नई दिल्ली: नीट-अंडर ग्रेजुएट (यूजी) परीक्षा के पेपर लीक विवाद के बाद शिक्षा पर बनी संसदीय स्थायी समिति ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) से परीक्षा के सवाल तैयार करने, उनका अनुवाद करने, उन्हें छापने और परीक्षा पत्रों को लाने-ले जाने की प्रक्रियाओं के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है.
द टेलीग्राफ की ख़बर के मुताबिक, समिति यह भी जानना चाहती है कि क्या एनटीए उन विशेषज्ञों, जो प्रश्न पत्र तैयार करने के काम से जुड़े होते हैं, को कोचिंग सेंटर्स जैसी व्यावसायिक संस्थाओं से जुड़ने की अनुमति देता है.
अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा नीट-यूजी 2026 के पेपर सेट करने वालों को कथित पेपर लीक के मामले में गिरफ़्तार किए जाने के बाद समिति ने एजेंसी को विस्तार से जवाब देने के लिए लगभग 20 सवाल भेजे हैं.
मालूम हो कि 28 सदस्यों का यह पैनल, जिसमें भारतीय जनता पार्टी के 17 सदस्य शामिल हैं, आगामी सोमवार को एनटीए द्वारा आयोजित परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं पर चर्चा करने के लिए बैठक करेगा. सूत्रों ने बताया कि पैनल ने इस बैठक के लिए एनटीए के अधिकारियों को बुलाया है.
अख़बार की जानकारी के अनुसार, पैनल यह जानना चाहता है कि नीट के पेपर तैयार करने के लिए विशेषज्ञ किस ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ (एसओपी) का पालन करते हैं.
इसमें यह भी शामिल है कि सवालों को कंप्यूटर में कैसे डाला जाता है, अलग-अलग भारतीय भाषाओं में उनका अनुवाद कैसे होता है, उन्हें कैसे प्रिंट किया जाता है, कैसे एक जगह से दूसरी जगह भेजा जाता है, परीक्षा के दौरान निगरानी कैसे की जाती है, और छात्रों को ग्रेड कैसे दिए जाते हैं.
सूत्रों ने बताया कि पैनल ने एनटीए से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या उसके पास ऐसे लोगों के लिए कोई नियम हैं, जो परीक्षा से जुड़े काम में लगे होने के साथ-साथ किसी तरह की व्यावसायिक गतिविधियों में भी शामिल होते हैं.
ज्ञात हो कि नीट पेपर लीक के कथित मामले में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए गए कुछ पेपर सेट करने वाले लोग कोचिंग सेंटर चलाते हुए पाए गए थे.
सूत्रों का कहना है कि पैनल ने एनटीए से संगठन में मंज़ूर पदों, स्थाई कर्मचारियों और आउटसोर्सिंग स्टाफ़ की संख्या के बारे में भी जानकारी देने को कहा है.
पैनल ने एजेंसी से यह बताने को भी कहा है कि के. राधाकृष्णन समिति की कितनी सिफ़ारिशों को लागू किया गया है.
उल्लेखनीय है कि इस समिति का गठन 2024 के नीट पेपर लीक के बाद किया गया था. समिति ने 101 सिफ़ारिशें दी थीं, जिनमें जेईई-मेन की तरह नीट को भी अलग-अलग चरणों में आयोजित करना शामिल था. इनमें से कई सिफ़ारिशों को अभी तक लागू नहीं किया गया है.
इस बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार (27 मई) को नीट की दोबारा आयोजित होने वाली परीक्षा की तैयारियों की समीक्षा की है.
गौरतलब है कि एनटीए द्वारा तीन मई को आयोजित की गई नीट 2026 की परीक्षा पेपर लीक के दावों के बाद रद्द कर दी गई थी, जिसके बाद अब यह परीक्षा दोबारा 21 जून को होगी.
नीट-यूजी भारत की एकमात्र एकीकृत मेडिकल प्रवेश परीक्षा है, जो देशभर में स्नातक मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश तय करती है. साल 2024 में भी यह परीक्षा पेपर लीक और ग्रेस मार्क्स देने में अनियमितताओं के आरोपों में घिरी रही थी, जिसके बाद हज़ारों अभ्यर्थियों को असामान्य रूप से अधिक नंबर मिलने पर देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे.
एनटीए से पहले केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) मेडिकल के लिए नीट और इंजीनियरिंग के लिए जेईई जैसी परीक्षाएं आयोजित करता था, जबकि राज्य बोर्ड और विश्वविद्यालय अपनी अलग प्रवेश परीक्षाएं कराते थे.
एनटीए की स्थापना नवंबर 2017 में भारत की उच्च शिक्षा प्रवेश परीक्षा व्यवस्था में सख्ती, मानकीकरण और विश्वसनीयता लाने और छात्रों को कई परीक्षाओं के बोझ से राहत देने के उद्देश्य से की गई थी. यह एजेंसी 15 से अधिक परीक्षाएं आयोजित कराती है. लेकिन एनटीए लगातार समस्याओं से घिरी रही है और उस पर पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही की कमी के आरोप लगे हैं.
