संसदीय समिति की चेतावनी के बाद मेटा ने पीएम मोदी का वीडियो हटाने पर माफ़ी मांगी

सूचना प्रौद्योगिकी पर बनी संसदीय समिति द्वारा तीन दिन के भीतर माफ़ी मांगने का अल्टीमेटम दिए जाने के बाद मेटा के वैश्विक मामलों के प्रमुख जोएल कपलान ने कहा है कि उन्होंने कंपनी की ओर से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से माफ़ी मांगी है. यह भी दावा किया जा रहा है कि मार्क ज़ुकरबर्ग ने भारत में परिचालन संबंधी गलतियों के लिए माफ़ी मांगी है, लेकिन मेटा ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है.

परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शनरत युवाओं को 23 जुलाई 2026 को अपने पहले वीडियो संदेश से संबोधित करते प्रधानमंत्री मोदी. (फोटो साभार: X/@narendramodi)

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो कुछ घंटों के लिए हटाए जाने के मामले में संचार और सूचना प्रौद्योगिकी पर बनी संसदीय स्थायी समिति द्वारा तीन दिन के भीतर माफ़ी मांगने का अल्टीमेटम दिए जाने के बाद मेटा के वैश्विक मामलों के प्रमुख (चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर) जोएल कपलान ने कहा है कि उन्होंने कंपनी की ओर से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से माफ़ी मांगी है.

कई ख़बरों में सरकारी सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया गया है कि मेटा के सीईओ मार्क ज़ुकरबर्ग ने भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट (सीएसएएम) वाले विज्ञापनों पर इंस्टाग्राम की ओर से पर्याप्त कार्रवाई न करने, ‘डीपफेक’ कंटेंट और प्लेटफॉर्म संचालन में हुई अन्य गलतियों के लिए भी मोदी सरकार से माफ़ी मांगी है.

इससे पहले बुधवार (5 अगस्त) को द हिंदू ने खबर दी थी कि संसदीय पैनल ने मेटा से कहा है कि यदि ज़ुकरबर्ग माफ़ी नहीं मांगते हैं, तो कंपनी को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मिली ‘सेफ़ हार्बर’ (कानूनी संरक्षण) की सुविधा वापस ली जा सकती है.

अख़बार ने लोकसभा सचिवालय के एक पत्र का उल्लेख करते हुए कहा था कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली ‘ संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति’ ने इंस्टाग्राम की ‘सेफ़ हार्बर’ सुरक्षा वापस लेने की मांग की है. यह मांग 23 जुलाई को फेसबुक द्वारा प्रधानमंत्री मोदी का एक वीडियो हटाए जाने के बाद की गई.

बुधवार शाम जारी एक बयान में कपलान ने कहा कि उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से ‘प्रधानमंत्री मोदी की पोस्ट को गलती से ब्लॉक किए जाने के लिए मेटा की ओर से’ माफ़ी मांगी है.

मालूम हो कि यहां जिस वीडियो का जिक्र किया जा रहा है, वह जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में युवाओं के विरोध-प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन का था, जिसे फेसबुक से कुछ घंटों के हटा दिया गया था. कंपनी का कहना था कि यह वीडियो किसी नीति उल्लंघन की वजह से नहीं, बल्कि एक तकनीकी गड़बड़ी के कारण गलती से हट गया था.

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया था कि जैसे ही गड़बड़ी का पता चला, वीडियो को दोबारा प्लेटफॉर्म पर बहाल कर दिया गया. कंपनी ने इसके लिए माफ़ी भी मांगी थी.

इस वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा था, ‘मैं जानता हूं कि पेपर लीक कोई मामूली बात नहीं है. यह लाखों छात्रों और उनके माता-पिता के लिए बेहद दुखद है. पिछले ढाई महीनों में पेपर लीक रोकने के लिए कई कदम उठाए गए हैं. दोषियों को पकड़ लिया गया है और वे अब जेल में हैं.’

उल्लेखनीय है कि अब तक प्रधानमंत्री मोदी इस फॉर्मेट में पांच रील पोस्ट कर चुके हैं. इस कदम को लेकर युवाओं ने कड़ी नाराज़गी जताई है. उनका कहना है कि यह सरकार की ओर से नाराज़ युवाओं को अपने पक्ष में करने और उन्हें लुभाने की एक स्पष्ट कोशिश है.

ख़बरों के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इस मामले में जोएल कपलान को दो बार तलब किया था. संसदीय समिति का पत्र आईटी सचिव एस. कृष्णन को संबोधित था, जिसकी प्रति गृह सचिव गोविंद मोहन को भी भेजी गई थी.

पत्र में कहा गया था, ‘समिति ने इस मुद्दे पर मेटा प्रमुख मार्क ज़ुकरबर्ग से माफ़ी की मांग की है. यदि वह पत्र प्राप्त होने के तीन दिनों के भीतर बिना शर्त माफ़ी नहीं मांगते हैं, तो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3) के तहत उपलब्ध कानूनी संरक्षण वापस लिया जा सकता है और एक प्रकाशक के रूप में उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.’

ज्ञात हो कि आईटी अधिनियम की धारा 79(3) उन परिस्थितियों का उल्लेख करती है, जिनमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य डिजिटल इंटरमीडियरी यूज़र द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए मिलने वाली कानूनी छूट या ‘सेफ़ हार्बर’ सुरक्षा खो सकते हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, लोकसभा सचिवालय की निदेशक ए. ज्योतिर्मयी के हस्ताक्षर वाले पत्र में कहा गया, ‘परीक्षा विवादों और पेपर लीक के खिलाफ़ सख़्त कार्रवाई के संबंध में छात्रों और जेन-ज़ी को संबोधित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो को फेसबुक से 5-6 घंटे तक हटाए जाने को समिति ने अत्यंत गंभीरता से लिया है.’

इसके अलावा समिति ने कथित साइबर धोखाधड़ी के मामलों में गूगल इंडिया के खिलाफ़ भी कार्रवाई की मांग की है. यह मांग एक ऐसे मामले पर चर्चा के बाद की गई, जिसमें निवेशकों ने कथित फर्जी ऐप्स के माध्यम से 48 लाख रुपये से अधिक की ठगी का आरोप लगाया था.

पत्र में कहा गया है, ‘शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि फर्जी निवेश ऐप्स के माध्यम से उन्हें 48 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ. इसके बाद हैदराबाद साइबर पुलिस ने साइबर ठगों के साथ-साथ गूगल इंडिया के प्रमुख को भी सह-आरोपी बनाया. समिति ने इस मामले पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार से गूगल इंडिया के खिलाफ़ भी उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया.’

समिति ने इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण संबंधी सामग्री (सीएसएएम) वाले विज्ञापनों पर बीबीसी की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया और ऐसे मध्यस्थों (इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म) के खिलाफ़ कार्रवाई की मांग की, जो सीएसएएम और महिलाओं के अपमानजनक कंटेंट के प्रसार की अनुमति देते हैं.

हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स में सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि ज़ुकरबर्ग ने इन परिचालन संबंधी गलतियों के लिए माफ़ी मांगी है, लेकिन मेटा की ओर से अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.