कांग्रेस ने बिहार में मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' की ईमानदारी पर सवाल उठाया और कहा कि इस प्रक्रिया ने जवाबों से ज़्यादा सवाल खड़े कर दिए हैं. पार्टी ने कहा कि अंतिम मतदाता सूची के प्रारंभिक विश्लेषण से पता चलता है कि 5 लाख नाम डुप्लीकेट हैं, जबकि हटाए गए 67.3 लाख नामों में से दसवें हिस्से से ज़्यादा नाम 15 विधानसभा क्षेत्रों से हैं.
बेंगलुरु के पूर्व पुलिस आयुक्त रहे और अब भाजपा नेता भास्कर राव ने भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई पर वकील राकेश किशोर द्वारा जूता फेंकने का ज़िक्र करते हुए कहा था कि भले ही यह क़ानूनी रूप से और बेहद ग़लत हो, मैं इस उम्र में नतीजों की परवाह किए बिना, एक रुख अपनाने और उस पर चलने के साहस की प्रशंसा करता हूं. आलोचना के बाद उन्होंने इसके लिए माफ़ी मांग ली.
विपक्षी नेताओं ने भारत के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई पर हमले के प्रयास की कड़ी निंदा की है. इस घटना को अभूतपूर्व, शर्मनाक और घृणित बताते हुए कहा कि दक्षिणपंथ द्वारा फैलाया गया सांप्रदायिक और जातिवादी ज़हर इस हद तक पहुंच गया है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश, जो दलित समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, को भी खुलेआम निशाना बनाया जा रहा है.
बिहार में कई पिछड़ी जातियां हैं, जिनकी जनसंख्या अच्छी ख़ासी है लेकिन उन्हें उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिला है. ये समुदाय अनुसूचित जाति का दर्जा और आरक्षण पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. कांग्रेस इस दलित केंद्रित राजनीति का धुरी बनना चाहती है. उसने रविदास समुदाय के नेता को प्रदेश अध्यक्ष भी बनाया है. लेकिन क्या वह इन बिखरी जातियों को एकजुट कर पाएगी?
बिहार में इस बार दो चरणों में चुनाव होंगे. 6 और 11 नवंबर को वोट डाले जाएंगे, मतगणना 14 को होगी. यह घोषणा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सोमवार (6 अक्टूबर) को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में की.
बिहार एसआईआर की अंतिम मतदाता सूची को लेकर पटना में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि मतदाता सूची से करीब 47 लाख नाम हटाने के पीछे कारण क्या हैं या इनमें कितने विदेशी ‘अवैध प्रवासी’ पाए गए. उन्होंने कहा कि इस डेटा की पूरी जानकारी हर ईआरओ और जिलाधिकारी के पास उपलब्ध है.
बिहार भाजपा के अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने शनिवार को चुनाव आयोग से आगामी विधानसभा चुनाव एक या दो चरणों में कराने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि बुर्का पहनकर मतदान केंद्रों पर आने वाली महिलाओं के चेहरों का मिलान मतदाता पहचान पत्रों से किया जाए.
बिहार में 3.5 करोड़ महिला मतदाता हैं और इनमें से 22.7 लाख मतदाताओं के नाम एसआईआर की फाइनल सूची से हटा दिए गए. इसका असर इस साल के अंत में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों पर पड़ने की उम्मीद है.
जम्मू-कश्मीर के भाजपा नेता जहांज़ैब सिरवाल ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मुस्लिम समुदाय के खिलाफ़ टिप्पणियों को अस्वीकार्य और यूपी पुलिस के मुस्लिम समुदाय के प्रति प्रतिशोधी कहते हुए पार्टी से इस्तीफ़े की धमकी दी. उन्होंने कहा कि अगर भाजपा मुसलमानों का विश्वास बहाल करने के लिए कोई क़दम नहीं उठाती है, तो उनके पास इस्तीफ़ा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा.
आरएसएस के शताब्दी समारोह पर जारी स्मारक डाक टिकट और सिक्के को लेकर केरल के सीएम पिनाराई विजयन ने इसे संविधान का अपमान बताया और आरएसएस की तुलना इज़रायल के ज़ियोनिस्ट से की. संघ की आलोचना करते हुए विपक्षी नेताओं ने इसे विभाजनकारी, प्रतिक्रियावादी और स्वतंत्रता संग्राम विरोधी बताया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आरएसएस संस्थापक हेडगेवार समेत कई नेताओं के स्वतंत्रता संग्राम में जेल जाने का दावा करते हुए संघ की 100वीं वर्षगांठ पर डाक टिकट और 100 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया. विपक्ष ने इसे इतिहास से छेड़छाड़ करार दिया और आरएसएस पर अंग्रेजों का साथ देने व देश को बांटने का आरोप लगाया.
28 सितंबर को एशिया कप में पाकिस्तान पर भारत की जीत के बाद देश के प्रधानमंत्री से लेकर खिलाड़ियों और दर्शकों तक में राजनीतिक तेवर के असाधारण दृश्य देखने को मिले. जहां भारत-पाक के पहले मैच पर बहिष्कार की व्यापक गूंज सुनी गई थी, वहीं फाइनल मैच के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मैच की तुलना सैन्य अभियान- ऑपरेशन सिंदूर- से करते नज़र आए.
‘आई लव मुहम्मद’ पोस्टर विवाद पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुस्लिम समुदाय पर सीधा हमला बोल दिया है. उन्होंने समुदाय विशेष को ‘पीटने’ और ‘जहन्नुम भेजने’ तक की धमकी दी.
केरल विधानसभा ने राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के चुनाव आयोग के क़दम के ख़िलाफ़ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया. सीएम पिनाराई विजयन ने एसआईआर को चुनाव आयोग द्वारा ‘जल्दबाज़ी में उठाया क़दम’ बताते हुए इसके पीछे ‘ग़लत मंशा’ होने का संदेह जताया.
चुनाव आयोग के मुताबिक़, जिन मतदाताओं ने अपना फॉर्म भरकर जमा किया था, सिर्फ़ उनका नाम एसआईआर की ड्राफ्ट सूची में शामिल होना था. लेकिन बिहार के कुछ इलाके ऐसे हैं जहां उन मतदाताओं के नाम भी ड्राफ्ट सूची में शामिल हैं, जो यहां रहते ही नहीं हैं और जो अपना फॉर्म भर ही नहीं सकते थे.