नगालैंड: उपमुख्यमंत्री ने जनसभा के दौरान पत्रकार को सामने बैठने से मना किया, कैमरे पर धमकाया

नगालैंड के उपमुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता यंथुंगो पैटन ने एक जनसभा में हॉर्नबिल टीवी के रिपोर्टर को अपने सामने बैठने से मना करते हुए कहा कि वे उनके सवाल 'बर्दाश्त नहीं करेंगे'. फिर सरेआम कुछ लोगों से उन्हें इलाके से खदेड़ने के लिए कहा. स्थानीय पत्रकारों और मीडिया संगठनों ने मंत्री के कृत्य की निंदा की है.

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नगालैंड के उप-मुख्यमंत्री वाई. पैटन एक गांव में एक जनसभा को संबोधित करते हुए. (फोटो: X/@YanthungoPatton)

नई दिल्ली: पूर्वोत्तर के पत्रकार जगत को झकझोर देने वाली एक घटना में नगालैंड के उपमुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ राज्य नेता यंथुंगो पैटन ने पिछले 23 अगस्त को एक जनसभा में एक स्थानीय समाचार चैनल के लिए काम करने वाले पत्रकार को निशाना बनाया और कैमरे पर कहा कि उन्होंने ‘कुछ लोगों’ से उन्हें इलाके से ‘खदेड़ने’ के लिए कहा था.

रिपोर्टर दीप सैकिया, असम के रहने वाले हैं और नगालैंड स्थित हॉर्नबिल टीवी के लिए काम करते हैं. उन्हें जनसभा में भाजपा नेता ने ‘अपने सामने न बैठने’ के लिए कहा था. साथ ही उन्होंने कहा कि वे उनसे पूछे गए किसी भी प्रश्न को ‘बर्दाश्त नहीं करेंगे.’

हॉर्नबिल टीवी द्वारा 24 अगस्त को प्रसारित एक वीडियो क्लिप में पैटन, जो राज्य के गृह मंत्री और सीमा मामलों के मंत्री भी हैं, को राज्य के वोखा जिले के लिपहानियन गांव में आयोजित सार्वजनिक बैठक में रिपोर्टर को देखते ही अपनी सीट से उठते हुए देखा जा सकता है और उनका नाम लेकर उन्हें डांटते और धमकाते हुए देखा जा सकता है.

पैटन उस ग्रामसभा में मुख्य अतिथि थे, जो विवादित नगालैंड सीमा पर स्थित रेंगमा रिजर्व फॉरेस्ट में असम सरकार द्वारा चलाए जा रहे बेदखली अभियान के मद्देनजर आयोजित की गई थी.

ज्ञात हो कि असम-नगालैंड सीमा विवाद एक लंबे समय से लंबित मुद्दा है और यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में है. हालांकि, असम सरकार नगालैंड के भंडारी विधानसभा क्षेत्र की सीमा से लगे उरियमघाट के पास के इलाके में बेदखली अभियान चला रही थी.

23 अगस्त को असम के वन मंत्री चंद्र मोहन पटवारी बेदखल की गई ज़मीन पर वृक्षारोपण अभियान चलाने के लिए उस इलाके का दौरा करने वाले थे. सीमावर्ती गांवों में तनाव बढ़ गया था क्योंकि आसपास के नगा गांवों के लोगों ने इस आधार पर वृक्षारोपण अभियान का विरोध किया था कि सीमा विवाद पर अभी भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है.

अंततः असम सरकार को अभियान रोकना पड़ा.

23 अगस्त को पैटन स्थानीय विधायक अचुम्बेमो किकोन के साथ जनहित के मुद्दे पर असम के वन मंत्री के साथ एक संयुक्त बैठक करने के लिए उस स्थान पर आए थे. वृक्षारोपण अभियान का विरोध करते हुए आसपास के नगा गांवों के लोगों ने कैमरे पर साकिया को बताया कि पैटन 24 जुलाई को गांव आए थे और 20 अगस्त तक न तो वह, न वोखा ज़िला आयुक्त और न ही भंडारी निर्वाचन क्षेत्र के विधायक अचुम्बेमो किकोन उनसे मिलने आए, वहीं असम पुलिस कथित तौर पर सीमा विवाद के तहत बेदखल किए गए क्षेत्र में बाड़ लगाने के लिए ‘एकतरफ़ा’ कदम उठा रही थी और वृक्षारोपण अभियान की योजना बना रही थी.

स्थानीय खबरों के अनुसार, 18 अगस्त को असम ने नगालैंड के साथ मिलकर इस इलाके में एक संयुक्त बेदखली अभियान चलाया और हल्दीबाड़ी इलाके में 41 घरों को ध्वस्त कर दिया, हालांकि लोगों के विरोध के कारण पुलिस को कृष्णापुर में इसे रोकना पड़ा. पिछले 23 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने गौहाटी हाईकोर्ट के उन आदेशों पर रोक लगा दी थी जिनके आधार पर उरियमघाट में बेदखली अभियान चलाया जा रहा था.

नगा ग्रामीणों ने रिपोर्टर को बताया कि 21-22 अगस्त को ही वोखा के डीसी उनके इलाके में आए थे, उसके बाद 23 अगस्त को स्थानीय विधायक और गृह मंत्री पैटन ने असम के वन मंत्री के साथ संयुक्त बैठक की. नगा ग्राम परिषद के अध्यक्ष और ग्राम प्रधान को हॉर्नबिल टीवी पर राज्य नेतृत्व की आलोचना करते हुए सुना जा सकता है क्योंकि लगभग एक महीने तक उनके पास कोई नहीं आया, जब असम पुलिस द्वारा बेदखली अभियान चलाए जाने के कारण वे अपने घरों में असुरक्षित महसूस कर रहे थे.

संयुक्त बैठक के बाद 23 अगस्त को पैटन और स्थानीय विधायक, जो नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) से जुड़े हैं और भाजपा नेता के बेहद करीबी माने जाते हैं, ने नगा इलाकों में जनसभाएं कीं, जिनमें लिपहानयान गांव भी शामिल था.

वहां उन्होंने रिपोर्टर पर ‘गलत रिपोर्टिंग’ का आरोप लगाया और पूछा, ‘आप कौन होते हैं यह कहने वाले कि मैं उस इलाके में कभी नहीं गया? मैं ऐसी चीज़ें बर्दाश्त नहीं करूंगा… यही वजह थी कि मैंने कुछ लोगों से उन्हें भगाने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.’

भाजपा मंत्री को यह भी पूछते सुना जा सकता है कि उन्होंने भंडारी विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक एम. किकोन का इस मामले में साक्षात्कार क्यों लिया. किकोन हाल तक भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता थे. उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था.

किकोन, जिन्होंने पिछला विधानसभा चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़ा था, एनपीएफ के अचेमबेमो किकोन से हार गए थे.

पत्रकारों ने भाजपा की निंदा की

क्षेत्र के कई वरिष्ठ पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर भाजपा नेता के कृत्य की निंदा की, वहीं कोहिमा प्रेस क्लब और मोकोकचुंग प्रेस क्लब ने बयान जारी कर नगालैंड के गृह मंत्री की इस हरकत की निंदा की है.

बयान में कहा गया, ‘कोहिमा प्रेस क्लब पत्रकारों को उनके कर्तव्य का पालन करने के लिए निशाना बनाने वाले इस तानाशाही व्यवहार की निंदा करता है. पत्रकारों के रूप में सच जानने के लिए सवाल उठाना और घटनाओं का निष्पक्ष और व्यापक विवरण देना हमारा मौलिक कर्तव्य है.’

मोकोकचुंग प्रेस क्लब ने बयान में कहा, ‘पत्रकारों को सवाल पूछने, सच की तलाश करने और बिना किसी डर और प्रतिशोध के घटनाओं की रिपोर्टिंग करने का अधिकार और ज़िम्मेदारी दोनों है. प्रेस को चुप कराने या उस पर प्रतिबंध लगाने का कोई भी प्रयास न केवल इस पेशे को बल्कि जनता के सूचना के मौलिक अधिकार को भी कमजोर करता है… प्रेस बिरादरी अपने सदस्यों को कमजोर करने या डराने-धमकाने के किसी भी प्रयास के खिलाफ एकजुट रहेगी.’

बाद में पैटन ने एक ‘स्पष्टीकरण‘ जारी करते हुए दावा किया कि सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों की उपेक्षा संबंधी मीडिया रिपोर्ट्स ‘निराधार’ हैं और कहा कि वह स्थिति पर लगातार नज़र रख रहे हैं.

हालांकि, उन्होंने रिपोर्टर के साथ अपने दुर्व्यवहार और धमकी के बारे में कुछ नहीं कहा.