जातीय हिंसाग्रस्त मणिपुर में पिछले क़रीब एक महीने से बंधक बनाकर रखे गए 14 कुकी लोगों को नगा-बहुल सेनापति ज़िले में रिहा कर दिया गया. पुलिस ने उनकी मेडिकल जांच कर उनके गांव भेज दिया. लेकिन छह लापता नगाओं की अब तक कोई जानकारी नहीं है. कुकी समूहों ने इस बात से इनकार किया कि उन्होंने किसी भी नगा व्यक्ति को बंधक बना रखा है.
एक आरटीआई आवेदन के जवाब में मणिपुर गृह विभाग ने बताया कि हिंसा के बाद से सबसे अधिक 248 मौतें चूड़ाचांदपुर ज़िले में दर्ज की गईं. इसके बाद बिष्णुपुर में 151, कांगपोकपी में 128, इंफाल पश्चिम में 94, काकचिंग में 60, इंफाल पूर्व में 25, जिरीबाम में 13, थौबल में 11 और तेग्नौपाल में एक मौत दर्ज की गई.
मणिपुर के कांगपोकपी ज़िले के लोइबोल गांव में सुबह करीब 4 बजे अज्ञात हमलावरों ने हमला किया, जिसमें तीन नागरिकों की मौत हो गई. घटना के दौरान कई घरों में आग भी लगा दी गई. कुकी संगठन कुकी इनपी मणिपुर ने घटना की निंदा करते हुए जांच की मांग की है.
हिंसाग्रस्त मणिपुर के प्रभावशाली संगठन कुकी इनपी ने कहा है कि मौजूदा हालात में चल रही एसआईआर प्रक्रिया स्वीकार्य नहीं है. यह निष्पक्षता, सबको साथ लेकर चलने और प्रशासनिक ज़िम्मेदारी को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करती है. साथ ही, आंतरिक रूप से विस्थापित आबादी के एक बड़े, कमज़ोर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित किए बिना महत्वपूर्ण चुनावी और प्रशासनिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाना लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के सिद्धांतों को कमज़ोर करता है.
उखरुल ज़िले के लितान इलाके में 29 मई को सुरक्षा बलों के लिए ज़रूरी सामान ले जा रहे ट्रक पर अज्ञात हमलावरों ने घात लगाकर हमला किया, जिसमें पश्चिम बंगाल के हुगली ज़िले के रहने वाले ट्रक ड्राइवर की मौत हो गई और एक पुलिस कॉन्स्टेबल घायल हो गए. एनएच-202 पर घात लगाकर किया गया यह दूसरा हमला है. इससे पहले 18 अप्रैल को भी इसी जगह पर हमला हुआ था, जिसमें तंगखुल नगा समुदाय के दो नागरिक मारे गए
जातीय हिंसाग्रस्त मणिपुर में कुकी इनपी मणिपुर और यूनाइटेड नगा काउंसिल ने कांगपोकपी और नोनी ज़िलों में 13 मई को हुए एक हिंसक हमले के बाद ये बंद लागू किए हैं. नाकेबंदी के कारण आपूर्ति व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है. सैकड़ों यात्री, ड्राइवर और परिवहन कर्मी पर्याप्त भोजन, पीने के पानी और स्वच्छता सुविधाओं के अभाव में रास्ते में फंसे हुए हैं.
बीते 13 मई को मणिपुर के चूड़ाचांदपुर में आयोजित एक कार्यक्रम से वापस कांगपोकपी लौट रहे चर्च नेताओं के वाहनों पर अज्ञात लोगों ने गोलीबारी की गई जिसमें चार लोगों की मौत हो गई. यह घटना मुख्यमंत्री युमनम खेमचंद सिंह के चूड़ाचांदपुर दौरे से ठीक कुछ दिन पहले हुई है.
मणिपुर के कई नगा नागरिक समाज संगठनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की मांग करते हुए आरोप लगाया कि म्यांमार स्थित कुकी नेशनल आर्मी-बर्मा के उग्रवादियों ने एसओओ समूहों की सहायता से मणिपुर के उखरुल, कामजोंग और अन्य पहाड़ी जिलों में नगा गांवों पर बार-बार हमले किए हैं.
इस हफ्ते नॉर्थ ईस्ट डायरी में मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय के प्रमुख समाचार.
मणिपुर भाजपा के प्रवक्ता एलांगबम जॉनसन ने कहा कि 3 मई 2023 से, जब राज्य में पहली बार जातीय हिंसा भड़की थी, तब से पार्टी लोगों की इच्छाओं के अनुरूप काम करने में नाकाम रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी की राज्य इकाई पूरी तरह से केंद्रीय नेतृत्व के नियंत्रण में है. राज्य इकाई के पास अनुशासनात्मक मामलों पर फ़ैसले लेने का अधिकार भी नहीं है.
मणिपुर में 3 मई 2023 को भड़की जातीय हिंसा को तीन वर्ष पूरे हो गए, लेकिन केंद्र सरकार का जांच आयोग अब तक रिपोर्ट नहीं दे सका है. चार बार समयसीमा बढ़ चुकी है. हिंसा में 270 से अधिक लोगों की मौत हुई, जबकि राज्य में तनाव अब भी बना हुआ है.
मणिपुर की राजधानी इंफाल के बाबूपाड़ा इलाके में स्थित मुख्यमंत्री युमनम खेमचंद सिंह के बंगले की ओर मार्च करने की कोशिश के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं. कम से कम 22 लोग घायल हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. वहीं, कांगपोकपी ज़िले में कुकी संगठन ने उखरुल में संदिग्ध नगा उग्रवादियों के गोलीबारी में मारे गए दो लोगों के विरोध में 10 घंटे के पूर्ण बंद का आह्वान किया था.
हिंसाग्रस्त मणिपुर में यूनाइटेड नगा परिषद द्वारा बुलाए गए बंद के दौरान कांगपोकपी ज़िले में तांगखुल नगा और कुकी समुदायों के बीच झड़पें हुईं. इस दौरान गोलियां भी चलीं. अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी है कि गोली किसने चलाई. नगा संगठन ने नगा बहुल इलाकों में तीन दिन का बुलाया है.
कांग्रेस ने मणिपुर में में हुई हालिया हत्याओं, जिनमें दो बच्चों की हत्या भी शामिल है, की तत्काल और समयबद्ध जांच की मांग की. मणिपुर से कांग्रेस सांसद ए. बिमोल अकोइजाम ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारों ने शांति बहाल करने और लोगों की जान बचाने की अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है.
मणिपुर में बढ़ती हिंसा के बीच कोकोमी ने भाजपा के बहिष्कार का ऐलान किया है और मुख्यमंत्री से जवाब मांगा है. वहीं, नगा संगठन ने दो लोगों की हत्या के विरोध में तीन दिन के बंद की घोषणा की है. हालिया घटनाओं में कई लोगों की मौत और कई दर्जन लोगों के घायल होने की खबर है.