नई दिल्ली: नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू) ने 12 सितंबर, 2026 को आयोजित होने वाला अपना 34वां वार्षिक दीक्षांत समारोह ‘अपरिहार्य परिस्थितियों’ का हवाला देते हुए रद्द कर दिया है.
मालूम हो कि इस समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की मौजूदगी को लेकर संस्थान के छात्रों और पूर्व छात्रों ने आपत्ति जताई थी.
अब एनएलएसआईयू के छात्रों ने एक ‘स्पष्टीकरणात्मक टाइमलाइन’ जारी कर उन घटनाक्रमों की जानकारी दी है, जो दीक्षांत समारोह रद्द होने से पहले पर्दे के पीछे चल रहे थे.
उल्लेखनीय है कि 3 अगस्त को छात्रों को औपचारिक रूप से दीक्षांत समारोह के लिए आमंत्रित किया गया था, जबकि 11 सितंबर अनिवार्य रिहर्सल की तारीख तय की गई थी.
छात्रों के अनुसार, अगस्त की शुरुआत से लेकर 27 अगस्त तक कई ऐसे घटनाक्रम हुए, जिनके बाद विश्वविद्यालय ने छात्रों को सूचित किया कि सभी स्नातक छात्रों को ‘शासी निकायों से आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद उनकी गैर मौजूदगी में’ डिग्रियां प्रदान की जाएंगी.
ज्ञात हो कि यह घटनाक्रम ऐसे समय शुरू हुआ, जब अगस्त की शुरुआत में हैदराबाद स्थित नालसार यूनिवर्सिटी के छात्रों ने अपने दीक्षांत समारोह में सीजेआई सूर्यकांत की मौजूदगी का विरोध किया था.
इसके बाद 13 अगस्त को बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने नालसार के स्नातक बैच के छात्रों को लेकर एक आदेश जारी किया था, जिसमें उन्होंने देश के सभी राज्यों की बार काउंसिल से कहा था कि वे ‘2026 में नालसार यूनिवर्सिटी से स्नातक हुए छात्रों का अगले आदेश तक अधिवक्ता के तौर पर पंजीकरण न करें.’
हालांकि, बाद में उन्होंने इस आदेश को वापस ले लिया था और माफी भी मांगी थी.
इसके बाद 15 अगस्त को एनएलएसआईयू के 165 स्नातक छात्रों, 409 मौजूदा छात्रों और 128 पूर्व छात्रों ने एक हस्ताक्षरित बयान जारी किया था. इसमें बीसीआई की कार्रवाई की आलोचना करते हुए नालसार के छात्रों और शिक्षकों के प्रति एकजुटता व्यक्त की गई थी.
बता दें कि सूर्यकांत एनएलएसआईयू के कुलाधिपति हैं और विश्वविद्यालय के वार्षिक दीक्षांत समारोह में स्नातक छात्रों को डिग्रियां प्रदान करने की परंपरा रही है.
इस संबंध में एनएलएसआईयू के एक छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि 17 अगस्त को स्नातक छात्रों की सीजेआई सूर्यकांत से मुलाकात हुई थी. छात्र के अनुसार, सीजेआई स्वयं उनकी चिंताओं को समझना चाहते थे.
इसके बाद 23 अगस्त को स्नातक बैच के छात्रों से यह जानने के लिए मतदान कराया गया कि क्या वे सीजेआई की मौजूदगी वाले दीक्षांत समारोह में शामिल होना चाहते हैं. अधिकांश छात्रों ने इसके पक्ष में मतदान किया.
हालांकि, उन्हें पहले ही बता दिया गया था कि समारोह के दौरान किसी भी तरह के विरोध की अनुमति नहीं होगी.
छात्रों का कहना है कि मतदान में उनके सामने कोई दूसरा विकल्प नहीं रखा गया था. मसलन, सीजेआई के बिना दीक्षांत समारोह आयोजित करने या समारोह के दौरान विरोध की अनुमति देने जैसे विकल्प मतदान का हिस्सा नहीं थे. ऐसे में छात्रों के सामने प्रभावी रूप से केवल दो ही विकल्प थे- सीजेआई की मौजूदगी वाले दीक्षांत समारोह में शामिल होना या फिर दीक्षांत समारोह का आयोजन ही न होना.
हालांकि, छात्रों को यह आश्वासन दिया गया था कि मनन कुमार मिश्रा दीक्षांत समारोह में शामिल नहीं होंगे.
लेकिन 25 अगस्त को स्नातक बैच के छात्रों से अचानक एक सार्वजनिक बयान जारी कर खुद सीजेआई सूर्यकांत को आमंत्रित करने के लिए कहा गया. इस नई शर्त पर चर्चा के लिए चारों स्नातक बैचों के छात्र फिर एक साथ जुटे. उन्हें बताया गया कि इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकार करना होगा.
हालांकि, नए मतदान में अधिकांश छात्रों ने सीजेआई को आमंत्रित करने के लिए पत्र लिखने से इनकार कर दिया. छात्रों की आपत्ति थी कि आमंत्रण पत्र के मसौदे की जांच विश्वविद्यालय करेगा और उसमें मनन कुमार मिश्रा की अनुपस्थिति का उल्लेख नहीं किया जा सकेगा.
छात्रों ने यह भी कहा कि अचानक इस तरह आमंत्रण पत्र जारी करने की शर्त थोपना उनके लिए स्वीकार्य नहीं था.
आखिरकार, 27 अगस्त को स्नातक बैचों को विश्वविद्यालय की ओर से आधिकारिक सूचना दी गई कि दीक्षांत समारोह आयोजित नहीं किया जाएगा.
एनएलएसआईयू के एक छात्र ने बताया कि 3 अगस्त को समारोह के लिए आधिकारिक रूप से आमंत्रित किए गए छात्रों और उनके परिवारों ने कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहले ही यात्रा के टिकट बुक कर लिए थे.
गौरतलब है कि सीजेआई सूर्यकांत की टिप्पणियों को लेकर बीते कुछ महीने में काफी विवाद देखने को मिला है. पेपर लीक और परीक्षाओंं में अनियमितता को लेकर जिस कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर-मंतर पर करीब एक महीने युवाओं का आंदोलन चला, जिसके बाद आखिरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था, उस पार्टी का नाम और प्रेरणा सीजेआई सूर्यकांत की ही देन है.
उल्लेखनीय है कि सीजेआई ने 15 मई को एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था, ‘समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी मौजूद हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं. क्या आप भी उनके साथ जुड़ना चाहते हैं? कुछ युवा ऐसे हैं, जो रोज़गार नहीं मिलने और पेशे में जगह न बना पाने के कारण कॉकरोच की तरह हर जगह फैल जाते हैं.’
बाद ने उन्होंने स्पष्टीकरण देते हुआ कहा था कि मीडिया के एक वर्ग ने एक तुच्छ मामले की सुनवाई के दौरान उनके द्वारा दिए गए मौखिक बयान को ग़लत तरीके से प्रस्तुत किया है. सीजेआई ने जोड़ा था कि भारत का हर युवा उन्हें प्रेरित करता है.
