नई दिल्ली: संचार और सूचना प्रौद्योगिकी पर बनी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने सोमवार (3 अगस्त) को कहा कि मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मार्क जुकरबर्ग को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो फेसबुक से कुछ समय के लिए हटाए जाने पर माफ़ी मांगनी चाहिए.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो कंपनी सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) की धारा 79 के तहत मध्यस्थों (इंटरमीडियरीज़) को मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा खो सकती है.
उल्लेखनीय है कि निशिकांत दुबे ने यह बात उस बैठक के बाद कही, जिसमें मेटा, गूगल, यूट्यूब, एक्स और स्नैपचैट के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और गृह मंत्रालय के प्रतिनिधि भी शामिल थे.
यह बैठक मेटा द्वारा प्रधानमंत्री मोदी की वीडियो फेसबुक पर कुछ समय के लिए हटाए जाने के बाद बुलाई गई थी. इस घटना पर केंद्र सरकार ने कंपनी से स्पष्टीकरण भी मांगा था.
‘जुकरबर्ग को माफ़ी मांगनी चाहिए’
सांसद दुबे ने पत्रकारों से कहा, ‘मेटा की सोच देश को अस्थिर करने की है. प्रधानमंत्री मोदी का वीडियो रात 12:30 बजे से सुबह 5 बजे तक हटाया गया था. यह बेहद गंभीर मामला है. हमारी समिति ने दो बातें कही हैं- मार्क जुकरबर्ग को माफ़ी मांगनी होगी, अन्यथा हम धारा 79 के तहत मेटा को मिली ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा वापस लेने की सिफारिश करेंगे.’
मालूम हो कि 23 जुलाई को अपलोड की गई पीएम मोदी की इस वीडियो में नीट-यूजी पेपर लीक को लेकर देशभर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों का ज़िक्र किया गया था. इसमें कई उपायों की घोषणा की गई थी, जिनमें फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करने और परीक्षा का पेपर लीक करने वालों के लिए कड़ी सज़ा का प्रावधान करने वाला प्रस्तावित कानून भी शामिल था.
दरअसल, आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत इंटरमीडियरीज़ को उनके प्लेटफॉर्म पर मौजूद थर्ड-पार्टी कंटेंट के लिए कानूनी ज़िम्मेदारी से छूट मिलती है, बशर्ते वे आवश्यक सावधानी बरतें और सरकार के वैध कानूनी निर्देशों का पालन करें.
मेटा ने बताया ‘एल्गोरिदम की गलती’
बैठक में मौजूद सांसदों के अनुसार, मेटा ने इस घटना को एल्गोरिदम में आई तकनीकी गड़बड़ी बताया और इसके लिए माफ़ी मांगी.
इस संबंध में एक सांसद ने अख़बार को बताया, ‘मेटा के एक अधिकारी ने फेसबुक से प्रधानमंत्री मोदी का वीडियो हटने पर खेद जताया. उन्होंने कहा कि एल्गोरिदम में तकनीकी समस्या आ गई थी. उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी और कंपनी अपने एल्गोरिदम में आवश्यक सुधार करेगी.’
विपक्ष ने ‘सेफ हार्बर’ खत्म करने का विरोध किया
रिपोर्ट के अनुसार, बैठक में मौजूद विपक्षी सांसदों ने मेटा की ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा समाप्त करने की किसी भी कोशिश का विरोध किया.
उन्होंने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट (सीएसएएम), डीपफेक और साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए कड़े नियमों का समर्थन किया, लेकिन कहा कि सरकार की आलोचना को देश विरोधी कंटेंट नहीं माना जाना चाहिए.
एक विपक्षी सांसद ने कहा, ‘हम टेक्नोलॉजी को रेगुलेट करने की बात कर रहे हैं, लोकतंत्र को नहीं. यह रेगुलेशन है, सेंसरशिप नहीं.’
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार छात्र प्रदर्शनों को देश-विरोधी बताने की कोशिश कर रही है और इसके लिए सोशल मीडिया एल्गोरिदम को ज़िम्मेदार ठहरा रही है.
निशिकांत दुबे के अनुसार, समिति की समीक्षा केवल प्रधानमंत्री का वीडियो हटाए जाने तक सीमित नहीं थी. इसमें साइबर फ्रॉड, गलत सूचना, डीपफेक, एआई से तैयार कंटेंट, प्लेटफॉर्म की पारदर्शिता और भारतीय कानूनों के अनुपालन जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई.
समिति ने मेटा से प्रधानमंत्री की वीडियो हटाए जाने और दोबारा बहाल किए जाने की पूरी ऑडिट ट्रेल मांगी है. साथ ही, कंपनी से यह भी पूछा गया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उसने कौन-से सुरक्षा उपाय किए हैं.
गौरतलब है कि इससे पहले 28 जून को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक फेसबुक वीडियो को कुछ समय के लिए हटाए जाने से संबंधित मामले में मेटा ने केंद्र सरकार से माफ़ी मांगी थी. कंपनी का कहना था कि यह वीडियो किसी नीति उल्लंघन की वजह से नहीं, बल्कि एक तकनीकी गड़बड़ी के कारण गलती से हट गया था.
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया था कि जैसे ही गड़बड़ी का पता चला, वीडियो को दोबारा प्लेटफॉर्म पर बहाल कर दिया गया.
हालांकि, केंद्र सरकार मेटा के इस स्पष्टीकरण संतुष्ट नहीं थी. और इसे अनुचित बताते हुए सरकार की ओर से कहा गया था कि इस पर गहन चर्चा की ज़रूरत है. साथ ही यह भी कहा गया था कि यह मामला अभी सुलझा नहीं है.
