शिक्षा मंत्रालय की ‘अक्षमता और भ्रष्टाचार’ के बावजूद पीएम धर्मेंद्र प्रधान को क्यों बचा रहे हैं: कांग्रेस

सीबीएसई ओएसएम की गड़बड़ी को लेकर कांग्रेस ने सवाल किया है कि शिक्षा मंत्रालय की ‘अक्षमता और भ्रष्टाचार’ के सबूत सामने आने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को क्यों बचा रहे हैं और किसके संरक्षण के चलते यह सब हो रहा है? पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई के स्तर पर जवाबदेही का स्पष्ट अभाव है.

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान. (फोटो साभार: पीआईबी)

नई दिल्ली: देश के प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने बुधवार (3 जून, 2026) को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (ओएसएम) प्रणाली से जुड़े विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा हमला बोलते हुआ सवाल उठाया कि आखिर किसके संरक्षण के चलते प्रधान अब तक मंत्री पद पर बने हुए हैं.

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि धर्मेंद्र प्रधान के मंत्रालय में ‘अक्षमता और भ्रष्टाचार’ के सबूत सामने आने के बावजूद वे ‘बेशर्मी से अपने पद पर जमे हुए हैं.’

इस संबंध में कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने कहा कि सीबीएसई के शीर्ष नेतृत्व का तबादला शिक्षा मंत्रालय के उच्चतम स्तरों पर जवाबदेही के मुद्दे को हल करने में विफल रहा है. शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई के स्तर पर जवाबदेही का स्पष्ट अभाव है.

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट लिखा, ‘सीबीएसई के शीर्ष अधिकारियों को भले ही स्थानांतरित कर दिया गया हो, लेकिन मंत्री प्रधान पद पर बने रहने के लिए बेशर्मी से एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, जबकि उनके मंत्रालय की अक्षमता और भ्रष्टाचार के सबूत सामने आ चुके हैं.’

उन्होंने आगे कहा कि खबरों से पता चला है कि दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली शिक्षा संबंधी संसदीय समिति के समक्ष सीबीएसई के अधिकारी अपनी ओएसएम सेवा के अनुबंध के संबंध में उठाए गए सवालों का जवाब नहीं दे सके. यह स्थिति तब सामने आई जब समिति ने 18 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत की बात सुनी, जिसने सबसे पहले सोशल मीडिया के ज़रिए टेंडर में हुई कथित भ्रष्टाचार की ओर ध्यान दिलाया था.

उन्होंने एक अंग्रेजी अखबार की खबर का उल्लेख करते हुए कहा, ‘सीबीएसई न केवल ओएसएम प्रणाली को आगे के लिए टालने की सलाह पर ध्यान देने में विफल रही, बल्कि प्रतिभागियों द्वारा उठाए गए कई विशिष्ट मुद्दों को हल करने में भी विफल रही.’

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री प्रधान एक भ्रष्ट, अक्षम और संवेदनहीन शिक्षा मंत्रालय का नेतृत्व कर रहे थे, अब एक सर्वेक्षण से भी पता चलता है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के मतदाता मंत्री प्रधान का इस्तीफा मांग रहे हैं.

उन्होंने सीबीएसई के ओएसएम ड्राई रन पर हुई एक मीडिया जांच का भी ज़िक्र करते हुए कहा कि कई प्रतिभागियों ने इस सिस्टम को लेकर अपनी चिंताएं ज़ाहिर की थीं, और बोर्ड से आग्रह किया था कि जब तक इसमें मौजूद तकनीकी खामियां दूर न हो जाएं और मूल्यांकनकर्ताओं को ठीक से प्रशिक्षित न कर लिया जाए, तब तक इसे लागू करने की प्रक्रिया को टाल दिया जाए.

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सीबीएसई ने इसकी खामियों को नज़रअंदाज़ कर इसे लागू कर दिया, जिसके चलते बच्चों को तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ा. उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया.

उन्होंने आगे कहा कि बोर्ड री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) के अनुरोधों के लिए तय समयसीमा को पूरा करने में बार-बार नाकाम रहा है.

जयराम रमेश ने कहा, ‘हम पहले से ही जानते हैं कि सीबीएसई छात्रों के पेपरों के री-इवैल्यूएशन के लिए अपनी खुद की समयसीमा को पूरा करने में लगातार नाकाम रहा है. पहले उसने 29 मई की तारीख को आगे बढ़ाया, और फिर 1 जून की अपनी खुद की समयसीमा को भी पूरा नहीं कर पाया. जब आखिरकार 2 जून को पोर्टल खुला, तो कई छात्रों को उसे एक्सेस करने और उस पर पेमेंट करने में दिक्कतें आईं.’

उन्होंने सवाल किया कि प्रधानमंत्री मोदी उन्हें बचाने पर क्यों अड़े हुए हैं तथा किसके संरक्षण ने अब तक उनका पद पर बने रहना सुनिश्चित किया है?

गौरतलब इससे पहले मंगलवार को कैबिनेट सचिवालय ने ओएसएम विवाद को लेकर एक सदस्यीय जांच समिति के गठन की घोषणा की थी. इस समिति की अध्यक्षता ‘क्षमता निर्माण आयोग’ (Capacity Building Commission) की अध्यक्ष एस. राधा चौहान कर रही हैं और इसका काम सीबीएसई द्वारा ओएसएम प्रणाली के लिए सेवाओं की खरीद से जुड़े मामलों की जांच करना है.

मालूम हो कि सरकार लगातार परीक्षाओं में खांमियों को लेकर निशाने पर है. छात्र-अभिभावक और विपक्ष के नेता लगातार इस पर सवाल उठा रहे हैं. हाल ही में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सीबीएसई द्वारा ऑन-स्क्रीन मार्किंग कॉन्ट्रैक्ट देश की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी ‘टीसीएस’ को छोड़कर ‘कोएम्प्ट एडुटेक’ को दिए जाने को लेकर सवाल उठाए थे.

उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीबीएसई की गड़बड़ी पर चुप्पी दिखाती है कि उन्हें केवल अपनी सरकार बचाने की चिंता है, लाखों छात्रों के भविष्य की नहीं.