यौन उत्पीड़न मामले में बृजभूषण के बरी होने पर आक्रोश, महिला संगठनों ने निर्णय को चिंताजनक बताया

भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को यौन उत्पीड़न के आरोपों से बरी करने पर विपक्ष ने महिलाओं के मुद्दे पर भाजपा पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि यह फैसला न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भाजपा अपने नेताओं को राजनीतिक संरक्षण देती है और उन्हें सज़ा से बचाती रही है.

महिला पहलवानों द्वारा दायर यौन उत्पीड़न के मामले में कोर्ट से बरी होने के बाद समर्थक बृजभूषण शरण सिंह को फूलों की माला पहनाकर बधाई देते हुए. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत द्वारा भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को छह महिला पहलवानों द्वारा दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न के मामले में बरी किए जाने के बाद सोमवार को विपक्षी दलों ने भाजपा पर तीखा हमला बोला.

वहीं, उनके सिंह के बेटे और भाजपा सांसद करण भूषण सिंह ने इस फैसले को ‘सच्चाई की जीत’ बताया.

ज्ञात हो कि सोमवार को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने सबूतों के अभाव और गवाहों के बयानों में असंगति और विरोधाभास का हवाला देते हुए बृजभूषण शरण सिंह और सह-आरोपी विनोद तोमर को बरी कर दिया.

यह मामला 2023 में छह महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा था, जिसके विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक धरना-प्रदर्शन चला था.

फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने महिलाओं के मुद्दे पर भाजपा पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, ‘एक तरफ वे कहते हैं कि वे युवाओं के साथ हैं, महिलाओं के सशक्तिकरण और महिला आरक्षण की बात करते हैं, और दूसरी तरफ यह सब हो रहा है.’

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा कि यह फैसला भाजपा का ‘असली चेहरा’ दिखाता है. उन्होंने कहा, ‘यह हमारा दुर्भाग्य है कि देश में एक बहरी, गूंगी और अंधी सरकार सत्ता में बैठी है. भाजपा का असली चेहरा आज सबके सामने है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘भारत के एक नागरिक के रूप में मैं इस फैसले से बेहद आहत हूं और अपनी सभी बहनों और खिलाड़ियों के साथ मजबूती से खड़ा हूं. न्याय मिलने के बजाय आरोपी के गले में बरी होने का तमगा डाल दिया गया है. यह देश आपको कभी माफ नहीं करेगा.’

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि जब महिला पहलवान प्रदर्शन कर रही थीं, तब भाजपा की कोई भी महिला नेता उनके समर्थन में आगे नहीं आई. उन्होंने सिंह के इस दावे को भी खारिज कर दिया कि यह मामला किसी साजिश का हिस्सा था.

भाकपा (माले) लिबरेशन ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर भाजपा की ‘बयानबाजी बार-बार खोखली साबित हुई है.’

पार्टी ने कहा कि यह फैसला ‘न केवल स्पष्ट रूप से अन्यायपूर्ण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भाजपा अपने नेताओं को राजनीतिक संरक्षण देती है और उन्हें सजा से बचाती रही है. उसके नेताओं को बार-बार निर्बाध संरक्षण मिलता रहा है.’

हालांकि, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘मैं अदालत के फैसलों पर टिप्पणी नहीं करना चाहता. महत्वपूर्ण बात यह है कि न्याय की प्रक्रिया को अपना काम करने दिया जाए. आरोप लगाए जाते हैं और उनके नतीजे सामने आते हैं, लेकिन न्याय को अपना रास्ता तय करने देना चाहिए.’

उन्होंने कहा, ‘अगर अपील की जाती है, तो हमें देखना होगा कि आगे क्या होता है. अगर अपील नहीं होती है, तो निश्चित रूप से उन्हें सम्मानपूर्वक बरी किया गया व्यक्ति माना जाना चाहिए. मुझे नहीं लगता कि हमें अभी किसी चल रहे कानूनी मामले पर कोई फैसला सुनाना चाहिए.’

बता दें कि इस फैसले के बाद विश्व चैंपियनशिप पदक विजेता विनेश फोगाट ने कहा था कि महिला पहलवान इस फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देंगी.

उन्होंने कहा, ‘शुरू से ही पूरा प्रशासन, सरकार और पूरा तंत्र बृजभूषण को बचाने में लगा रहा. हमें बेहद दुख है कि अदालत ने महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन हिंसा के आरोपों में बृजभूषण शरण सिंह को दोषी नहीं पाया.’

उन्होंने कहा, ‘महिला पहलवानों ने अपने वकीलों को इस फैसले के खिलाफ अपील दायर करने का निर्देश दिया है और जल्द से जल्द अपील दाखिल की जाएगी. हमने उम्मीद नहीं छोड़ी है और पहलवान अपनी लड़ाई जारी रखेंगी.’

मालूम हो कि दिल्ली पुलिस ने छह महिला पहलवानों की शिकायतों के आधार पर 15 जून 2023 को बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी.

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, एक बयान में वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह, इतिहासकार उमा चक्रवर्ती, सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय और शबनम हाशमी और पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) की अध्यक्ष कविता श्रीवास्तव ने दिल्ली की अदालत के फैसले के बाद कहा, ‘भारत के महिला संगठनों और महिला आंदोलन के सदस्यों के रूप में हम कुश्ती के क्षेत्र को यौन उत्पीड़न से मुक्त बनाने की लड़ाई में पहलवानों का समर्थन जारी रखेंगे. साथ ही, हम यह भी चाहते हैं कि इसका प्रभाव अन्य खेलों में भी दिखाई दे.’

उन्होंने आगे कहा, ‘हम मांग करते हैं कि खेलों के क्षेत्र में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए. जो खिलाड़ी यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराते हैं, उन्हें दंडित करने या चुप कराने के बजाय उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए. हम यह भी मांग करते हैं कि सभी खिलाड़ियों के लिए ऐसा सुरक्षित खेल वातावरण बनाया जाए, जो राजनीतिक हस्तक्षेप तथा धनबल और बाहुबल के भद्दे इस्तेमाल से पूरी तरह मुक्त हो.’

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (माकपा) से जुड़े महिला संगठनों ने भी इस बयान का समर्थन किया.

वहीं, छह महिला पहलवानों में से चार की ओर से बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में पैरवी कर रहीं वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका एम. जॉन ने बृजभूषण शरण सिंह के बरी होने के फैसले को ‘बेहद, बेहद चिंताजनक’ बताया.

बृजभूषण शरण सिंह ने कहा- सोची-समझी साज़िश थी

उधर, फैसले का स्वागत करते हुए भाजपा सांसद करण भूषण सिंह ने विवाद के दौरान उनके परिवार के साथ खड़े रहने वालों का आभार जताया.

उन्होंने कहा, ‘यह सच्चाई की जीत है. यह युवा पहलवानों की भी जीत है. मैं उन सभी लोगों का धन्यवाद करना चाहता हूं जिन्होंने हमारा साथ दिया और हम पर भरोसा बनाए रखा. आज हम पूरे देश के सामने मजबूती से खड़े हैं.’

छह बार सांसद रह चुके बृजभूषण शरण सिंह को विवाद के बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने टिकट नहीं दिया था. उनकी जगह पार्टी ने उत्तर प्रदेश की कैसरगंज लोकसभा सीट से उनके बेटे करण भूषण सिंह को उम्मीदवार बनाया था.

अदालत परिसर के बाहर पत्रकारों से बातचीत में बृजभूषण शरण सिंह ने फैसले का स्वागत किया.

उन्होंने कहा, ‘पहले ही दिन मैंने कहा था कि अगर मेरे खिलाफ लगाया गया कोई भी आरोप साबित हो गया तो मैं फांसी लगा लूंगा. अब अदालत ने मुझे सम्मानपूर्वक बरी कर दिया है. मैं खुश हूं और अपने वकीलों का आभारी हूं. फिलहाल मैं इतना ही कहूंगा. अदालत के विस्तृत आदेश का अध्ययन करने के बाद आगे टिप्पणी करूंगा.’