नई दिल्ली: सोशल मीडिया मंच एक्स ने गुरुवार (21 मई) को व्यंग्यात्मक राजनीतिक संगठन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के अकाउंट को भारत में ब्लॉक कर दिया है. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया, जब इंस्टाग्राम पर सीजेपी के फॉलोअर्स की संख्या 13 मिलियन (1.3 करोड़) तक पहुंच गई और उसने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 8.7 मिलियन फॉलोअर्स को पीछे छोड़ दिया.
इस खबर को लिखे जाने के समय तक इंस्टाग्राम पर भाजपा के 8.8 मिलियन फॉलोअर्स हैं, जबकि सीजेपी के 13.4 मिलियन फॉलोअर्स हैं.
इस संबंध में पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक्स पर बताया कि 16 मई को शुरू किया गया पार्टी का अकाउंट, 2 लाख (200k) से ज़्यादा फॉलोअर्स होने के बाद एक्स पर ब्लॉक कर दिया गया है. बाद में उन्होंने घोषणा की कि संगठन ने एक और अकाउंट @Cockroachisback शुरू किया है.
अमेरिका के बोस्टन में रहने वाले 30 वर्षीय दीपके ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ‘जैसा कि उम्मीद थी, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का अकाउंट भारत में ब्लॉक कर दिया गया है.’
एक और पोस्ट में उन्होंने आगे लिखा, ‘अपने ही पाले में गोल.’ तीसरी पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘कॉकरोच जनता पार्टी का अकाउंट 16 मई को शुरू किया गया था. 4 दिनों के अंदर ही यह अकाउंट बैन हो गया, क्योंकि इसके 2 लाख से ज़्यादा फॉलोअर्स हो गए थे.’
Now attempts being made to hack Instagram pic.twitter.com/doFskK9D7Z
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दिलचस्प बात यह है कि भाजपा, जिसने अक्टूबर 2010 में एक्स पर अपना अकाउंट शुरू किया था, उसके 23 मिलियन फॉलोअर्स हैं; वहीं कांग्रेस, जिसका इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फरवरी 2013 से अकाउंट है, उसके 11.5 मिलियन फॉलोअर्स हैं.
दीपके ने यह भी दावा किया कि पार्टी के इंस्टाग्राम अकाउंट को भी हैक करने की कोशिशें की जा रही हैं.
मालूम हो कि इस सोशल मीडिया कैंपेन की शुरुआत 15 मई के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत द्वारा बेरोजगार युवाओं को ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ बताए जाने के बाद की गई थी.
बीते शुक्रवार सीजेआई सूर्यकांत ने वरिष्ठ वकील का दर्जा दिए जाने की मांग संबंधी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि समाज में कुछ परजीवी हैं, जो व्यवस्था पर हमला करते हैं. उन्हें रोज़गार नहीं मिलता और पेशेवर ज़िंदगी में कोई जगह नहीं मिलती. उनमें से कुछ मीडिया बन जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया पर सक्रिय हो जाते हैं, कुछ आरटीआई कार्यकर्ता बन जाते हैं और फिर हर किसी पर हमला शुरू कर देते हैं.
उन्होंने अकुछ बेरोजगार युवाओं पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि वे ‘कॉकरोच’ जैसे हैं, जो आगे चलकर मीडिया, सोशल मीडिया और आरटीआई कार्यकर्ता बन जाते हैं और फिर व्यवस्था पर सवाल उठाने लगते हैं.
सीजेआई की इस टिप्पणी पर अखिल भारतीय अधिवक्ता संघ ने कड़ा विरोध व्यक्त करते हुए एक बयान जारी कर कहा था कि भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा कोर्ट रूम में कथित रूप से कही गई यह बात अत्यंत आपत्तिजनक, अस्वीकार्य और बेहद निंदनीय है.
संघ ने आगे कहा था कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसा बयान हमारी न्यायपालिका के प्रमुख की ओर से आया है. यह अत्यंत अलोकतांत्रिक है और उन युवा कार्यकर्ताओं का अपमान है जो लोकतंत्र के विकास में अपना योगदान देते हैं.
सीजेआई की इस टिप्पणी पर कई वकीलों समेत राजनीतिक दलों ने भी आपत्ति जताई थी.
हालांकि, अपनी टिप्पणी के चलते चौतरफा आलोचना झेल रहे सीजेआई ने एक दिन बाद शनिवार (16 मई) को ही इस पर सफाई जारी करते हुए कहा था कि मीडिया के एक वर्ग ने उनकी बातों को गलत तरीके से पेश किया. उन्होंने आगे कहा था कि भारत का हर युवा उन्हें प्रेरित करता है.
सीजेआई ने स्पष्ट किया था कि उनकी टिप्पणी उन लोगों के बारे में थी, जो फर्जी और जाली डिग्री के सहारे वकालत जैसे पेशों में प्रवेश कर रहे हैं.
उन्होंने कहा था, ‘ऐसे लोग मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य प्रतिष्ठित पेशों में भी घुसपैठ कर चुके हैं, और इस मायने में वे परजीवी जैसे हैं.’
सीजेआई सूर्यकांत ने साफ कहा था कि यह कहना पूरी तरह गलत और निराधार है कि उन्होंने देश के युवाओं की आलोचना की.
