बिहार एसआईआर: अंतिम सूची से कुल 47 लाख मतदाता बाहर, कई प्रश्न बरकरार

बिहार में अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई है. जनवरी की तुलना में 47 लाख मतदाता बाहर हो गये हैं. जनवरी में बिहार में कुल 7.89 करोड़ मतदाता थे. 1 अगस्त की सूची में कुल 7.24 करोड़ मतदाता रह गये और अब ताज़ा सूची में 7.42 करोड़ मतदाता दर्ज हैं.

(फोटो: निर्वाचन आयोग/द वायर)

नई दिल्ली: निर्वाचन आयोग ने मंगलवार (30 सितंबर) को बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी है. इसके तहत बिहार में कुल 7.42 करोड़ मतदाता हैं.

बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई है. जनवरी की तुलना में बिहार में 47 लाख मतदाता सूची से बाहर हो गये हैं.

जनवरी की मतदाता सूची में बिहार में कुल 7.89 करोड़ मतदाता थे. इसके बाद चुनाव आयोग ने 1 अगस्त को मसौदा मतदाता सूची जारी की थी, जिसमें कुल 7.24 करोड़ मतदाता रह गये. यानी 65 लाख मतदाता बाहर हो गए थे. चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, बाहर किए गए 65 लाख मतदाताओं में से 22 लाख मतदाता मृत घोषित किए गए थे, 36 लाख स्थायी रूप से स्थानांतरित हो गए थे या नहीं मिले थे और सात लाख मतदाताओं के नाम कई जगहों पर दोहराए गए थे.

जब ड्राफ्ट सूची की विसंगतियां सामने आयीं और राजनीतिक दलों ने इसका व्यापक विरोध किया, चुनाव आयोग ने आज नई सूची जारी की है. इस नई सूची में 7.42 करोड़ मतदाता दर्ज हैं. इनमें 21.53 लाख वे मतदाता हैं जिनका नाम 1 अगस्त को जारी सूची में नहीं था, और 3.66 लाख वे मतदाता हैं जिनका नाम अगस्त की सूची में था लेकिन अपात्र पाये जाने पर उनका नाम हटा दिया गया.

अभी भी यह स्पष्ट नहीं है कि वे मतदाता कौन हैं जिनका नाम हटाया गया है, या जोड़ा गया है.

25 जून को शुरू हुई एसआईआर की इस कवायद में फॉर्मों की गणना का चरण शामिल था, जिसके बाद मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की गई. इसके बाद 1 सितंबर तक दावे और आपत्तियां प्रस्तुत करने का दौर चला.

गौरतलब है कि चुनाव आयोग द्वारा सूचीबद्ध 11 दस्तावेज़ों, जिनमें आधार, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड जैसे आसानी से उपलब्ध दस्तावेज़ शामिल नहीं थे, के कारण मतदाताओं के बाहर होने की चिंताएं जताई गई थीं.

इस प्रक्रिया शुरू होने के  77 दिनों के बाद चुनाव आयोग ने 9 सितंबर को बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को निर्देश जारी किए कि आधार को 24 जून के आदेश में पहले सूचीबद्ध 11 दस्तावेज़ों के साथ 12वें दस्तावेज़ के रूप में शामिल किया जाएगा. सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए, चुनाव आयोग ने कहा कि ‘आधार कार्ड को पहचान के प्रमाण के रूप में स्वीकार और उपयोग किया जाना है, न कि नागरिकता के प्रमाण के रूप में.’

इस प्रक्रिया की आलोचना इस बात के लिए भी हुई है कि यह मतदाता सूची में संशोधन की आड़ में नागरिकता साबित करने का एक प्रयास है और पिछले दरवाजे से एनआरसी लागू करने का तरीका है.

उल्लेखनीय है कि आगामी 7 अक्टूबर को सर्वोच्च न्यायालय एसआईआर को चुनौती देने वाले मामले में अंतिम दलीलें सुनेगा.

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