ओडिशा: रायगढ़ा के आदिवासियों के ख़िलाफ़ पुलिस की कथित ज़्यादती को लेकर विरोध प्रदर्शन

बीते 7 अप्रैल को ओडिशा के सिजीमाली बॉक्साइट खदान के लिए सड़क निर्माण को लेकर पुलिस और स्थानीय आदिवासियों के बीच हुए तनाव के बाद हिंसा में सैकड़ों ग्रामीण और पुलिसकर्मी घायल हुए थे. बुधवार को समाज के विभिन्न वर्गों के लोग, जिनमें पूर्व मंत्री, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे, भुवनेश्वर में आदिवासियों पर कथित पुलिस हिंसा के विरोध में प्रदर्शन किया.

ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में रायगढ़ा ज़िले के आदिवासियों पर कथित पुलिस अत्याचार के विरोध में प्रदर्शन. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में मास्टर कैंटीन चौक पर समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों – जिनमें एक पूर्व मंत्री, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे, ने रायगढ़ा जिले के आदिवासियों पर कथित पुलिस अत्याचार के विरोध में प्रदर्शन किया.

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बॉक्साइट से समृद्ध सिजीमाली पहाड़ियों का पट्टा (लीज) वेदांता समूह को दिए जाने को रद्द करने और प्रस्तावित खनन स्थल की ओर जाने वाली सड़क के निर्माण को तत्काल रोकने की मांग की.

उन्होंने आदिवासियों के खिलाफ सभी ‘झूठे मामलों’ को वापस लेने की भी मांग की. उनका कहना था कि स्थानीय समुदाय जिन पहाड़ियों की पूजा करता है, उन्हें खनन के लिए नहीं सौंपा जाना चाहिए.

दोपहर में भारी बारिश के बावजूद लोग तख्तियां लिए हुए और ‘कॉरपोरेट राज’, ‘पुलिस की ज्यादतियों’ और अंधाधुंध खनन के खिलाफ नारे लगाते हुए इकट्ठा हुए.

पूर्व मंत्री और बीजू जनता दल के विधायक रणेंद्र प्रताप स्वाइन ने कहा कि ऐसी रिपोर्टों के बीच मुख्यमंत्री का उद्योग जगत के नेताओं का स्वागत करना एक गलत संदेश देता है. उन्होंने कंटामाल गांव में सुबह-सुबह पुलिस के प्रवेश और उसके उद्देश्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘कॉरपोरेट राज स्वीकार नहीं किया जा सकता.’

स्वाइन ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ उनके प्रबंधन के लिए स्पष्ट योजना बनाने की मांग की, ताकि उन्हें भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित रखा जा सके. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आदिवासियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए.

बता दें कि मंगलवार की सुबह सिजीमाली बॉक्साइट खदानों की ओर जाने वाली सड़क को लेकर आदिवासियों और पुलिस के बीच विवाद हुआ था जिसमें कई लोग घायल हो गए. दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए, ग्रामीणों ने पुलिस पर गोलीबारी, आंसू गैस के इस्तेमाल और लाठीचार्ज करने का आरोप लगाया, जिसे पुलिस ने सिरे से नकार दिया.

अख़बार के अनुसार, ग्रामीणों ने बताया कि पुलिस तड़के सुबह ही वहां पहुंच गई थी और उसने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की कोशिश की. वकील और कार्यकर्ता विश्वप्रिय कानूनगो ने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा झूठे सबूत गढ़ने की कोशिशें की जा रही हैं; उन्होंने जेल में बंद आदिवासियों को रिहा करने और निषेधाज्ञा को हटाने की मांग की.

ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस के महासचिव महेंद्र परिदा ने कहा कि जब एक आदिवासी मुख्यमंत्री ने शपथ ली थी, तो हमें बहुत उम्मीदें थीं कि वह तुरंत पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम (पेसा) के प्रावधानों को लागू करेंगे. लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी माझी सरकार ने अभी तक पेसा कानून को लागू नहीं किया है. आखिर वह ऐसा क्यों नहीं कर रहे हैं?’

पेसा कानून ग्राम सभाओं को भूमि, जल और जंगल जैसे स्थानीय संसाधनों के प्रबंधन का अधिकार देता है.

पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (ओडिशा इकाई) की संयोजक प्रमोदिनी प्रधान ने महिलाओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, ‘महिलाओं से जुड़े मामलों को संभालते समय पुलिस को सावधानी बरतनी चाहिए. इससे पहले पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें एक गर्भवती महिला भी शामिल थी.’

बुधवार को कंटामाल में स्थिति शांत रही, हालांकि ग्रामीणों ने दोबारा छापेमारी की आशंका जताई.

ओडिशा आदिवासी अधिकार मंच के सहायक महासचिव, चामुरु सोरेन ने चेतावनी दी कि खनन इस इलाके को रेगिस्तान में बदल सकता है, और जल, ज़मीन और जंगल पर आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा पर ज़ोर दिया.

प्रस्तावित सिजीमाली खदान, जो रायगढ़ा और कालाहांडी ज़िलों में फैला है और जहां लगभग 311 मिलियन टन बॉक्साइट भंडार होने का अनुमान है, उसे वेदांता लिमिटेड को 50 सालों के लिए लीज़ पर दिया गया है.

लंबे समय से ‘मां माटी माली सुरक्षा मंच’ के तहत संगठित स्थानीय आदिवासी और दलित समुदाय इसका विरोध कर रहे हैं. उनका तर्क है कि यह परियोजना उनकी आजीविका, जल स्रोतों और सिजीमाली पहाड़ियों की पवित्रता के लिए खतरा है – जो उनके आराध्य देव ‘तिज राजा’ का निवास स्थान है.

इलाके में तनाव जारी, सुरक्षा बल हटाने की मांग

सिजीमाली बॉक्साइट खदान तक पहुंचने वाली सड़क के निर्माण को लेकर आदिवासी ग्रामीणों और पुलिस के बीच विवाद के बाद रायगढ़ा जिले में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है. हालांकि, भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच एक तरह की अस्थिर शांति बनी हुई है.

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए सिजीमाली क्षेत्र में पुलिस की छह प्लाटून तैनात की गई हैं. इसके बावजूद प्रशासन और ग्रामीणों के बीच बना गतिरोध टूटता नहीं दिख रहा है. सागबाड़ी और कंटामाल के आदिवासी, जो अपने पारंपरिक हथियारों से लैस हैं, पास के जंगल में पहरा दे रहे हैं और वे सड़क परियोजना का विरोध जारी रखने की बात कह रहे हैं.

अखबार के अनुसार, मंगलवार के घटनाक्रम में 100 से अधिक ग्रामीण भी घायल हुए हैं, लेकिन किसी को सरकारी अस्पताल में भर्ती नहीं कराया गया है. मीडियाकर्मियों को भी गांवों के अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है.

इस बीच, कई आदिवासी नेताओं ने पुलिस कार्रवाई को गैर-जरूरी बताते हुए तुरंत सुरक्षा बल हटाने की मांग की. आदिवासी नेता जयराम पांगी ने कहा कि जब ओडिशा के कई आदिवासी देश में ऊंचे पदों पर हैं, तो सिजीमाली के ग्रामीणों को उम्मीद थी कि उनके विकास को प्राथमिकता दी जाएगी.

उन्होंने कहा, ‘लेकिन जिस तरह सरकार ने आधी रात में कथित रूप से एक निजी कंपनी के हित में आदिवासियों पर दमन किया, वह अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक है. मैं सरकार से अपील करता हूं कि वह आदिवासियों के हितों को प्राथमिकता दे.’

पांगी ने चेतावनी दी कि अगर इस मुद्दे का समाधान नहीं किया गया, तो जनता का असंतोष एक जन आंदोलन का रूप ले सकता है. उन्होंने कहा कि यदि सरकार शांतिपूर्ण माहौल में ग्रामीणों से संवाद करे, तो यह मुद्दा जल्दी सुलझ सकता है क्योंकि यह उनके जीवन, आजीविका और परंपराओं से जुड़ा है.

आदिवासी नेताओं – तिरुपति गमांग और शंकर इंकलाब ने कहा कि यह घटना अनुसूचित क्षेत्र में संवैधानिक और मानवाधिकारों का उल्लंघन है. उन्होंने बताया कि ऐसे क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं के लिए ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य होती है, जिसे इस सड़क निर्माण परियोजना में नजरअंदाज किया गया.

उन्होंने आगे यह भी दावा किया कि राज्य सरकार और ज़िला प्रशासन, स्थानीय लोगों की सहमति के बिना सिजीमाली और अन्य क्षेत्रों को खनन कंपनियों को सौंपने के लिए ‘सुनियोजित कदम’ उठा रहे हैं.