सीयूईटी-यूजी: तकनीकी गड़बड़ी के बाद अब तीन हज़ार से अधिक विद्यार्थी दोबारा देंगे परीक्षा

सीयूईटी-यूजी 2026 की पहली पाली शनिवार को कई केंद्रों पर तकनीकी गड़बड़ी के कारण देर से शुरू हुई. एनटीए के अनुसार 3,765 अभ्यर्थी बायोमेट्रिक सत्यापन के बावजूद परीक्षा दिए बिना लौट गए. एजेंसी ने उनके लिए दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा की है. घटना ने एनटीए की परीक्षा व्यवस्था पर नए सवाल खड़े किए हैं.

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी-यूजी) 2026 के दौरान एक बार फिर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की परीक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है. शनिवार (30 मई, 2026) को परीक्षा की पहली पाली कई केंद्रों पर तकनीकी गड़बड़ी के कारण समय पर शुरू नहीं हो सकी, जिससे हजारों अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों को घंटों तक अनिश्चितता का सामना करना पड़ा. स्थिति ऐसी बनी कि बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा कर चुके 3,765 अभ्यर्थी परीक्षा दिए बिना ही केंद्रों से लौट गए.

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा शुरू होने में आई देरी की वजह एक तकनीकी समस्या थी, जिसने सुबह की पाली को प्रभावित किया. एनटीए ने बाद में स्वीकार किया कि कुछ केंद्रों पर तकनीकी गड़बड़ी के कारण परीक्षा निर्धारित समय पर शुरू नहीं हो सकी. एजेंसी ने कहा कि अधिकांश केंद्रों पर समस्या दूर होने के बाद परीक्षा आयोजित कर ली गई, लेकिन बड़ी संख्या में छात्र परीक्षा शुरू होने का इंतजार किए बिना वापस चले गए.

एनटीए ने कहा है कि ऐसे 3,765 अभ्यर्थियों के लिए विशेष तौर पर दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी. एजेंसी के मुताबिक, यह एक बार की व्यवस्था होगी और इसकी तारीख व अन्य विवरण बाद में घोषित किए जाएंगे.

तकनीकी सेवा प्रदाता टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने भी घटना पर प्रतिक्रिया दी है. कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के. कृतिवासन ने कहा कि सुबह की पाली में एक छोटी तकनीकी समस्या आई थी, जिसके कारण परीक्षा शुरू होने में लगभग दो घंटे की देरी हुई. उन्होंने दावा किया कि तकनीकी टीमों ने समस्या की पहचान कर उसे शीघ्र दूर कर दिया और इससे परीक्षा की निष्पक्षता या गोपनीयता पर कोई असर नहीं पड़ा.

हालांकि, सोशल मीडिया पर छात्रों और अभिभावकों ने अलग तस्वीर पेश की. कई लोगों का कहना था कि परीक्षा शुरू होने में दो नहीं बल्कि तीन से चार घंटे तक की देरी हुई. कुछ वीडियो भी सामने आए, जिनमें अभ्यर्थी परीक्षा प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते दिखाई दिए.

एनटीए ने एक्स पर जारी बयान में कहा कि समस्या का समाधान कर लिया गया था और प्रभावित छात्रों को पूरा अतिरिक्त समय दिया गया ताकि किसी को नुकसान न हो. एजेंसी ने दोपहर की पाली के समय में भी बदलाव किया और नए समय के अनुसार प्रवेश प्रक्रिया तथा परीक्षा शुरू होने का समय निर्धारित किया.

सीयूईटी की शुरुआत 2022 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत की गई थी. इसका उद्देश्य देशभर के केंद्रीय, राज्य, डीम्ड और निजी विश्वविद्यालयों में स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए एक समान मंच उपलब्ध कराना था. एनटीए का दावा है कि यह परीक्षा विशेष रूप से दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को समान अवसर उपलब्ध कराती है.

लेकिन परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं. पिछले कुछ वर्षों में एनटीए कई विवादों के केंद्र में रहा है. 2024 में नीट-यूजी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बाद मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी गई थी. जांच एजेंसी अब तक इस मामले में दर्जनों लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है.

इस वर्ष भी नीट-यूजी 2026 परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित करने का फैसला लिया गया. 3 मई को हुई परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र लीक होने की शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद शिक्षा मंत्रालय के संदर्भ पर सीबीआई जांच शुरू हुई. अब तक इस मामले में 13 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है.

सीयूईटी की यह ताजा तकनीकी गड़बड़ी ऐसे समय सामने आई है जब केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 12वीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) मूल्यांकन प्रणाली को लेकर भी विवाद चल रहा है. इन घटनाओं ने परीक्षा संचालन और मूल्यांकन प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं.

लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों के बीच छात्रों और अभिभावकों का एक बड़ा वर्ग यह सवाल पूछ रहा है कि देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं की जिम्मेदारी संभालने वाली एजेंसियां आखिर कब ऐसी व्यवस्था विकसित कर पाएंगी, जहां तकनीकी खामियां, प्रश्नपत्र लीक और प्रशासनिक अव्यवस्था अपवाद हों, नियम नहीं.