नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद जैसी संरचना वाली प्रस्तावित मस्जिद के शिलान्यास से पहले बढ़ते तनाव के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को शांति की जोरदार अपील की और लोगों से बंगाल की लंबी चली आ रही एकता और सांप्रदायिक सद्भाव की परंपरा को बनाए रखने की अपील की.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एकता दिवस/सौहार्द दिवस के अवसर पर संदेश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाल की धरती हमेशा विभाजनकारी ताकतों का प्रतिरोध करती आई है और आगे भी करती रहेगी. उन्होंने कहा, ‘एकता ही शक्ति है.’
बनर्जी ने कहा, ‘बंगाल की मिट्टी एकता की मिट्टी है. यह रवींद्रनाथ की मिट्टी है, नज़रुल की मिट्टी है, रामकृष्ण-विवेकानंद की मिट्टी है – इस मिट्टी ने कभी विभाजन के आगे सिर नहीं झुकाया, और आने वाले दिनों में भी नहीं झुकाएगी.’
राज्य की समावेशी संस्कृति पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, ‘हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध – बंगाल में हम सब कंधे से कंधा मिलाकर चलना जानते हैं. हम अपनी खुशियां साझा करते हैं. क्योंकि हमारा मानना है कि धर्म व्यक्ति का होता है, लेकिन त्योहार सबके होते हैं.’
किसी राजनीतिक समूह का नाम लिए बिना बनर्जी ने कहा कि सांप्रदायिक तनाव भड़काने की कोशिश करने वाली ताकतों का कड़ा मुकाबला किया जाएगा.
उन्होंने कहा, ‘जो लोग देश को तबाह करने के लिए सांप्रदायिक आग भड़काने के खेल में लगे हुए हैं, उनके खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी. सभी लोग शांति और सौहार्द बनाए रखें.’
सुरक्षा कड़ी की गई
बनर्जी का यह बयान ऐसे समय आया है जब मुर्शिदाबाद में टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर द्वारा उस मस्जिद की आधारशिला रखने की घोषणा पर माहौल तनावपूर्ण है, जिसे वह बार-बार ‘बाबरी मस्जिद मॉडल’ बताते रहे हैं.
यह कार्यक्रम 6 दिसंबर को हो रहा है – यानी 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद के ढहाए जाने की बरसी, जिसे बेहद संवेदनशील तारीख माना जाता है.
पार्टी नेतृत्व के विरोध के बावजूद योजना आगे बढ़ाने पर कबीर को टीएमसी से निलंबित किया गया है, लेकिन उन्होंने कार्यक्रम न रोकने का ऐलान किया है और इस महीने के अंत तक अपनी नई राजनीतिक पार्टी लॉन्च करने की भी बात कही है.
उनका दावा है कि बेलडांगा में इस समारोह में तीन लाख लोग जुट सकते हैं. स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने इलाके में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी है. राष्ट्रीय राजमार्ग-12 के पास स्थित स्थल को सील कर दिया गया है और दोनों ओर आरएएफ, जिला पुलिस और केंद्रीय बलों की तैनाती की गई है.
इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने कार्यक्रम पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन यह साफ कर दिया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य की ज़िम्मेदारी होगी.
प्रस्तावित मस्जिद और उससे जुड़ी प्रतीकात्मकता ने मुर्शिदाबाद के राजनीतिक हलकों में चिंता बढ़ा दी है – यह वह जिला है जहां धार्मिक लामबंदी का इतिहास गहरा रहा है.
बेलडांगा जैसे संवेदनशील क्षेत्र को चुनने पर कबीर की आलोचना कई पक्षों से हो रही है, जिसमें उनके पूर्व सहयोगी भी शामिल हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि समय और स्थान – दोनों ने इस विवाद को और गंभीर बना दिया है, जिससे शनिवार का दिन हाल के महीनों में सबसे संवेदनशील दिनों में से एक बन गया है.
