पीडीपी की नेता इल्तिजा मुफ़्ती के ख़िलाफ़ राजद्रोह का केस दर्ज करने के कुछ दिन बाद उनके एक्स अकाउंट को 11 मई को भारत में रोक दिया गया. मुफ़्ती ने कहा कि यह रोक ऐसे वक़्त पर लगाई गई है जब उन्होंने सीएम की उन ग़ैर-ज़िम्मेदाराना टिप्पणियों की आलोचना की, जिनमें उन्होंने (अब्दुल्ला ने) जम्मू-कश्मीर में नशे और शराब के इस्तेमाल को एक तरह से सही ठहराया था.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देशवासियों से विभिन्न तरह की कटौती की अपील के बाद उनके कई शहरों के दौरों को लेकर सवाल उठ रहे हैं. जिस रविवार पीएम नागरिकों से ‘संकट के समय’ में ‘सामूहिक त्याग’ की बात कही, उसी दिन उन्होंने तीन राज्यों के चार शहरों में भव्य व्यवस्था वाले समारोहों में हिस्सा लिया. सोमवार को भी उनके ऐसे कार्यक्रम जारी हैं.
1990 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सुब्रता गुप्ता को बंगाल में नए मुख्यमंत्री के शपथ लेने के तुरंत बाद सीएम का सलाहकार नियुक्त किया गया है. गुप्ता दिसंबर 2025 में भारतीय चुनाव आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल में कराए गए विवादास्पद एसआईआर अभियान में स्पेशल रोल ऑब्जर्वर के बतौर कार्यरत थे.
तमिल सिनेमा के सुपरस्टार विजय का राजनीतिक उभार रातों-रात नहीं हुआ. यह पटकथा वर्षों से बेहद सावधानी से तैयार की गई थी.. फिल्मों, प्रतीकों, सार्वजनिक हस्तक्षेपों और कई बार सोची-समझी चुप्पियों के ज़रिये. बरसों से बुनी जा रही इस कहानी का एक चरण 10 मई को विजय के तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ पूरा हुआ.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के बीच देशवासियों से सोना न ख़रीदने, विदेश यात्रा कम करने, पेट्रोल का कम इस्तेमाल करने और 'वर्क फ्रॉम होम' की अपील की है. इसके अलावा खाना पकाने के तेल की कम खपत, उर्वरकों का कम उपयोग का आग्रह भी किया है. विपक्ष ने इसकी कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि पीएम मोदी को चुनाव ख़त्म होते ही संकट की याद आ गई.
पश्चिम बंगाल के हालिया विधानसभा चुनाव में जो हुआ, उसे लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं. कई प्रेक्षक इस सवाल पर देश के 'बंट' जाने की बात करते हुए इसे लोकंतत्र और प्रभुत्व की लड़ाई बता रहे हैं, तो वहीं कुछ इसे सत्ता विरोधी लहर कह रहे हैं. साम, दाम दंड, भेद के इर्द-गिर्द तमाम तर्क दिए जा रहे हैं. ऐसे में यूपी के एक गांव के लोगों ने इस पर क्या कहा इस लेख में पढ़ें...
तमिलनाडु की 234 सदस्यों वाली विधानसभा में 120 निर्वाचित विधायकों का समर्थन मिलने के बाद विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया था. इससे पहले विजय तीन बार राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर चुके थे. शनिवार को विजय के शपथ ग्रहण समारोह में लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी मौजूद रहे.
ईडी ने पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा को गिरफ़्तार कर लिया है. आम आदमी पार्टी ने इसे केंद्र की भाजपा सरकार के इशारे पर की गई राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है, क्योंकि पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं.
तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) प्रमुख विजय द्वारा तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से तीसरी बार मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश करने के बाद भी राज्य में सरकार गठन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है, क्योंकि राजभवन की ओर से इस पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. इस बीच विजय को कांग्रेस के साथ ही वाम दलों का समर्थन भी मिल गया है.
कभी ममता बनर्जी के बेहद क़रीबी रहे सुवेंदु अधिकारी अब बंगाल में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री होंगे. भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद पार्टी ने मुख्यमंत्री के तौर पर अधिकारी के नाम की घोषणा कर दी है. यह फैसला पार्टी के विधायक दल की बैठक में लिया गया, जिसकी घोषणा केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह ने की.
राज्य सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में 32 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार भी शामिल हैं. पहली बार सक्रिय राजनीति में आए निशांत को स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. आजीवन परिवारवाद और वंशवादी राजनीति का विरोध करने वाले नीतीश कुमार अब अपने बेटे की राजनीतिक पारी को लेकर विपक्ष के निशाने पर हैं.
तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने टीवीके सुप्रीमो विजय को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण समारोह से पहले कम से कम 118 विधायकों के समर्थन का प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा है. इस बीच विजय को वामपंथी दलों के समर्थन का संकेत मिला है, जिसके बाद उनके तीसरी बार राज्यपाल से मिलने जाने की ख़बरें सामने आ रही हैं.
बंगाल को लेकर ज़मीन से आने वाली बात यह है कि बहुत-सी जगहों पर भाजपा का कैडर तो तृणमूल के ख़िलाफ़ लड़ ही रहा था, स्थानीय स्तर पर कांग्रेस और वामपंथी कार्यकर्ताओं का एक हिस्सा भी तृणमूल-विरोध की मनःस्थिति में भाजपा को रास्ता दे रहा था.
प्रतिमाएं पत्थर या धातु भर नहीं होतीं. वे इस बात का संकेत होती हैं कि समाज किन विचारों, संघर्षों और स्मृतियों को अपने सार्वजनिक जीवन में जगह देना चाहता है. जब राजनीति स्मृति-विनाश का रूप लेने लगे, तब कोई भी प्रतीक सुरक्षित नहीं रहता, न लेनिन, न गांधी, न नेहरू, न आंबेडकर.
पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में से 150 सीटों पर हटाए गए मतदाताओं की संख्या जीत के अंतर से ज़्यादा थी. इनमें से भाजपा ने 99 सीटें जीतीं, जबकि 2021 में वह ऐसी सिर्फ 19 सीटों पर जीती थी.