नई दिल्ली: मेघालय में एक अवैध रैट-होल कोयला खदान के संचालन और हालिया विस्फोट के बाद हुई मौतों का स्वतःसंज्ञान लेते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने पर्यावरणीय कानूनों के उल्लंघन का हवाला देते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और मेघालय सरकार को नोटिस जारी किए हैं.
5 फरवरी को पूर्वी जयंतिया हिल्स ज़िले के माइनसंगट-थांग्स्को इलाके में 100 फीट गहरी एक अवैध कोयला खदान में विस्फोट हुआ, जिसमें 18 लोगों की मौत हो गई. 10 फरवरी को अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक मृतक संख्या 18 से बढ़कर 30 हो गई है.
6 फरवरी को जारी अपने आदेश में भारत की शीर्ष हरित अदालत एनजीटी ने कहा कि (तत्कालीन) 18 मौतों के साथ 5 जनवरी को हुई यह घटना, जुलाई 2021 के बाद खनन से जुड़ी सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक है.
अदालत ने यह भी नोट किया कि कार्यकर्ताओं के अनुसार, राजनेताओं और अन्य प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में खदान मालिक अप्रैल 2014 में एनजीटी द्वारा कोयले के खनन और उसके परिवहन पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद अवैध रूप से काम करते रहे – जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था.
ट्रिब्यूनल ने कहा, ‘उपरोक्त मामला एनजीटी के आदेशों के उल्लंघन और अनुपालन न होने को दर्शाता है, जिसमें वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981, भारतीय वन अधिनियम, 1927 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 का उल्लंघन शामिल है.’
ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि यह घटना ‘पर्यावरण के नियमों के पालन और तय कानून के नियमों के कार्यान्वयन से जुड़े गंभीर मुद्दे’ उठाती है.
मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल की पीठ ने मेघालय के मुख्य सचिव शकील पी. अहमद, दिल्ली स्थित सीपीसीबी और शिलांग स्थित उसके एकीकृत क्षेत्रीय कार्यालय, तथा पूर्वी जयंतिया हिल्स जिला के उपायुक्त मनीष कुमार को नोटिस जारी किए. संबंधित प्राधिकरणों को 12 मई तक ट्रिब्यूनल के समक्ष जवाब दाखिल करना होगा.
इसके बाद 19 मई को इस मामले की सुनवाई होगी.
बता दें कि मेघालय में एनजीटी द्वारा साल 2014 में प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी रैट होल खदानों में खनन जारी है. रैट होल खदान चूहों के बिल जैसी होती है, जिसमें संकरी सुरंगें खोदी जाती हैं, जिसके भीतर मजदूर जाते हैं और कोयला निकालकर लाते हैं.
क्षेत्र में अवैध कोयला खनन के कारण वर्षों से कई जानलेवा घटनाएं हो चुकी हैं, जबकि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और सुप्रीम कोर्ट द्वारा बार-बार प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद यह सिलसिला जारी रहा है.
तब ट्रिब्यूनल ने मेघालय सरकार – उसके मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक – दोनों से कहा था कि ‘पूरे मेघालय राज्य में रैट-होल/अवैध खनन तत्काल रोका जाए और इस ट्रिब्यूनल के आगे के आदेश तक कोयले का कोई भी अवैध परिवहन न हो.’
एनजीटी ने इस आदेश के पालन न होने पर बार-बार चिंता भी जताई है. 2024 में नगालैंड में एक अवैध रैट-होल कोयला खदान में छह मजदूरों की मौत के बाद एनजीटी ने नगालैंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और खनन विभाग सहित अन्य को इस उल्लंघन को लेकर फटकार लगाई थी.
