नई दिल्ली: एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच, रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स, एशियन फेडरेशन अगेंस्ट इनवॉलंटरी डिसअपियरेंसेज़ समेत 34 नागरिक समाज संगठनों के एक गठबंधन, जिसका नेतृत्व कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स कर रहा है, ने कश्मीरी स्वतंत्र पत्रकार इरफान मेहराज और मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज की तत्काल रिहाई की मांग की है.
जहां मेहराज ने शुक्रवार (20 मार्च) को मुकदमे से पहले की हिरासत में तीन साल पूरे कर लिए, वहीं परवेज पिछले चार वर्षों से दिल्ली की जेल में बंद हैं.
19 मार्च को जारी संयुक्त बयान में समूहों ने कहा कि मेहराज को 20 मार्च 2023 को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) के तहत हिरासत में लिया था. श्रीनगर के स्वतंत्र पत्रकार और वांडे मैगज़ीन के संस्थापक संपादक मेहराज ने कश्मीर में मानवाधिकार मुद्दों पर व्यापक रूप से लिखा है और इंडियन एक्सप्रेस, अल जज़ीरा, हिमाल साउथएशियन तथा डॉयचे वेले में योगदान दिया है.
अधिकारियों का आरोप है कि मेहराज, खुर्रम परवेज के करीबी सहयोगी थे, जो जम्मू-कश्मीर कोएलिशन ऑफ सिविल सोसाइटी (जेकेसीसीएस) के समन्वयक हैं, और उन्हें गैर-सरकारी संगठनों के कथित आतंकी फंडिंग की जांच से जोड़ा गया है.
बयान में कहा गया कि जेकेसीसीएस जम्मू-कश्मीर का एक प्रसिद्ध नागरिक समाज संगठन है, और मेहराज तथा परवेज के खिलाफ आरोप ‘राजनीति से प्रेरित’ और ‘मनगढ़ंत’ हैं.
बयान में कहा गया, ‘हमारे संगठन का भारतीय अधिकारियों से आग्रह है वे यूएपीए और पीएसए जैसे दमनकारी कानूनों को रद्द करें तथा जम्मू-कश्मीर में नागरिक समाज और मीडिया स्वतंत्र रूप से काम करने के लिए अनुकूल माहौल बनाएं.’

इसमें ‘अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी आग्रह किया गया है कि वह भारत सरकार पर अपने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों का पालन करने, इरफान मेहराज, खुर्रम परवेज और अन्य सभी हिरासत में लिए गए कश्मीरी मानवाधिकार रक्षकों को रिहा करने के लिए दबाव डाले.’
द वायर ने पहले रिपोर्ट किया था कि मेहराज के परिवार के अनुसार, मेहराज को एक असाइनमेंट के दौरान एनआईए कार्यालय बुलाया गया था और वहीं हिरासत में ले लिया गया. उनके पिता मेहराज-उद-दीन भट, जो कश्मीर में कला के व्यापारी हैं, ने 2023 में गिरफ्तारी के एक दिन बाद द वायर से कहा, ‘वह एक स्टोरी पर काम कर रहे थे, जब जांचकर्ताओं ने उन्हें मोबाइल फोन पर कॉल किया. उन्होंने उनसे कहा कि वे पांच मिनट के लिए उनके कार्यालय आ जाएं. बाद में हमें पता चला कि उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है और दिल्ली ले जाया जाएगा. मेरा बेटा और भाई कानूनी सहायता के लिए वहां गए हैं.’
उस समय भी इस गिरफ़्तारी की संयुक्त राष्ट्र की विशेष रिपोर्टर मैरी लॉलर, एमनेस्टी इंटरनेशनल, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया और अभिव्यक्ति की आज़ादी के लिए काम करने वाले कई अन्य मानवाधिकार समूहों ने कड़ी आलोचना की थी. कश्मीर में पत्रकारों के ख़िलाफ़ यूएपीए के इस्तेमाल को लेकर बार-बार चिंताएं जताई गई हैं, जिनमें मेहराज़ भी शामिल हैं.
21 मार्च, 2023 की एनआईए प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मेहराज की गिरफ्तारी ऐसे मामले में की गई थी जिसमें गैर-सरकारी संगठनों और ट्रस्टों पर जम्मू-कश्मीर में ‘अलगाववादी और विभाजनकारी गतिविधियों’ के लिए धन के दुरुपयोग का आरोप था. एजेंसी ने प्रतिबंधित संगठनों से कथित संबंधों का भी जिक्र किया था.
द वायर और अन्य स्वतंत्र मीडिया की रिपोर्टिंग में कश्मीर में पत्रकारों को पुलिस द्वारा बुलाने, कई दिनों तक पूछताछ करने और यहां तक कि बिना औपचारिक मामला दर्ज किए या आरोप बताए ‘अच्छे व्यवहार’ के बांड पर हस्ताक्षर करने के लिए कहने जैसी घटनाओं का दस्तावेजीकरण किया गया है.
स्क्रॉल के अनुसार, इस वर्ष की शुरुआत में इंडियन एक्सप्रेस सहित राष्ट्रीय प्रकाशनों के कम से कम चार पत्रकारों को श्रीनगर के पुलिस थानों में बुलाया गया था. उन्हें यह समन तब भेजा गया, जब उन्होंने केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन द्वारा मस्जिदों के बारे में जानकारी इकट्ठा करने के लिए चलाए जा रहे एक विवादित अभियान पर रिपोर्टिंग की थी.
न्यूज़लॉन्ड्री की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक वर्ष में लगभग 25 कश्मीरी पत्रकारों को इसी तरह की धमकियों का सामना करना पड़ा, जिनमें से कुछ से बार-बार पूछताछ की गई और व्यक्तिगत व वित्तीय जानकारी मांगी गई.
द वायर के पत्रकार जहांगीर अली का फोन हाल ही में पुलिस ने जब्त कर लिया था, जिसे बाद में लौटा दिया गया. द वायर ने एक बयान में पुलिस कार्रवाई का विवरण देते हुए कहा था:
‘बिना कोई कारण बताए, यहां तक कि किसी एफआईआर, मामले, वारंट या अदालत के आदेश का विवरण दिए बिना, पुलिस अधिकारियों ने उनका मोबाइल फोन जब्त कर लिया. सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्रीय एजेंसियों को दिए गए निर्देशों और जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की प्रमाणिकता बनाए रखने के लिए स्वीकृत मानकों के विपरीत, उन्होंने जहांगीर अली को जब्त फोन का हैश वैल्यू प्रदान नहीं किया. हैश वैल्यू दर्ज करना यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि हिरासत के दौरान उपकरण में कोई डेटा जोड़ा या हटाया न जाए.’
19 मार्च, 2026 को जारी किए गए समूहों के बयान में कहा गया है कि जम्मू और कश्मीर में फ्रीलांसर और स्थानीय रिपोर्टर, यात्रा प्रतिबंधों और हिरासत – दोनों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हैं. प्रेस निकायों और राजनीतिक हस्तियों ने बार-बार समन और बांड के उपयोग को जबरदस्ती का साधन बताते हुए इसकी आलोचना की है.
