राम मंदिर चढ़ावा चोरी: ट्रस्ट ने प्रायश्चित करने के लिए 10 दिन का ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान शुरू किया

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने कहा कि मंदिर परिसर में चढ़ावे की चोरी की घटना के बाद ट्रस्ट ने मंदिर की पवित्रता और गरिमा की पुनर्स्थापना के लिए मंदिर परिसर और विभिन्न गुरुकुलों में 10 दिवसीय विशेष 'प्रायश्चित एवं शुद्धिकरण अनुष्ठान' शुरू किया है. वहीं, कुछ अन्य संतों ने इस अनुष्ठान के उद्देश्य को लेकर सवाल उठाए हैं.

(फोटो: पीएमओ वाया पीटीआई)

नई दिल्ली: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर में कथित चढ़ावा की चोरी का ‘प्रायश्चित’ करने और भगवान से ‘माफ़ी मांगने’ के लिए अयोध्या में 10 दिन का शुद्धिकरण अनुष्ठान शुरू किया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, इस अनुष्ठान के तहत अयोध्या के विभिन्न गुरुकुलों में रोज विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ किया जा रहा है. विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र में भगवान विष्णु के एक हजार नामों का जप किया जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार, इसके नियमित पाठ से सकारात्मकता, समृद्धि और मंगल की प्राप्ति होती है.

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने शुक्रवार (17 जुलाई) को समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, ‘श्री राम जन्मभूमि मंदिर परिसर में चढ़ावे की चोरी की घटना के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर की पवित्रता और गरिमा की पुनर्स्थापना के लिए मंदिर परिसर और विभिन्न गुरुकुलों में 10 दिवसीय विशेष प्रायश्चित एवं शुद्धिकरण अनुष्ठान शुरू किया है.’

उन्होंने बताया कि ट्रस्ट इस अवधि के दौरान प्रतिदिन कम-से-कम 251 बार विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है.

ट्रस्ट के सदस्य दिनेंद्र दास ने पीटीआई से कहा कि ‘रामलला के स्थान पर हुई गलतियों को को सुधारने के लिए विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ कराया जा रहा है.

उन्होंने यह भी बताया कि विष्णु सहस्रनाम के साथ-साथ वाल्मीकि रामायण का भी नियमित पाठ किया जा रहा है.

यह शुद्धिकरण अनुष्ठान ऐसे समय में शुरू किया गया है, जब कुछ सप्ताह पहले मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के आरोपों ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया था.

गोविंद देव गिरि ने कहा, ‘हम सभी इस चढ़ावे चोरी की घटना से गहराई से आहत, दुखी और शर्मिंदा हैं.’ उन्होंने कहा कि भगवान राम की कृपा से पूरी सच्चाई सामने आएगी.

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बीच, विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) समर्थित संतों और साधुओं की एक बैठक 23 जुलाई को अयोध्या में होने वाली है. इस बैठक में मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर हिंदू समुदाय में पैदा हुई चिंताओं को दूर करने के लिए एक रूपरेखा तैयार की जाएगी.

अखबार ने विहिप के सूत्रों के हवाले से बताया कि संगठन साधुओं और हिंदू सामाजिक समूहों के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि भक्तों द्वारा दिए गए दान के कथित गबन से जुड़ी चिंताओं का समाधान किया जा सके.

विश्व हिंदू परिषद के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, ‘एसआईटी इस मामले की जांच कर रही है और उम्मीद है कि जल्द ही अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करेगी. इसका मकसद श्रद्धालुओं को यह भरोसा दिलाना है कि मंदिर और उसके प्रशासन में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाए जाएंगे.’

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, चढ़ावा चोरी की एसआईटी जांच के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने अपने जीवन का पहला चातुर्मास अयोध्या में करने का निर्णय लिया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, 25 जुलाई से शुरू होकर 21 नवंबर (देवउठनी एकादशी) तक चलने वाले इस चार माह के कालखंड में वह अयोध्या नहीं छोड़ेंगे.

ज्ञात हो कि मंदिर में चढ़ावा चोरी का विवाद 7 जून को सामने आया था. इसके बाद 13 जून को एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया. 26 जून को मंदिर में चढ़ाए गए नक़द और क़ीमती सामान की चोरी और गबन के मामले में आठ लोगों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की गई है. एसआईटी की प्रारंभिक जांच के आधार पर राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया.

मालूम हो कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दो सीनियर पदाधिकारियों- महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफ़ा दे दिया है, लेकिन एफआईआर में उनके नाम शामिल नहीं हैं.

हालांकि, कथित चोरी की वास्तविक राशि कितनी थी, यह कब और किस प्रकार हुई, इन सभी पहलुओं की जांच अभी भी जारी है.

उल्लेखनीय है कि यह ट्रस्ट सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर बनाया गया था और इसके गठन की घोषणा खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी.

अनुष्ठान के उद्देश्य पर सवाल

कुछ संतों ने राम मंदिर परिसर में आयोजित किए जा रहे प्रायश्चित अनुष्ठान के उद्देश्य को लेकर सवाल उठाए हैं. सवाल किया कि इस अनुष्ठान का यजमान कौन है, बहुत-सी बातें स्पष्ट नहीं हैं.

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, आर्य संत वरुण दास ने कहा कि पहले यह पता चलना चाहिए कि आखिर प्रायश्चित अनुष्ठान आयोजित क्यों हो रहा है? जब कोई बड़ा अनुष्ठान होना होता है तो उससे पहले भूतशुद्धि और आत्मशुद्धि के लिए प्रायश्चित अनुष्ठान किया जाता है.

उन्होंने कहा, ‘इस अनुष्ठान का उद्देश्य क्या है और यह किसलिए आयोजित किया जा रहा है?’

उन्होंने कहा, ‘अगर यह राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले को लेकर किया जा रहा है तो राम मंदिर में कोई चोरी नहीं हुई है. बैंककर्मी और कर्मचारी जहां नोटों की गणना करते हैं, चोरी वहां से हुई है और यह जगह मंदिर परिसर से कुछ दूरी पर है. मंदिर आज भी पवित्र है. मुझे इस अनुष्ठान की जानकारी मिली, लेकिन इस तरह का कोई भी अनुष्ठान दस दिन के लिए नहीं होता, बल्कि पांच, सात, नौ और ग्यारह दिन के लिए आयोजित किया जाता है.’

उन्होंने कहा कि अगर चढ़ावे में हुई हेराफेरी की वजह से ट्रस्ट के लिए अनुष्ठान किया जा रहा है तो यह अच्छी बात है, क्योंकि मानव जीवन में गलतियां होती रहती हैं और इसके लिए क्षमा-याचना होनी चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘इस अनुष्ठान का यजमान कौन है, यह भी स्पष्ट होना चाहिए. बहुत-सी बातें स्पष्ट नहीं हैं.’

वहीं, महामंडलेश्वर विष्णु दास ने कहा कि क्या पूजा करने और पछतावा करने से रामलला क्षमा कर देंगे? लोगों के चढ़ावे की चोरी किए जाने से कितना पाप हुआ है. इस पाप के बाद कोई कुछ भी करे, लेकिन माफी नहीं है. पाप करने वाला व्यक्ति कितना भी पछतावा करे, लेकिन वह मान्य नहीं होता. मनुष्य जैसा कर्म करता है, वैसा ही फल मिलता है.

उधर, तपस्वी छावनी के जगद्गुरु परमहंसाचार्य ने कहा कि अनुष्ठान होना अच्छी बात है, लेकिन प्रायश्चित अनुष्ठान करना उपहास की तरह है.

उन्होंने कहा, ‘भगवान राम के मंदिर में इस अनुष्ठान की क्या जरूरत है? भगवान राम के पास जाते ही सारे पाप और कर्मों का प्रायश्चित हो जाता है. भगवान कहते हैं कि जो शरण में आ गया है, उसका मरण नहीं होता.’

उन्होंने कहा कि चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए सावधानी की जरूरत है. यह कोई बड़ी घटना नहीं है, लेकिन हजारों की सैलरी पाने वाले गरीब लोगों के अंदर लालच आ गया होगा. यह कोई नई बात नहीं है. जो अधर्मी लोग हैं, वही लोग हल्ला मचा रहे हैं. उन्हें गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘सनातन धर्म के विरोधियों द्वारा ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि अयोध्या और राम मंदिर में सिर्फ चोर ही भरे पड़े हैं. यह बड़ा षड्यंत्र है.’