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कृष्ण प्रताप सिंह

मुज़फ़्फ़रनगर महापंचायत ने सांप्रदायिकता पर वो चोट की है, जिसकी देश को सख़्त ज़रूरत थी

किसान आंदोलन के अराजनीतिक होने को उसकी अतिरिक्त शक्ति के रूप में देखें, तो कह सकते हैं कि हिंदू-मुस्लिम सद्भाव की यह मुहिम राजनीतिक हानि-लाभ से जुड़ी न होने के कारण अधिक विश्वसनीय है और ज़्यादा उम्मीदें जगाती है.

राष्ट्रपति जी, ‘राम सबके और सबमें हैं’ उन्हें समझाइए जो राम नाम पर हमवतनों का जीना मुहाल किए हैं

अयोध्या में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को अपने संबोधन में न अवध की ‘जो रब है वही राम है’ की गंगा-जमुनी संस्कृति की याद आई, न ही अपने गृहनगर कानपुर के उस रिक्शेवाले की, जिसे बीते दिनों बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने मुस्लिम होने के चलते पीटा और जबरन ‘जय श्रीराम’ बुलवाकर अपनी ‘श्रेष्ठताग्रंथि’ को तुष्ट किया था.

क्या राष्ट्रध्वज का अपमान देश का सम्मान करने का नया तरीका है?

तिरंगे में लिपटे एक पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यपाल के पार्थिव शरीर के आधे हिस्से पर अपना झंडा प्रदर्शित करके भाजपा ने पूरी तरह साफ कर दिया कि राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान के मामले में वह अब भी ‘ख़ुद मियां फजीहत दीगरे नसीहत’ की अपनी नियति से पीछा नहीं छुड़ा पाई है.

उत्तर प्रदेश में ‘जब नगीचे चुनाव आवत है, भात मांगौ पुलाव आवत है’ का दौर शुरू हो गया है

ऐसी परंपरा-सी हो गई है कि पांच साल की कार्यावधि के चार साढ़े चार साल सोते हुई गुज़ार देने वाली सरकारें चुनाव वर्ष आते ही अचानक जागती हैं और तमाम ऐलान व वादे करती हुई मतदाताओं को लुभाने में लग जाती हैं. बीते दिनों विधानसभा में योगी आदित्यनाथ द्वारा की गई लोक-लुभावन घोषणाएं इसी की बानगी हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन और नए-पुराने वादे

75वें स्वतंत्रता दिवस पर नरेंद्र मोदी ने सौ लाख करोड़ रुपये वाली महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना का ऐलान कर विकास और रोजगार के संकट के समाधान का सब्ज़बाग दिखाया, तो भूल गए कि वे देश के सालाना बजट से भी बड़ी ऐसी ही योजना इससे पहले के स्वतंत्रता दिवस संदेशों में भी घोषित कर चुके हैं.

उत्तर प्रदेश: बसपा की भाजपा से हिंदुत्व का एजेंडा छीनने की कोशिशें क्या रंग लाएंगी

जब भी धर्मनिरपेक्षता को चुनाव मैदान से बाहर का रास्ता दिखाकर मुकाबले को असली-नकली, सच्चे-झूठे, सॉफ्ट या हार्ड हिंदुत्व के बीच सीमित किया जाता है, उसका कट्टर स्वरूप ही जीतता है. उत्तर प्रदेश में बसपा को इस एजेंडा पर आगे बढ़ने से पहले पिछले उदाहरणों को देखना चाहिए.

इस सरकार के झूठ की कोई इंतिहा ही नहीं

बीते 20 जुलाई को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से राज्यसभा में कहा गया कि कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की अप्रत्याशित मांग के बावजूद किसी भी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में इसके अभाव में किसी व्यक्ति के मरने की उसे जानकारी नहीं है. उसके पास इस बात की जानकारी भी नहीं है कि दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलित किसानों में से अब तक कितने अपनी जान गंवा चुके हैं.

उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जनसंख्या की नहीं, चुनाव की चिंता

विधानसभा चुनाव से कुछ ही महीनों पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रस्तावित जनसंख्या क़ानून को ज़रूरी बताते हुए कहा कि बढ़ती आबादी प्रदेश के विकास में बाधा बनी हुई है. पर क्या यह बाधा अचानक आ खड़ी हुई? अगर नहीं, तो इसे लेकर तब उपयुक्त कदम क्यों नहीं उठाए गए, जब उनकी सरकार के पास उसे आगे बढ़ाने का समय था?

उत्तर प्रदेश: ज़िला पंचायत अध्यक्षों के चुनाव में भाजपा की जीत का हासिल क्या है

ज़िला पंचायत चुनाव में मिली विजय पर फूली न समा रही भाजपा भूल रही है कि ज़िला पंचायत अध्यक्षों के अप्रत्यक्ष चुनाव में जीत किसी भी अन्य अप्रत्यक्ष चुनावों की तरह किसी पार्टी की ज़मीनी पकड़ या लोकप्रियता का पैमाना नहीं होती. कई बार तो संबंधित पार्टी को इससे मनोवैज्ञानिक बढ़त तक नहीं मिल पाती.

महामहिम, इस दुनिया में आदमी की जान से बड़ा कुछ भी नहीं है

उत्तर प्रदेश की तीन दिन की यात्रा के दौरान बीते 25 जून को कानपुर में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की विशेष ट्रेन के गुज़रने के दौरान रोके गए ट्रैफिक से लगे जाम में फंसकर इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के कानपुर चैप्टर की अध्यक्ष वंदना मिश्रा की जान चली गई थी. इसी दिन राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था के लिए जा रहे सीआरपीएफ के तेज़ रफ़्तार वाहन ने एक बाइक को टक्कर मार दी थी, जिससे एक तीन साल की मासूम की मौत हो गई थी.

कोविड संकट: क्या सरकार की आलोचना से देश की छवि बिगड़ती है

कोविड प्रबंधन की आलोचना को मोदी सरकार छवि ख़राब करना बता रही है. हालांकि देश की छवि तब भी बिगड़ती है, जब प्रधानमंत्री चुनाव प्रचार में प्रतिद्वंद्वी महिला मुख्यमंत्री को ‘दीदी ओ दीदी’ कहकर चिढ़ाने पर उतर आते हैं. वह तब भी बिगड़ती है, जब उनके समर्थक हत्यारी भीड़ में बदल जाते हैं या बलात्कारियों के पक्ष में तिरंगे लहराकर जुलूस निकालते हैं.

अयोध्या: क्या ज़मीन भ्रष्टाचार के आरोपों पर राम जन्मभूमि ट्रस्ट से ज़्यादा मीडिया रक्षात्मक है

राम मंदिर ट्रस्ट पर ज़मीन संबंधी भ्रष्टाचार के आरोपों के फौरन बाद इसके महासचिव चंपत राय ने कहा कि वे आरोपों का अध्ययन करेंगे. लोगों का कहना है कि जवाब के लिए उनका अध्ययन पूरा होने का इंतज़ार करना चाहिए, पर मीडिया का एक बड़ा हिस्सा ट्रस्ट की ओर से सफाई देते हुए उसे क्लीन चिट देने की उतावली में दिखता है.

पंजाब: क्या शिरोमणि अकाली दल और बसपा का गठबंधन चुनावी तस्वीर बदलने में सक्षम होगा

विधानसभा चुनाव से कुछ महीनों पहले बसपा ने शिरोमणि अकाली दल के साथ चुनावी मैदान में उतरने का निर्णय लिया है. बीते कई चुनावों में बसपा के प्रदर्शन और बसपा सुप्रीमो मायावती के अप्रत्याशित फैसलों के आलोक में राजनीतिक जानकार इस गठबंधन को लेकर ज़्यादा आशांवित नहीं हैं.

उत्तर प्रदेश में भाजपा सांप-छछूंदर की गति को क्यों प्राप्त हो गई है

उत्तर प्रदेश की राजनीति को लेकर भाजपा के बार-बार ‘सब कुछ ठीक है’ कहने के बावजूद कुछ भी ठीक न होने के संदेह थमते नज़र नहीं आ रहे हैं.

कोविड संकट: आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसां होना

इस कठिन वक़्त में सरकारों की काहिली तो अपनी जगह पर है ही, लोगों का आदमियत से परे होते जाना भी पीड़ितों की तकलीफों में कई गुनी वृद्धि कर रहा है. इसके चलते एक और बड़ा सवाल विकट होकर सामने आ गया है कि क्या इस महामारी के जाते-जाते हम इंसान भी रह जाएंगे?