नई दिल्ली: भारत ने मंगलवार (2 जून) को यूरोपीय संघ और पाकिस्तान द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के ज़िक्र को खारिज कर दिया. भारत ने कहा कि यह मामला भारत का आंतरिक मामला है और जिन लोगों का इस पर ‘कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है’, उन्हें इस पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए.
भारत की यह प्रतिक्रिया सोमवार को इस्लामाबाद में यूरोपीय संघ-पाकिस्तान रणनीतिक वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर का ज़िक्र किए जाने के बाद आई.
संयुक्त बयान में कहा गया था कि ‘पाकिस्तान पक्ष ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर जानकारी दी’ और ‘यूरोपीय संघ ने यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध पर जानकारी साझा की.’ इसमें यह भी कहा गया कि ‘दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के अनुरूप संवाद और कूटनीति के माध्यम से संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया.’
मंगलवार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान इस ज़िक्र के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने इन टिप्पणियों को ‘स्पष्ट रूप से’ खारिज कर दिया है.
उन्होंने कहा, ‘हम भारत के आंतरिक मामलों पर संयुक्त प्रेस बयान में ऐसे अनावश्यक ज़िक्र को स्पष्ट रूप से खारिज करते हैं. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं. जिन लोगों का ऐसे मामलों पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है, उन्हें इन पर कोई भी टिप्पणी करने से बचना चाहिए.’
यह संयुक्त बयान काजा कल्लास और इशाक डार की सह-अध्यक्षता में आयोजित आठवें यूरोपीय संघ–पाकिस्तान रणनीतिक संवाद के बाद जारी की गई थी.
दस्तावेज़ के अनुसार, दोनों पक्षों ने 2019 के यूरोपीय संघ–पाकिस्तान रणनीतिक सहभागिता योजना के तहत द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और व्यापार, निवेश, आतंकवाद-रोधी सहयोग, प्रवासन, अफगानिस्तान तथा क्षेत्रीय मुद्दों पर सहयोग पर चर्चा की.
इस बीच, सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट में कल्लास ने पाकिस्तान को एक ‘प्रमुख क्षेत्रीय शक्ति’ बताया और ‘अमेरिका-ईरान वार्ता को सुगम बनाने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका. के लिए उसकी सराहना की.
नई दिल्ली और ब्रुसेल्स के बीच बढ़ते संबंधों उल्लेखनीय प्रगति के बावजूद इस संयुक्त दस्तावेज़ में कश्मीर का ज़िक्र किया गया है.
इस वर्ष की शुरुआत में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली आए थे. वे भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि भी थे. यह पहली बार था जब यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं ने उस हैसियत से इस समारोह में भाग लिया.
शिखर सम्मेलन में दोनों पक्षों ने संबंधों के विस्तार को एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया. भारत और यूरोपीय संघ ने लगभग दो दशकों से चल रही वार्ताओं के बाद मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर बातचीत को अंतिम रूप दिया और अपनी पहली ‘सुरक्षा और रक्षा साझेदारी’ पर हस्ताक्षर किए, जिसमें समुद्री सुरक्षा, साइबर खतरे, आतंकवाद-रोधी सहयोग और रक्षा औद्योगिक साझेदारी को शामिल है.
इससे पहले हाल ही में भारत ने चीन-पाकिस्तान के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के जिक्र पर आपत्ति जताते हुए खारिज कर दिया था. भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के ‘अभिन्न और अटूट हिस्से’ थे, हैं और रहेंगे. यह भारत का स्थायी और सर्वविदित रुख है और किसी अन्य देश को इस विषय पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है.
