मंगलुरु: टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टिस) ने अपने 86वें वार्षिक दीक्षांत समारोह से महज़ दो दिन पहले ‘अप्रत्याशित परिस्थितियों’ का हवाला देते हुए कार्यक्रम अचानक स्थगित कर दिया है.
यह दीक्षांत समारोह 2 अगस्त को होना था. इसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत मुख्य अतिथि और बॉम्बे हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रवींद्र घुगे विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होने वाले थे.
इस संबंध में संस्थान के रजिस्ट्रार ने गुरुवार देर रात करीब 12:50 बजे ईमेल भेजकर समारोह स्थगित किए जाने की जानकारी दी.
ईमेल में रजिस्ट्रार ने लिखा, ‘हमें आपको यह बताते हुए खेद है कि कुछ अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण टिस का 86वां दीक्षांत समारोह, जो 2 अगस्त 2026 को आयोजित होना था, स्थगित कर दिया गया है. हम समझते हैं कि यह अवसर स्नातक होने वाले छात्रों, उनके परिवारों, फैकल्टी और स्टाफ के लिए कितना महत्वपूर्ण है. इस स्थिति में आपकी समझदारी और धैर्य के लिए हम आभारी हैं. नई तारीख और आगे की जानकारी जल्द साझा की जाएगी. इससे हुई किसी भी असुविधा के लिए हमें खेद है और आपके निरंतर सहयोग के लिए धन्यवाद.’
हालांकि, संस्थान ने सार्वजनिक रूप से जस्टिस सूर्यकांत का नाम मुख्य अतिथि के तौर पर घोषित नहीं किया था, लेकिन छात्रों के बीच इसकी जानकारी पहले से थी.
कई छात्रों का कहना है कि अंतिम समय में समारोह स्थगित करने का फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि प्रबंधन को आशंका थी कि दीक्षांत समारोह के दौरान विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं.
गौरतलब है कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) का नाम और प्रेरणा सीजेआई सूर्यकांत की 15 मई की उस टिप्पणी से मिली थी, जिसमें उन्होंने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था, ‘समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी मौजूद हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं. क्या आप भी उनके साथ जुड़ना चाहते हैं? कुछ युवा ऐसे हैं, जो रोज़गार नहीं मिलने और पेशे में जगह न बना पाने के कारण कॉकरोच की तरह हर जगह फैल जाते हैं.’
हालांकि, बाद में सीजेआई ने स्पष्ट किया था कि उनके बयान को संदर्भ से हटाकर पेश किया गया, लेकिन तब तक विवाद गहरा चुका था. मई में शुरू हुए इस आंदोलन के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए और अंततः केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा.
इससे पहले द वायर ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि 28 जुलाई को आयोजित होने वाला जस्टिस एचआर खन्ना मेमोरियल लेक्चर भी स्थगित कर दिया गया था, जिसमें सीजेआई मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने वाले थे.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीजेआई को ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर उसमें शामिल होने से इनकार कर दिया था.
द वायर से बात करने वाले कई छात्रों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से पुलिसकर्मी कैंपस का दौरा कर रहे थे. उनका कहना था कि पुलिस को आशंका थी कि छात्र सीजेआई के खिलाफ प्रदर्शन कर सकते हैं.
कुछ छात्रों ने बताया कि इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उनके परिजन दूर-दराज़ से आए थे. उन्होंने दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए नॉन-रिफंडेबल टिकट बुक कराए थे और अन्य व्यवस्थाएं भी की थीं.
कैंपस के छात्रों के अनौपचारिक समूह ‘प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स फोरम’ ने समारोह के टाले जाने के संबंध में अंतिम समय में सूचना देने और इससे छात्रों पर पड़े व्यापक असर की आलोचना की है.
समूह ने जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए कहा है कि या तो मूल कार्यक्रम के अनुसार दीक्षांत समारोह आयोजित किया जाए या फिर छात्रों को उनके डिग्री प्रमाणपत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज़ तत्काल जारी किए जाएं.
