्थापित करने के लिए छात्रों के स्वास्थ्य की परवाह किए बिना शिक्षा की गुणवत्ता पर ज़ोर देना अमानवीयता है.

(फोटो: पीटीआई)

फाइनल वर्ष की परीक्षा कराने के यूजीसी के फ़ैसले में कुछ भी अनुचित या मनमाना नहीं: सुप्रीम कोर्ट

यूजीसी के 30 सितंबर तक विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के अंतिम साल की परीक्षाएं कराने के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है. साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर राज्य आपदा प्रबंधन क़ानून के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल कर इसे आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो उन्हें आयोग के सामने आवेदन करने की छूट है.

(फोटो: रॉयटर्स)

ऑनलाइन शिक्षा: राज्य ने अपनी ज़िम्मेदारी जनता के कंधों पर डाल दी है

संरचनात्मक रूप से ऑनलाइन शिक्षण में विश्वविद्यालय की कोई भूमिका नहीं है, न तो किसी शिक्षक और न ही किसी विद्यार्थी को इसके लिए कोई संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं. यानी शिक्षा, जो सार्वजनिक और सांस्थानिक ज़िम्मेदारी थी वह इस ऑनलाइन मॉडल के चलते व्यक्तिगत संसाधनों के भरोसे है.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

परीक्षाओं को लेकर यूजीसी के दिशानिर्देश राज्यों के लिए बाध्यकारीः एचआरडी अधिकारी

यूजीसी ने छह जुलाई को सभी संस्थानों को सितंबर के अंत तक टर्मिनल सेमेस्टर या अंतिम वर्ष की परीक्षाएं आयोजित कराने की सलाह दी थी. पश्चिम बंगाल, ओडिशा, महाराष्ट्र और पंजाब ने यूजीसी के इसका विरोध करते हुए केंद्र सरकार को पत्र लिखा है.

(फोटो: पीटीआई)

अपने पुराने शोध कार्य को फिर से प्रकाशित करना साहित्यिक चोरी के समान होगा: यूजीसी

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से कहा गया है कि वह जल्द ही शोध कार्यों की साहित्यिक चोरी करने और उसे नए प्रारूप में पेश करने के मामलों के आकलन के लिए नए मापदंड जारी करेगा.

दिल्ली यूनिवर्सिटी के वीसी योगेश त्यागी.

डीयू: वीसी ने प्रधानमंत्री राहत कोष को दी गई राशि पीएम केयर्स में डाली, शिक्षकों ने जताई आपत्ति

दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन का कहना है कि कुलपति योगेश त्यागी ने यूनिवर्सिटी के स्टाफ द्वारा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष के लिए दिए गए करीब चार करोड़ रुपये बिना किसी की सलाह के पीएम केयर्स फंड में ट्रांसफर किए हैं.

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय. (फोटो: शोम बसु)

जेएनयू एक सामूहिक उपलब्धि है

जेएनयू कोई द्वीप नहीं है, वहां हमारे ही समाज से लोग पढ़ने जाते हैं. जो बात उसे विशिष्ट बनाती है, वो है उसके लोकतांत्रिक मूल्य. इनका निर्माण किसी एक व्यक्ति, पार्टी या संगठन ने नहीं, बल्कि भिन्न प्रकृति और विचारधारा के लोगों ने किया है. यदि ऐसा नहीं होता, तब किसी भी सरकार के लिए इसे ख़त्म करना बहुत आसान होता.

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यूजीसी ने कहा, शोध में मात्रा की जगह गुणवत्ता को मिलना चाहिए महत्व

सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को भेजे गए एक पत्र में यूजीसी ने कहा कि चयन, पदोन्नति इत्यादि में प्रकाशित कार्य की संख्या के बजाय गुणवत्ता पर जोर दिया जाना चाहिए.

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विश्वविद्यालय सामाजिक आधार पर एससी, एसटी छात्रों के साथ भेदभाव से बचें: यूजीसी

यूजीसी ने विश्वविद्यालयों से कहा है कि वे अपनी वेबसाइट पर एक पेज बनाएं जहां इससे जुड़ी शिकायतें दर्ज कराई जा सकें और ऐसी किसी भी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई हो.

(फोटो: पीटीआई)

पाक अधिकृत कश्मीर के संस्थानों में प्रवेश न लें छात्र: यूजीसी

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से कहा गया कि पाकिस्तान अधिकृत जम्मू कश्मीर संघीय भारत का अभिन्न हिस्सा है लेकिन वहां स्थित विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज, तकनीकी संस्थान और अन्य शैक्षणिक संस्थान न तो भारत सरकार द्वारा स्थापित किए गए हैं और न ही यूजीसी जैसी संस्थाओं द्वारा प्रमाणित हैं.

(फोटो साभार: swarajyamag.com)

छात्रावास के भेदभावपूर्ण नियम पर केरल हाईकोर्ट ने कहा- लड़कियों को भी आज़ादी का अधिकार

केरल हाईकोर्ट के जस्टिस ए. मुहम्मद मुस्ताक ने राजनीतिक बैठकों, प्रदर्शनों या प्रचार में सक्रिय रूप से लड़कियों की भागीदारी पर रोक लगाने वाले नियम को खत्म करते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत हर व्यक्ति को अपना राजनीतिक विचार रखने का मौलिक अधिकार है.

31 जनवरी 2019 को नई दिल्ली में 13 पॉइंट रोस्टर के खिलाफ हुआ प्रदर्शन। (फोटो: पीटीआई)

13 पॉइंट रोस्टर संविधान में दी गई सामाजिक-आर्थिक न्याय की प्रस्तावना के ख़िलाफ़ है

13 पॉइंट रोस्टर लागू करने का फ़ैसला देश की अब तक प्राप्त सभी सामाजिक उपलब्धियों को ख़त्म कर देगा. इससे विश्वविद्यालय के स्टाफ रूम समरूप सामाजिक इकाई में बदल जाएंगे क्योंकि इसमें भारत की सामाजिक विविधता को सम्मान देने की कोई दृष्टि नहीं है.

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उच्च शिक्षा, शोध के लिए अधिक फंड की ज़रूरत है: यूजीसी चेयरमैन

यूजीसी चेयरमैन डीपी सिंह ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों को अपने पाठ्यक्रमों का फिर से मूल्यांकन करने और आने वाले पांच वर्षों में उपलब्ध होने वाले रोजगार के अवसरों का आकलन करने की आवश्यकता है.

New Delhi: A view of Supreme Court of India in New Delhi, Thursday, Nov. 1, 2018. (PTI Photo/Ravi Choudhary) (PTI11_1_2018_000197B)

सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला, विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति में होगा विभागवार आरक्षण

2017 में विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति में आरक्षण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि आरक्षण विभागवार आधार पर दिया जाए न कि कुल सीटों के आधार पर. केंद्र द्वारा इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी.

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय. (फोटो: पीटीआई)

मोदी सरकार को समझना चाहिए कि उच्च शिक्षा संस्थान जनसंपर्क कार्यालय नहीं होते

सीसीएस जैसे क़ानूनों का उद्देश्य उच्च शिक्षा के उद्देश्यों को ही ध्वस्त कर देना है. उच्च शिक्षा में विकास तब तक संभव नहीं है जब तक विचारों के आदान-प्रदान की आज़ादी नहीं हो. अगर इन संस्थाओं की ये भूमिका ही समाप्त हो जाए तो उच्च शिक्षा की आवश्यकता ही क्या रहेगी? शिक्षक और शोधार्थी सरकारी कर्मचारी की तरह व्यवहार नहीं कर सकते.