नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम विधानसभा चुनावों से पहले राज्य का दौरा कर चुनावी अभियान की शुरुआत कर दी है. उन्होंने इस दौरे में ब्रह्मपुत्र नदी पर बने नए छह लेन के पुल, आपातकालीन लैंडिंग सुविधा का उद्घाटन किया. साथ ही 5,500 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, गुवाहटी में विशाल जनसभा को संबोधित किया. पूर्वोत्तर के विकास पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस क्षेत्र की उपेक्षा पहले की सरकारों ने की थी, वह अब सरकार की प्राथमिकता है और असम के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर काम किया जा रहा है.
उल्लेखनीय है कि बीते दो कार्यकाल से भाजपा ही सरकार में है. कांग्रेस पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उसके शासनकाल में देश की सुरक्षा से समझौता किया गया और असम में भय का माहौल बना रहा.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सात दशकों में ब्रह्मपुत्र पर केवल तीन पुल बनवाए, जबकि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने पिछले दस वर्षों में पांच पुलों का निर्माण कराया. उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की नीतियों से हमेशा राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पहुंचा.
वहीं, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा अवैध कब्जा हटाने की बात को दोहराते हुए कहा कि अगले कार्यकाल में अतिक्रमण की गई पांच लाख बीघा ज़मीन मुक्त कराई जाएगी.
शर्मा ने इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी की वापसी का भरोसा जताते हुए कहा कि अगली अवधि में दो लाख सरकारी नौकरियां दी जाएंगी, जबकि पिछले पांच वर्षों में 1.56 लाख नौकरियां दी गई थीं.
मेघालय अवैध खदान धमाके की जांच के लिए एसआईटी गठन, मृतकों की संख्या 32 हुई
मेघालय पुलिस ने अवैध कोयला खदान में हुए धमाके की जांच के लिए एसआईटी बनाई, जिसमें मरने वालों की संख्या बढ़कर 32 हो गई है.
नॉर्थईस्ट नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, एक आधिकारिक आदेश में पुलिस महानिदेशक इदाशिशा नोंग्रांग ने कहा कि सरकार ने निष्पक्ष और तेज़ जांच सुनिश्चित करने के लिए एसआईटी बनाई है. उन्होंने बताया कि यह टीम धमाके की परिस्थितियों की जांच करेगी.
5 फरवरी को पूर्वी जयंतिया हिल्स ज़िले के माइनसंगट-थांग्स्को इलाके में 100 फीट गहरी एक अवैध कोयला खदान में विस्फोट हुआ, जिसमें 18 लोगों की मौत हो गई थी. खबरों के अनुसार, अब मरने वालों की संख्या 32 हो गई है. रैट होल खदान चूहों के बिल जैसी होती है, जिसमें संकरी सुरंगें खोदी जाती हैं, जिसके भीतर मजदूर जाते हैं और कोयला निकालकर लाते हैं.
घटना के बाद पुलिस ने खलीहरियात थाने में भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के साथ-साथ खनन और विस्फोटक से संबंधित कानूनों के तहत एक मामला दर्ज कर दो लोगों को गिरफ़्तार किया था.
नौ सदस्यों वाली एसआईटी का नेतृत्व उप महानिरीक्षक (पूर्वी रेंज) विवेकानंद एस. राठौर करेंगे. टीम धमाके के कारणों का पता लगाएगी और पूरे मामले की विस्तृत जांच करेगी. साथ ही, इस अवैध खनन पर अदालत के आदेशों और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के उल्लंघन की भी पहचान करेगी.
आदेश में कहा गया है कि एसआईटी समयबद्ध तरीके से जांच पूरी करेगी. इसका उद्देश्य मामले को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना और कानून के अनुसार न्याय सुनिश्चित करना है.

एनजीटी ने स्वतःसंज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और केंद्र को नोटिस जारी किया
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की मुख्य पीठ ने मंगलवार (10 फरवरी) को मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स ज़िले के थांगक्सो में कथित तौर पर अवैध रूप से चल रही रैट-होल कोयला खदान में हुए विस्फोट से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों का स्वतःसंज्ञान लिया.
एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल की पीठ ने इस घटना पर मीडिया रिपोर्टों के आधार पर संज्ञान लिया और मेघालय सरकार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के शिलांग स्थित क्षेत्रीय कार्यालय और पूर्वी जयंतिया हिल्स के उपायुक्त को नोटिस जारी किया.
जिन सरकारी प्राधिकरणों को नोटिस भेजा गया है, उन्हें 19 मई को होने वाली अगली सुनवाई से एक सप्ताह पहले हलफनामे के रूप में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है.
अधिकरण ने कहा कि यह घटना – जो कथित तौर पर मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स ज़िले में अवैध रूप से संचालित रैट-होल कोयला खदान में डायनामाइट विस्फोट के कारण हुई – एनजीटी द्वारा लंबे समय से लगाए गए प्रतिबंध (जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा है) के बावजूद पर्यावरण कानूनों के लगातार उल्लंघन को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती है.
अधिकरण ने कहा कि समाचार रिपोर्ट में उठाया गया मामला एनजीटी के आदेशों की अवहेलना और उल्लंघन की ओर इशारा करता है, जिनमें पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 और भारतीय वन अधिनियम, 1927 के उल्लंघन शामिल हैं. उसने यह भी नोट किया कि निगरानी तंत्र मौजूद होने के बावजूद प्रभावशाली लोगों के समर्थन से अवैध खनन जारी रहने के आरोप लगे हैं.
मणिपुर हिंसा से जुड़ी 11 एफआईआर की जांच कर रही सीबीआई से सुप्रीम कोर्ट ने दो हफ्ते में रिपोर्ट मांगी
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (13 फरवरी) को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को निर्देश दिया कि वह मणिपुर में जातीय हिंसा से जुड़े मामलों पर एक पखवाड़े के भीतर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करे.
सीबीआई फिलहाल हिंसा से संबंधित 11 एफआईआर की जांच कर रही है. अदालत ने यह भी कहा कि पीड़ितों के पुनर्वास और कल्याण पर जस्टिस गीता मित्तल समिति की सिफारिशों का ठीक से पालन किया जाना चाहिए.
पीठ ने कहा, ‘सीबीआई वृंदा ग्रोवर की अर्जी पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करे. साथ ही, इन परिस्थितियों में पीड़ितों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए.’
अदालत ने आगे कहा, ‘हम आदेश देंगे कि यदि पहले के तनावपूर्ण माहौल के कारण लीगल एड काउंसिल (एलएसी) उपलब्ध नहीं हो पाते हैं, तो गुवाहाटी बार से एलएसी भेजे जा सकते हैं.’
इस पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची शामिल थे. वकील वृंदा ग्रोवर एक पीड़ित की ओर से पेश हुईं.

जस्टिस गीता मित्तल समिति अब तक राहत और पुनर्वास के लिए उठाए गए कदमों पर अदालत को 42 रिपोर्टें सौंप चुकी है. इस पैनल में जस्टिस गीता मित्तल (पूर्व मुख्य न्यायाधीश, जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय), जस्टिस शालिनी पी जोशी, और जस्टिस आशा मेनन शामिल हैं.
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि मणिपुर में मौजूदा स्थिति शांतिपूर्ण है और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में सुधार हुआ है. अदालत इस मामले की अगली सुनवाई 26 फ़रवरी को करेगी.
हिंसा की शुरुआत 3 मई 2023 को ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ मणिपुर द्वारा आयोजित एक रैली के बाद हुई थी. इसके बाद राज्य भर में झड़पें फैल गईं और अर्धसैनिक बलों की तैनाती करनी पड़ी.
नगालैंड के उपमुख्यमंत्री ने दीमापुर के बाहरी इलाके में हुई हिंसा के बीच शांति की अपील की
नगालैंड के उपमुख्यमंत्री यांथुंगो पैटन ने शुक्रवार (13 फ़रवरी) को राज्य के दीमापुर के बाहरी इलाके में स्थित माओवा गांव में हिंसा की खबरों के बाद शांति की अपील की.
पुलिस अधिकारी के अनुसार, आगजनी और तोड़फोड़ की इस घटना में ‘ज़मीन पर कब्ज़े’ को लेकर कुकी और नगा समुदायों के लोग शामिल थे. अधिकारी ने कहा कि यह घटना पड़ोसी मणिपुर के उखरूल ज़िले में चल रहे कुकी-नगा तनाव से जुड़ी नहीं है.
पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए और असम राइफल्स को भी मौके पर भेजा गया. स्थिति अब नियंत्रण में है. यह ज़मीन से जुड़ा विवाद था जो हिंसक हो गया.’
पुलिस के अनुसार, एक भीड़ ने नौ घरों और तीन दुकानों में तोड़फोड़ की और कई इमारतों में आग लगा दी – जिसमें आठ दुकानें, एक सामुदायिक भवन, एक युवा कार्यालय और निर्माणाधीन परिषद अतिथि-गृह शामिल हैं. आग में 30 से अधिक रसोई गैस सिलेंडर (एलपीजी) फटने की सूचना है. कुल 21 वाहन क्षतिग्रस्त हुए, जिनमें से तीन पूरी तरह जल गए.
पैटन ने एक्स (X) पर एक पोस्ट में लिखा, ‘शांति भंग करने और जान-माल को खतरे में डालने वाला कोई भी कृत्य गंभीर चिंता का विषय है.’
लोगों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील करते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं सभी संबंधित लोगों से आग्रह करता हूं कि वे शांत रहें, संयम बरतें और किसी भी शिकायत के समाधान के लिए कानूनी और सही प्रक्रियाओं को काम करने दें.’
माओवा ग्राम परिषद ने एक बयान में कहा कि उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और निष्पक्ष व समयबद्ध जांच, हमले को संगठित और नेतृत्व करने वालों की पहचान व उनके खिलाफ कार्रवाई, क्षतिग्रस्त संपत्तियों के लिए पूरा मुआवज़ा, तथा आगे किसी भी तरह की धमकी को रोकने के लिए निरंतर सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है.
पिछले एक हफ्ते से पड़ोसी मणिपुर के उखरूल में नगा और कुकी-जो समुदायों के बीच झड़पें हुई हैं. नगा-बहुल इस ज़िले में मंगलवार (10 फ़रवरी 2026) से इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई थीं.
मणिपुर: उखरुल में नगा-कुकी-ज़ो समुदायों के बीच तनाव जारी
हिंसाग्रस्त मणिपुर के उखरुल ज़िले के लितान इलाके में बीते 7 फरवरी से तनाव और हिंसा जारी है. सारेखोंग गांव में गुरुवार (12 फरवरी) को तनाव और बढ़ गया, जब अनिश्चितकालीन कर्फ्यू के बावजूद दो और घरों में आग लगा दी गई. इसके बाद इलाके में गोलीबारी भी हुई.
इसके अलावा तंगखुल नगा महिलाओं के एक समूह ने सुरक्षा बलों पर हालात काबू नहीं कर सकने का आरोप लगाते हुए लितान पुलिस थाने पर धावा बोलने की कोशिश की. पुलिस ने आंसू गैस के कई गोले दागकर भीड़ को तितर-बितर किया.

ज्ञात हो कि हिंसा की शुरुआत शनिवार (7 फरवरी) को तब हुई, जब कथित तौर पर एक तंगखुल नगा व्यक्ति के साथ कुकी-जो समुदाय के कुछ लोगों ने मारपीट की. रविवार शाम पत्थरबाज़ी हुई, जिसमें एक पुलिसकर्मी सहित कई लोग घायल हो गए. इसके बाद रात में आगजनी की घटनाएं हुईं. हिंसा के दौरान कथित तौर पर गोलियां चलाई गईं. घटना के बाद डीएम आशीष दास ने 8 फरवरी शाम 7 बजे से इलाके में निषेधाज्ञा लागू कर दी थी.
लेकिन कर्फ्यू का उल्लंघन करते हुए अज्ञात संदिग्धों ने मंगलवार को लितान गांव में 50 घरों में आग लगा दी, जिससे दोनों समुदायों के बीच हिंसा और भड़क गई. इसके बाद प्रशासन ने ज़िले में पांच दिनों के लिए इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दीं.
असम: अदालत ने मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ ‘मानहानिकारक’ बयान देने से कांग्रेस नेताओं को रोका
गुवाहाटी की एक अदालत ने कांग्रेस नेताओं – गौरव गोगोई, भूपेश बघेल और जितेंद्र सिंह को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा के खिलाफ ‘मानहानिकारक बयान’ देने से तब तक के लिए रोक दिया है, जब तक वे व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश नहीं होते.
मुख्यमंत्री शर्मा ने इन नेताओं के खिलाफ 500 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दायर किया है.
याचिकाकर्ता के वकील की दलीलें सुनने के बाद सीनियर डिवीजन सिविल जज नंबर 1, नयनज्योति शर्मा ने बुधवार को ‘एड-इंटरिम इंजंक्शन’ (अंतरिम निषेधाज्ञा) का आदेश पारित किया. इस आदेश के तहत गोगोई, बघेल और सिंह के साथ-साथ एक प्रमुख असमिया दैनिक अख़बार को भी ‘अदालत में पेश होने तक याचिकाकर्ता से संबंधित कोई भी और मानहानिकारक बयान या सामग्री बनाने, प्रकाशित करने, प्रसारित करने या फैलाने’ से रोका गया है.
जज शर्मा ने अपने आदेश में कहा कि अदालत की राय में यदि ‘एड-इंटरिम इंजंक्शन’ का आदेश पारित नहीं किया गया, तो इससे ‘न्याय का उद्देश्य विफल हो जाएगा और कार्यवाहियों की बहुलता (एक से अधिक मुकदमों) की पूरी संभावना है.’
अदालत ने प्रतिवादियों की पेशी की तारीख 9 मार्च तय की है.
