मणिपुर: चोरी हुए हथियारों की आधिकारिक संख्या का रिकॉर्ड नहीं, अब तक 1800 बरामद

मणिपुर में बीते 3 मई को मेईतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा शुरू होने के बाद से कम से कम 4,000 हथियार लूटे गए हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों को पुलिस थानों और शस्त्रागारों से लूटे गए हथियारों और गोला-बारूद की सही संख्या का पता नहीं है, क्योंकि रिकॉर्ड रखने वाले रजिस्टर या तो नष्ट कर दिए गए हैं या किसी के द्वारा ले लिए गए हैं.

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मणिपुर में अभियान चलाकर सेना और पुलिस द्वारा जब्त किए गए कुछ हथियार. (फाइल फोटो: ट्विटर/@Spearcorps)

मणिपुर में बीते 3 मई को मेईतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा शुरू होने के बाद से कम से कम 4,000 हथियार लूटे गए हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों को पुलिस थानों और शस्त्रागारों से लूटे गए हथियारों और गोला-बारूद की सही संख्या का पता नहीं है, क्योंकि रिकॉर्ड रखने वाले रजिस्टर या तो नष्ट कर दिए गए हैं या किसी के द्वारा ले लिए गए हैं.

मणिपुर में अभियान चलाकर सेना और पुलिस द्वारा जब्त किए गए कुछ हथियार. (फाइल फोटो: ट्विटर/@Spearcorps)

नई दिल्ली: मणिपुर में अधिकारियों को पुलिस स्टेशनों और शस्त्रागारों से लूटे गए हथियारों और गोला-बारूद की सही संख्या नहीं पता है, क्योंकि रिकॉर्ड रखने वाले रजिस्टरों या तो नष्ट कर दिए गए हैं या हिंसा के दौरान किसी ने ले लिए हैं.

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, बीते 3 मई को मेईतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा शुरू होने के बाद से कम से कम 4,000 हथियार चोरी हो गए हैं. इनमें इंसास और एके-47 जैसी असॉल्ट राइफलें भी शामिल हैं.

अखबार ने बताया कि इनमें से आधे से भी कम यानी लगभग 1,800 हथियार ही अब तक बरामद किए गए हैं.

बीते 24 जून को तमेंगलोंग, इंफाल पूर्व, बिष्णुपुर, कांगपोकपी, चुराचांदपुर और काकचिंग जिलों में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान साहुम्फाल गांव के एक धान के खेत में तीन 51 मिमी और तीन 84 मिमी मोर्टार गोले पाए गए और कांगवई और एस. कोटलियान गांवों के बीच एक धान के खेत में एक आईईडी पाया गया था.

रिपोर्ट के अनुसार, बम निरोधक टीम ने मोर्टार शेल और आईईडी को निष्क्रिय कर दिया था.

हाल ही में द वायर ने राज्य में ​​हथियारों के लूटे जाने के संबंध में एक रिपोर्ट की थी और इस संबंध में दर्ज एफआईआर का विश्लेषण किया था.

भारतीय राइफल्स कमांडो बटालियन द्वारा हिंगांग पुलिस थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर को द वायर ने देखा, जिसके अनुसार उपद्रवियों ने 28 मई को दोपहर 3 बजे खाबेसोई में बटालियन के मुख्यालय पर धावा बोल दिया था. वे 322 इंसास राइफल, 9 एएफ राइफल, असॉल्ट राइफल एक्सकैलिबर और विभिन्न अन्य आधुनिक हथियार ले गए. हिंगांग पुलिस थाना इंफाल पूर्वी जिले के अंतर्गत आता है.

मणिपुर पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज के एक सूबेदार द्वारा 4 मई को दर्ज कराई गई एक अन्य एफआईआर के अनुसार, दोपहर 1:45 बजे भीड़ जबरन परिसर में घुस गई. उन्होंने मुख्य द्वार को तोड़ दिया, शस्त्रागार के ताले खोल दिए और 157 इंसास राइफल, 54 एसएलआर, 34 ‘9एमएम कार्बाइन’, 22 इंसास एलएमजी, 9एमएम पिस्तौल, कई मैगजीन, एके-47, .303 राइफल समेत अन्य हथियार लूट ले गए.

हिंगांग पुलिस थाने में दर्ज एक और एफआईआर में कहा गया है कि विभिन्न अत्याधुनिक हथियारों के साथ-साथ बुलेटप्रूफ जैकेट, सील गार्ड हेलमेट और फाइबर स्टिक्स भी चोरी की गई हैं. लूट 4 मई की शाम 5 बजे हुई थी.

28 मई को मणिपुर राइफल्स द्वारा दर्ज कराई एक एफआईआर के अनुसार, ‘घाटी के उपद्रवियों की एक अनियंत्रित भीड़ ने दोपहर 1:30 बजे बम, हथियार और गोला-बारूद छीन लिए.’

अधिकांश पुलिस शस्त्रागार अब खाली पड़े हैं. मणिपुर के एक मंत्री एल. सुसिंद्रो मेईतेई ने 12 जून को इंफाल पूर्व में अपने आवास पर एक ड्रॉप बॉक्स लगाया था, जिसमें लोगों से लूटे गए हथियार डालने के लिए कहा गया था, जिसके बदले में उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं किए जाने की बात कही गई थी.

हालांकि बीते 23 जून को राजधानी इंफाल​ स्थित राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग और उपभोक्ता मामलों के मंत्री एल. सुसिंद्रो मेइतेई के एक निजी गोदाम को जला दिया गया था.

मणिपुर में जातीय संघर्ष शुरू हुए लगभग दो महीने हो गए हैं, लेकिन हिंसा कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं. हिंसा के बीच लूटे गए हथियार और गोला-बारूद राज्य में शांति के लिए खतरा बने हुए हैं.

उल्लेखनीय है कि बीते 3 मई से कुकी और मेईतेई समुदायों के बीच भड़की जातीय हिंसा में अब तक 100 से अधिक लोग मारे गए हैं. लगभग 50,000 लोग विस्थापित हुए हैं.

मणिपुर में अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मेईतेई समुदाय की मांग के विरोध में बीते 3 मई को पर्वतीय जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद झड़पें हुई थीं, हिंसा में बदल गई और अब भी जारी हैं.

मणिपुर की 53 प्रतिशत आबादी मेईतई समुदाय की है और ये मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहते हैं. आदिवासियों- नगा और कुकी की आबादी 40 प्रतिशत है और ये पर्वतीय जिलों में रहते हैं.

केंद्र की मोदी सरकार ने बीते 10 जून को राज्यपाल अनुसुइया उइके के नेतृत्व में 51 सदस्यीय शांति समिति का गठन किया था.

तब मेईतेई और कुकी-ज़ोमी दोनों समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले समूहों ने कहा था कि वे शांति समिति में भाग नहीं लेंगे.

दरअसल इस समिति में मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह को शामिल किया गया है, जिनका विरोध किया जा रहा है. कई संगठनों पर राज्य में वर्तमान में जारी हिंसा के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया है.