नई दिल्ली: ओडिशा के केंद्रपाड़ा ज़िले के एक आंगनबाड़ी केंद्र में पिछले तीन महीनों से लगभग कोई उपस्थिति दर्ज नहीं हुई है, क्योंकि यहां नामांकित बच्चों के माता-पिता ने एक दलित महिला को सहायक-सह-रसोइया नियुक्त किए जाने के विरोध में अपने बच्चों को भेजना बंद कर दिया है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नुआगांव गांव के इस आंगनबाड़ी केंद्र में 20 नवंबर को 21 वर्षीय सरमिस्ता सेठी की नियुक्ति की गई थी. इसके बाद ग्रामीणों ने या तो अपने बच्चों को केंद्र भेजना बंद कर दिया या कुछ मामलों में राशन घर ले जाने लगे.
सरमिस्ता, जो स्नातक हैं और तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं, इस नौकरी के लिए अपने गांव से आवेदन करने वाली इकलौती व्यक्ति थीं. भले ही इसमें केवल 5,000 रुपये महीने का मामूली वेतन मिलता है, फिर भी वह खुश थीं. उन्होंने इस विवाद पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया.
एक अन्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, लिज़ारानी पांडव ने बताया कि गांव के कई लोग उनकी नियुक्ति से नाराज़ हैं. इस केंद्र में 6 महीने से 3 साल तक के 22 बच्चे और 3 से 6 साल तक के 20 बच्चे नामांकित हैं. यहां सत्तू और अंडे जैसे खाद्य पदार्थ दिए जाते हैं. आम तौर पर बड़े बच्चे आंगनबाड़ी आते हैं, जबकि छोटे बच्चों के माता-पिता भोजन लेने आते हैं. आंगनबाड़ी स्तनपान कराने वाली माताओं को भी भोजन देती है.
लिज़ारानी ने अखबार से कहा, ‘बड़े बच्चे नहीं आ रहे हैं, और केवल दो अभिभावक ही राशन घर ले जा रहे हैं. यहां तक कि एक स्तनपान कराने वाली मां ने भी राशन लेना बंद कर दिया है.’
लिज़ारानी ने बताया कि उन्होंने और सरमिस्ता ने अभिभावकों को समझाने की कोशिश की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. उन्होंने कहा, ‘आख़िरकार मैंने उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत दी.’
ब्लॉक और तहसील के अधिकारियों ने ग्रामीणों के साथ कई दौर की बैठकें कीं. केंद्रपाड़ा की बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) दीपाली मिश्रा के अनुसार, ज़िला प्रशासन के अधिकारी बुधवार को गांव पहुंचे.
उन्होंने कहा, ‘कुछ अभिभावक अपने बच्चों को भेजने के लिए राज़ी हो गए हैं, जबकि कुछ ने फ़ैसला लेने के लिए तीन दिन का समय मांगा है. हमें उम्मीद है कि यह समस्या जल्द ही सुलझ जाएगी.’
केंद्रपाड़ा के कलेक्टर रघुराम अय्यर ने कहा कि सब-कलेक्टर ने स्थिति का आकलन करने के लिए गांव का दौरा किया है. उन्होंने कहा, ‘सब-कलेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.’
सरकार की बुलाई बैठक से ग्रामीण रहे नदारद
दलित महिला की नियुक्ति के बाद तीन महीने से जारी एक आंगनबाड़ी केंद्र के बहिष्कार को लेकर देशभर में हुई नाराज़गी का ग्रामीणों पर कोई खास असर दिखाई नहीं पड़ा.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, ओडिशा के केंद्रपाड़ा ज़िला प्रशासन द्वारा बुधवार (11 फरवरी, 2026) को इस विवाद को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए बुलाई गई बैठक में ग्रामीण शामिल नहीं हुए.
केंद्रपाड़ा के सब-कलेक्टर के नेतृत्व में ज़िला स्तरीय अधिकारियों की एक टीम राजनगर ब्लॉक के घड़ियामाल ग्राम पंचायत के अंतर्गत नुआगांव गांव पहुंची थी.
बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) दीपाली मिश्रा ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि ग्रामीण अपने बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र भेजें, क्योंकि उनकी गैरहाज़िरी से न केवल उनकी प्री-स्कूल शिक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि उनका पोषण भी, जो सरकार मुफ्त में उपलब्ध कराती है. लेकिन बैठक में सिर्फ सरपंच और वार्ड सदस्य (निर्वाचित प्रतिनिधि) और दो ग्रामीण ही पहुंचे.’
अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया कि, ग्रामीण अपने बहिष्कार की कोई वजह बताने से बच रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे कानूनी पेचीदगियां पैदा हो सकती हैं. हालांकि, एक वरिष्ठ अधिकारी, जो सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए ग्रामीणों को मनाने की कोशिशों में शामिल थे, ने कहा कि इस बहिष्कार की जड़ में जातिवाद ही कारण बताया जा रहा है.
मिश्रा ने कहा, ‘हमने सरपंच और वार्ड सदस्यों से कहा है कि वे ग्रामीणों से बातचीत करें और उन्हें आंगनबाड़ी के बहिष्कार से पीछे हटने के लिए समझाएं. इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि आंगनबाड़ी में जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल होनी चाहिए.’
ज़िला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि किसी भी सूरत में महिला की नियुक्ति वापस नहीं ली जाएगी.
