निशाने पर पत्रकार: सरकारी आदेश पर मॉलीटिक्स, नेशनल दस्तक समेत कई फेसबुक पेज भारत में बैन

डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म मॉलीटिक्स, नेशनल दस्तक और कॉमेडियन राजीव निगम समेत कई फेसबुक पेज अब भारत में नहीं देखे जा सकते हैं. सोशल मीडिया मंच मेटा की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि यह कार्रवाई भारत सरकार और क़ानून प्रवर्तन एजेंसियों के नोटिस के आधार पर की गई है.

(फोटो साभार: विकीमीडिया कॉमन्स)

नई दिल्ली: भारत में डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म मॉलीटिक्स, नेशनल दस्तक और कॉमेडियन राजीव निगम समेत कई फेसबुक पेजों को प्रतिबंधित कर दिया गया है. सोशल मीडिया मंच मेटा की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि यह कार्रवाई भारत सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के नोटिस के आधार पर की गई है.

मीडिया में आई खबरोंं के मुताबिक, यह प्रतिबंध आईटी एक्ट की धारा 79(3)(b) के तहत लगाया गया है, जिसमें स्थानीय कानूनों के उल्लंघन की स्थिति में सरकार के निर्देश पर कंटेंट को सीमित किया जा सकता है. इसके चलते अब भारत में इन फेसबुक पेजों पर उपलब्ध सामग्री को नहीं देखा जा सकता है.

इस कार्रवाई के बाद मॉलीटिक्स ने अपने एक्स अकाउंट पर कहा कि भारत में आईटी एक्ट के नाम पर उन अकाउंट्स को निशाना बनाया जा रहा है, जो सरकार से सवाल पूछने की हिम्मत रखते हैं. यह दौर दबाव और डर का हो सकता है, लेकिन हमारी आवाज नहीं दबेगी.

मॉलीटिक्स ने कहा, ‘सरकार नहीं चाहती कि सच्चाई जनता तक पहुंचे और शायद हम वही सच्चाई दिखा रहे थे जो अब जुर्म बन चुकी है. इसी वजह से हमारे अकाउंट को भारत में प्रतिबंधित किया गया है.’

इस संबंध में संपादक नीरज झा ने कहा कि ताक़त के शीर्ष में बैठे लोग अगर सच से असहज होने लगें तो पत्रकारिता का स्तंभ ढहने लगता है. विगत कई सालों से ऐसा हो रहा है. और अब चोट करने की स्पीड बढ़ गई है.

वहीं, नेशनल दस्तक ने भी अपने एक्स अकाउंट पर जानकारी दी है कि उनके फेसबुक पेज को सरकार के कहने पर भारत में बैन कर दिया गया है.

नेशनल दस्तक के संपादक शंभू कुमार ने इस कार्रवाई को दुभाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह संघी लोगों की शिकायत पर उठाया गया कदम है, जो नहीं चाहते कि हाशिए पर खड़े लोगों की बात जनता तक पहुंचें.

उन्होंने आगे बताया कि उनका प्लेटफॉर्म कमजोर तबके के लोगों की बात करता है और उनके मुद्दे लोगों के समक्ष रखने की कोशिश करता है, जिसे रोकने का प्रयास इस कार्रवाई के माध्यम से किया गया है.

मालूम हो कि इससे पहले सरकारी आदेश के बाद यूट्यूब चैनल 4PM न्यूज़ को बंद कर दिया गया था. बाद में चैनल ने आरोप लगाया था कि उनकी एंकर फिजा की इंस्टाग्राम रील हटवाई गई और फेसबुक पेज को भी बंद कर दिया गया.

चैनल ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा था, ‘एक-एक करके हर प्लेटफॉर्म को निशाना बनाया जा रहा है. इतना डर किस बात का है?’

ताज़ा मामले में सरकार की कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया पर कई पत्रकारों ने सवाल उठाए हैं.

वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने इसे निंदनीय बताते हुए कहा, ‘हर दिन एक नया चैनल, एक नई साइट बंद हो रही है. लगता है सरकार संभल नहीं रही है, इसलिए यह सब हो रहा है.’

रणविजय सिंह ने लिखा, ‘आज कई लोगों का फेसबुक पेज भारत में बंद कर दिया गया. मॉलीटिक्स, नेशनल दस्तक, राजीव निगम और भी कई FB पेज सरकार का शिकार हुए. ये सभी वो पेज हैं, जिससे सरकार से सवाल किए जाते थे. जमीन के असल हालात दिखाए जाते थे. सरकार लगातार ऐसे पेज और हैंडल बैन कर रही है, जो सवाल करते हैं. कुछ दिन पहले ट्विटर पर भी कई हैंडल बैन हुए थे.’

उल्लेखनीय है कि हाल ही में बीफ कारोबार में नितिन गडकरी और उनके परिवार से संबंधित कंपनियों के शामिल होने की खबर संबंधी द कारवां की रिपोर्ट पर वीडियो बनाने वाले इन्फ्लुएंसर मुकेश मोहन को भी 50 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा गया है. साथ ही नागपुर में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.

बता दें कि हाल ही में एक्स के भी कई अकाउंट भारत में रोक दिए गए, जिन अकाउंट्स पर सरकार द्वारा कार्रवाई की गई उनमें पैरोडी, व्यंग्य और पत्रकारों के हैंडल शामिल हैं. ये अकाउंट्स सरकार की नीतियों, अल्पसंख्यक मुद्दों, विदेश नीति, एलपीजी संकट और प्रधानमंत्री पर व्यंग्य करते थे. मीम्स, कार्टून और अपनी आलोचनात्मक पोस्ट के चलते ये काफी लोकप्रिय थे.

कारवां मैगजीन के एडिटर हरतोष सिंह बल ने भी बताया कि उनका 14 मार्च का एक ट्वीट जो पीएम मोदी से संबंधित था, को हटाने का आदेश दिया गया था.

गौरतलब है कि पिछले साल मई में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव के दौरान रफाल विमानों को कथित रूप से गिराए जाने से जुड़ी एक सीएनएन रिपोर्ट प्रकाशित करने के बाद द वायर की वेबसाइट को 12 से 15 घंटे से अधिक समय तक ब्लॉक कर दिया गया था.

बीते महीने द वायर का इंस्टाग्राम अकाउंट मोदी सरकार पर व्यंग्यात्मक कार्टून को लेकर भारत में 9 फरवरी की शाम क़रीब दो घंटे तक ब्लॉक रहा. इस संबंध में मंत्रालय ने ज़िम्मेदारी लेने से इनकार किया, जबकि मेटा द्वारा ‘ग़लती’ की बात सामने आई. बिना पूर्व सूचना की गई इस कार्रवाई ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल सेंसरशिप पर सवाल खड़े किए.

ज्ञात हो कि पिछले साल भारत सरकार के दो मंत्रालयों ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के शुरू होने के बाद कई समाचार आउटलेट्स और पत्रकारों सहित लगभग 8,000 सोशल मीडिया हैंडल्स को ब्लॉक करने से जुड़ी जानकारी साझा करने के आरटीआई (सूचना का अधिकार) अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था.

इस दौरान ब्लॉक किए गए एक्स हैंडल्स में कश्मीर टाइम्स की प्रबंध संपादक अनुराधा भसीन, मकतूब (एक मीडिया आउटलेट), फ्री प्रेस कश्मीर, द कश्मीरियत और इंडियन एक्सप्रेस के उप संपादक मुज़म्मिल जलील के अकाउंट शामिल थे.

इस संबंध में जब सोशल मीडिया मंच एक्स ने खुलासा किया कि यह कदम केंद्र के आदेश पर उठाया गया है, तो उसके अपने ग्लोबल अफेयर्स हैंडल को भी कुछ समय के लिए ब्लॉक कर दिया गया.