नई दिल्ली: हैदराबाद स्थित नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (नालसार) यूनिवर्सिटी के छात्रों के विरोध का समर्थन करने के कुछ दिनों बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा है कि उन्होंने दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनने का निमंत्रण कभी स्वीकार ही नहीं किया था.
मालूम हो कि नालसार के छात्रों ने दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किए जाने पर आपत्ति जताई थी. विश्वविद्यालय के करीब 1,400 छात्रों में से 400 से अधिक ने सीजेआई की मौजूदगी का विरोध किया था.
इस मामले को लेकर टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि उन्होंने दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनने के लिए नालसार के निमंत्रण पर कभी सहमति नहीं दी थी. ऐसे में उनके इस दीक्षांत समारोह में शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता है.
उल्लेखनीय है कि यह विवाद तब सामने आया, जब बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के सदस्य मनन कुमार मिश्रा ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए सभी राज्यों के बार काउंसिल को नालसार के 2026 बैच के स्नातकों का अगले आदेश तक अधिवक्ता के तौर पर पंजीकरण रोकने का निर्देश दिया.
हालांकि, बाद में उन्होंने अपना आदेश वापस ले लिया और माफ़ी भी मांगी.
बीसीआई की इस कार्रवाई पर सीजेआई ने भी नाराज़गी जताई थी. 14 अगस्त को उन्होंने कहा था कि छात्रों को शांतिपूर्ण ढंग से विरोध करने का अधिकार है. इसके साथ ही उन्होंने बीसीआई की इस मामले में भूमिका पर सवाल उठाया था.
सीजेआई ने कहा था, ‘बीसीआई बेवजह कार्रवाई कर रहा है. अगर छात्रों के पास विरोध करने का कोई मुद्दा है तो उन्हें विरोध करने का अधिकार है. हो सकता है छात्रों ने मुझे कोई पत्र लिखा हो. यह छात्रों और मेरे बीच का संवाद है. बीसीआई कौन होता है जो बेवजह इस मुद्दे को उठाए? यह पूरी तरह अनावश्यक है. बीसीआई का इससे कोई लेना-देना नहीं है.’
रिपोर्ट के मुताबिक, चार दिन पहले नालसार ने पुष्टि की थी कि यूनिवर्सिटी ने परंपरा के अनुसार सीजेआई सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनने के लिए आमंत्रित किया था. यह समारोह अगस्त के अंत या सितंबर में आयोजित होने की संभावना है.
मालूम हो कि नालसार के छात्रों ने अपने विरोध के पीछे 20 जुलाई को संसद की ओर निकाले गए मार्च से जुड़ी सीजेआई की टिप्पणियों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कथित ज्यादतियों का हवाला दिया था.
ज्ञात हो कि 20 जुलाई को युवाओं के ‘संसद मार्च’ के दौरान भारी जनसैलाब देखने को मिला था. इसमें करीब 75,000 लोग शामिल हुए थे. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने कि लिए लाठीचार्ज किया था. सुरक्षा बलों द्वारा पैलेट गन और कील लगी लाठियों के इस्तेमाल के आरोप भी लगे हैं- हालांकि पुलिस ने इन दोनों ही आरोपों से इनकार किया है.
इस संबंध में प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई संबंधित याचिका का ज़िक्र करने वाले वकील से सीजेआई ने कहा था, ‘हमारा समय बर्बाद न करें और अपना समय भी बर्बाद न करें.’
जब वकील ने कहा कि ऐसे वीडियो हैं जिनमें पुलिस को ज़रूरत से ज़्यादा बल का इस्तेमाल करते हुए दिखाया गया है, इस पर सीजेआई ने कहा था, ‘हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है; हमारे पास उन्हें देखने का समय नहीं है.’
गौरतलब है कि सीजेआई सूर्यकांत की टिप्पणियों को लेकर पहले भी विवाद रहा है. पेपर लीक और परीक्षाओंं में अनियमितता को लेकर जिस कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर-मंतर पर करीब एक महीने युवाओं का आंदोलन चला, जिसके बाद आखिरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था, उस पार्टी का नाम और प्रेरणा सीजेआई सूर्यकांत की ही देन है.
उल्लेखनीय है कि सीजेआई ने 15 मई को एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था, ‘समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी मौजूद हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं. क्या आप भी उनके साथ जुड़ना चाहते हैं? कुछ युवा ऐसे हैं, जो रोज़गार नहीं मिलने और पेशे में जगह न बना पाने के कारण कॉकरोच की तरह हर जगह फैल जाते हैं.’
