नई दिल्ली: राज्यसभा सांसद पी. विल्सन ने शनिवार (18 अप्रैल) को कहा कि राज्यसभा अध्यक्ष ने परिसीमन या नई जनगणना से जोड़े बिना महिलाओं के लिए आरक्षण को तत्काल लागू करने की मांग वाले उनके निजी सदस्य बिल पर विचार करने से इनकार कर दिया है.
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले विल्सन ने प्रक्रिया नियमों के नियम 267 के तहत एक नोटिस पेश किया था, जिसमें उन्होंने अपने प्रस्ताव पर चर्चा के लिए सूचीबद्ध कार्य को स्थगित करने का आग्रह किया था.
हालांकि, द्रमुक नेता ने बताया कि अध्यक्ष ने नोटिस स्वीकार नहीं किया, जिससे सदन में विधेयक पर चर्चा नहीं हो सकी.
इस प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य लोकसभा में मौजूदा 543 सीटों के भीतर महिलाओं के लिए आरक्षण को अगले आम चुनाव से लागू करना है, बिना सीटों की संख्या बढ़ाए या निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण किए.
इसी तरह के प्रावधान राज्य विधानसभाओं के साथ-साथ दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर की विधानसभाओं के लिए भी प्रस्तावित किए गए हैं.
विल्सन का तर्क है कि संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 के तहत मौजूदा ढांचा आरक्षण के कार्यान्वयन को भविष्य की जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया पर निर्भर बनाता है, जिससे अनिश्चितकालीन देरी हो रही है.
इस प्रस्ताव में यह भी कहा गया था कि इस आरक्षण को स्थायी बनाया जाए, ‘जिससे यह सीमित अवधि तक ही सीमित न रहे और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में स्थायी और ठोस लैंगिक समानता सुनिश्चित करने के लिए संवैधानिक ढांचे का अभिन्न अंग बन जाए.’
इस विधेयक में प्रस्ताव दिया गया था, ‘यदि सरकार वास्तव में महिला आरक्षण को लागू करने के बारे में गंभीर है, जिसे संसद ने संविधान (एक सौ छठा संशोधन) अधिनियम, 2023 के माध्यम से पहले ही पारित कर दिया है, तो इसे परिसीमन या जनगणना से जोड़ने की कोई आवश्यकता नहीं है. सदन का कार्यकाल समाप्त होने के बाद इसे सदन की वर्तमान संख्या में सीधे लागू किया जा सकता है.’
इस प्रकार निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्वितरण या समायोजन की कोई आवश्यकता नहीं होगी और इससे यह सुनिश्चित होगा कि परिसीमन संबंधी अनिश्चितताओं के कारण महिला आरक्षण के कार्यान्वयन में देरी न हो.
परिसीमन पर 2051 तक रोक
इस विधेयक में परिसीमन पर रोक को 2051 तक बढ़ाने का भी प्रस्ताव था, जिससे राज्य इस दौरान अपनी प्रजनन दर को कम कर सकें – जो अभी तक स्थिर नहीं हुई है और परिसीमन के सही ढंग से काम करने के लिए इसका होना आवश्यक है.
विधेयक में लोकसभा सीटों के पुनर्आवंटन के लिए राज्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता का भी प्रस्ताव है.
विधेयक के उद्देश्यों और कारणों के विवरण के अनुसार, ‘यह सुनिश्चित करता है कि संविधान की संघीय संरचना संरक्षित रहे और किसी भी राज्य की प्रतिनिधित्व शक्ति में जबरन परिवर्तन न हो.’
द्रमुक ने यह निजी विधेयक एनडीए सरकार द्वारा संसद में सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने के संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित करने में विफल रहने के एक दिन बाद प्रस्तावित किया.
इस संबंध में विल्सन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने निजी सदस्य विधेयक पेश किया था और राज्यसभा के अध्यक्ष को नियम 267 के तहत विधेयक पर प्रस्ताव पारित करने की अनुमति देने के लिए नोटिस दिया था.
Today I introduced a private Member’s Bill that would have delinked implementation of Women’s Reservation in Lok Sabha & Assemblies from census and delimitation & brought into force immediately.
I had given a notice under Rule 267 requesting the Hon. Chairman, RS to permit… pic.twitter.com/PR7as2YeRz
— P. Wilson -தமிழ்நாட்டை தலைகுனிய விட மாட்டேன் (@PWilsonDMK) April 18, 2026
विल्सन ने पोस्ट में आगे कहा, ‘हालांकि उन्होंने अनुमति देने से इनकार कर दिया. सरकार ने इस विधेयक का समर्थन नहीं किया. जो काम इतनी आसानी से हो सकता था, उसे जटिल बना दिया गया क्योंकि भाजपा का महिला आरक्षण लागू करने का कोई इरादा नहीं है. इससे यह बात निर्विवाद रूप से साबित होती है कि भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए केवल नारीशक्ति के नाम पर राजनीति करना चाहता है और परिसीमन को चुपके से लागू करना चाहता है.’
उन्होंने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा, ‘मैं भाजपा को चुनौती देता हूं कि वे शोर मचाए बिना मेरे विधेयक को अपनाएं या मेरे जैसा ही कोई बिल लाएं, जिसमें परिसीमन या जनगणना या किसी भी तरह की ‘अगर-मगर’ वाली शर्त के बिना महिला आरक्षण लागू किया जाए. अगर वे ऐसा नहीं कर पाते हैं, तो यह इस बात का और सबूत होगा कि भाजपा भारतीय जुमला पार्टी है.’
मालूम हो कि तमिलनाडु की राजनीतिक पार्टी द्रमुक परिसीमन विधेयक को लेकर मुखर रही है. 16 अप्रैल को द्रमुक अध्यक्ष और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन के तहत नमक्कल में परिसीमन से जुड़े विधेयक की एक प्रति जलाई थी.
17 अप्रैल को लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक खारिज़ होने के बाद, तमिलनाडु के प्राकृतिक संसाधन मंत्री और द्रमुक नेता एस. रघुपाथी ने इसे राज्य की ‘पहली जीत’ बतायाऔर भाजपा पर प्रस्तावित कानून के माध्यम से तमिलनाडु के अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया.
हालांकि, दो समाचार रिपोर्टों के अनुसार, संसद के दोनों सदनों को शुक्रवार, 17 अप्रैल को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था और द्रमुक सांसद के विधेयक पर चर्चा नहीं हो सकी.
