ओडिशा: पोलियो पीड़ित व्यक्ति की हिरासत में मौत के बाद पूरे थाने का स्टाफ हटाया गया

ओडिशा के गंजाम ज़िले में बीते 1 जून को पुलिस हिरासत में कथित यातना दिए जाने के बाद एक 32 वर्षीय दिहाड़ी मज़दूर की मौत हो गई थी. अब कबिसूर्यनगर के आईपीएस प्रोबेशनर प्रभारी निरीक्षक समेत समूचे स्टाफ को हटाया गया है. वहीं, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में ज़िला प्रशासन से एक्शन टेकन रिपोर्ट तलब की है.

(इलस्ट्रेशन: परिप्लब चक्रवर्ती/द वायर)

नई दिल्ली: ओडिशा में एक 32 वर्षीय पोलियो पीड़ित दिहाड़ी मजदूर की कथित पुलिस हिरासत में यातना के बाद मौत हो जाने पर पूरे पुलिस थाने के खिलाफ कार्रवाई की गई है. थाने के आईपीएस प्रोबेशनर प्रभारी निरीक्षक समेत समूचे स्टाफ को हटाया गया.

बता दें कि सुशांत साहू की मौत 1 जून को बरहामपुर स्थित एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में उपचार के दौरान हुई थी. पिछले एक महीने में राज्य में पुलिस की कथित बर्बरता का यह तीसरा मामला बताया जा रहा है.

ओडिशा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) वाईबी खुरानिया ने मामले की जांच के लिए मानवाधिकार संरक्षण प्रकोष्ठ को निर्देश दिया है.

साहू के परिवार का आरोप है कि उन्हें लगभग एक सप्ताह तक गैरकानूनी रूप से हिरासत में रखा गया और इस दौरान गंभीर शारीरिक यातनाएं दी गईं. साहू की पत्नी मामाजिन ने आरोप लगाया, ‘उनकी बेरहमी से पिटाई की गई. उनके शरीर पर गर्म पानी डाला गया और उन पर मिर्च लगाई गई.’

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिणी रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) नीति शेखर ने आईपीएस प्रोबेशनर नितेश कुमार मिश्रा से कबिसूर्यनगर पुलिस थाना के प्रभारी निरीक्षक (आईआईसी) का स्वतंत्र प्रभार वापस ले लिया और उन्हें जिला मुख्यालय स्थानांतरित कर दिया.

आईजीपी ने उप-निरीक्षक (एसआई) समीर कुमार राउत, सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई) बैकुंठ जेना और कांस्टेबल सुमन कुमार साहू को निलंबित कर दिया. प्रारंभिक जांच के बाद एक होमगार्ड ड्राइवर को भी सेवा से अलग करने का आदेश दिया गया.

निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए नीति शेखर ने गंजाम के पुलिस अधीक्षक (एसपी) हरीश बीसी को निर्देश दिया कि कबिसूर्यनगर थाने और उससे संबद्ध बालीचाई चौकी में तैनात सभी कर्मियों का तबादला कर दिया जाए.

हरीश ने कहा कि जांच दल सभी आरोपों की पड़ताल कर रहा है, जिनमें यह आरोप भी शामिल है कि साहू को कानूनी रूप से निर्धारित 24 घंटे की अवधि से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया था.

उन्होंने कहा, ‘हम पुलिस थाने के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच कर रहे हैं.’

पुलिस के अनुसार, बचपन में पोलियो के कारण एक पैर से विकलांग हुए सुशांत साहू एक पत्थर खदान में मजदूरी करते थे. पुलिस उन्हें 20 मई को एक अवैध खदान के निरीक्षण के दौरान पुलिस दल पर हुए कथित हमले के मामले में तलाश रही थी. उन्हें 25 मई को उनके घर से हिरासत में लिया गया था.

एनएचआरसी ने कथित हिरासत में यातना मामले में एटीआर रिपोर्ट मांगी

इस बीच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मंगलवार (2 जून) को इस मामले में जिला प्रशासन से एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) मांगा है.

टाइम्स आफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने गंजाम के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक (एसपी) को पत्र प्राप्त होने के तीन सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है.

एनएचआरसी ने अपनी रिपोर्ट में घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी मांगी है, जिनमें गिरफ्तारी या हिरासत का समय, स्थान और कारण, मृतक के खिलाफ दर्ज एफआईआर, गिरफ्तारी और निरीक्षण संबंधी दस्तावेज, जब्ती पंचनामा, मृतक का चिकित्सीय प्रमाणपत्र आदि शामिल हैं.

आयोग ने इसके अलावा मृतक का मेडिको-लीगल प्रमाणपत्र, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पोस्टमार्टम की वीडियो रिकॉर्डिंग, घटनास्थल का नक्शा, विसरा की रासायनिक और ऊतक-परीक्षण (हिस्टोपैथोलॉजी) रिपोर्ट (यदि लागू हो), मृत्यु का अंतिम कारण तथा मजिस्ट्रेटी जांच रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने को कहा है.

एनएचआरसी ने जिला प्रशासन से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि हिरासत में हुई इस मौत की सूचना आयोग को 24 घंटे के भीतर क्यों नहीं दी गई. आयोग ने घटना से संबंधित सभी विवरण और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं.

आयोग ने यह संज्ञान खुर्दा के मानवाधिकार कार्यकर्ता मनोज जेना द्वारा दायर याचिका के आधार पर लिया है.