Anti-conversion Bill

कर्नाटक में राज्यपाल ने धर्मांतरण-रोधी अध्यादेश को मंज़ूरी दी

कर्नाटक धार्मिक स्वतंत्रता अधिकार विधेयक, 2021 के अनुसार, इसके तहत दोषी पाए जाने पर उसे तीन साल की क़ैद, जो बढ़ाकर पांच साल तक की जा सकती है और उसे 25,000 रुपये का जुर्माना भी भरना होगा. सामूहिक धर्मांतरण के संबंध में तीन साल की जेल की सज़ा का प्रावधान है, जो दस साल तक बढ़ सकती है और जुर्माना एक लाख रुपये तक हो सकता है.

कर्नाटक सरकार धर्मांतरण विरोधी क़ानून लागू करने के लिए ला रही है अध्यादेश, आर्कबिशप नाख़ुश

कर्नाटक विधानसभा ने पिछले वर्ष दिसंबर में धर्म स्वतंत्रता अधिकार सुरक्षा विधेयक पारित किया था, लेकिन यह विधेयक अभी विधान परिषद में लंबित है, जहां सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के पास बहुमत नहीं है. बेंगलुरु के आर्कबिशप ने कहा कि सही लोकतांत्रिक परंपरा के तहत ईसाई समुदाय राज्यपाल से इस अध्यादेश को मंज़ूरी नहीं देने की अपील करता है.

हरियाणा: विपक्ष के विरोध के बीच विधानसभा में धर्मांतरण रोधी विधेयक पारित

हरियाणा ग़ैर क़ानूनी धर्मांतरण रोकथाम विधेयक, 2022 के मुताबिक, डिजिटल माध्यम के उपयोग समेत अगर लालच, बल या धोखाधड़ी के ज़रिये धर्म परिर्वतन किया जाता है तो एक से पांच साल की सज़ा और कम से कम एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है.

विधानसभा में धर्मांतरण रोधी विधेयक लाने वाला 11वां राज्य बना हरियाणा

शुक्रवार को बजट सत्र के दौरान राज्य सरकार ने ‘हरियाणा अवैध धर्मांतरण रोकथाम विधेयक, 2022’ पेश किया, जिस पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई. कांग्रेस विधायक रघुवीर सिंह कादियान ने सदन में विधेयक की एक प्रति फाड़ दी, जिसके बाद उन्हें सत्र से निलंबित कर दिया गया.

कर्नाटक: सरकारी कॉलेज में हिजाब पहनने वाली छात्राओं को कक्षा में प्रवेश देने से इनकार

मामला उडुपी के महिला पीयू कॉलेज का है. छह मुस्लिम छात्राओं का आरोप है कि प्राचार्य उन्हें कक्षा में हिजाब पहनने की अनुमति नहीं दे रहे हैं. साथ ही उन्हें उर्दू, अरबी और बेरी भाषा में बात करने नहीं दी जा रही है. प्राचार्य का कहना है कि छात्राएं परिसर में हिजाब पहन सकती हैं लेकिन कक्षा में इसकी इजाज़त नहीं है.  

कर्नाटक विधानसभा ने विपक्ष के हंगामे के बीच धर्मांतरण विरोधी विधेयक को मंज़ूरी दी

कर्नाटक विधानसभा में पारित  इस विधेयक में धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार की सुरक्षा और बलपूर्वक, अनुचित प्रभाव, जबरदस्ती, प्रलोभन या किसी भी कपटपूर्ण तरीके से एक धर्म से दूसरे धर्म में गै़रक़ानूनी अंतरण पर रोक लगाने का प्रावधान है. कांग्रेस ने इस विधेयक को जनविरोधी, संविधान विरोधी, ग़रीब विरोधी बताते हुए पुरज़ोर विरोध किया.

गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा- हिंदू बहुसंख्यक नहीं रहे तो ख़त्म हो जाएगा लोकतंत्र

गुजरात के गांधीनगर में विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित भारत माता के मंदिर में मूर्ति स्थापना समारोह को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा कि अगर अगले 1,000-2,000 वर्षों में हिंदुओं की संख्या कम हो जाती है और दूसरे धर्म के लोगों की संख्या बढ़ जाती है, तो कोई अदालत नहीं होगी, लोकसभा, संविधान, धर्मनिरपेक्षता, ये सब कुछ हवाहवाई हो जाएगा, कुछ भी नहीं रहेगा.

गुजरात हाईकोर्ट ने धर्मांतरण विरोधी नए क़ानून की अंतरधार्मिक विवाह संबंधी धाराओं पर लगाई रोक

गुजरात सरकार की ओर से पेश हुए वकील ने कहा था कि यह क़ानून अंतरधार्मिक विवाह पर प्रतिबंध नहीं लगाता है. इस पर न्यायालय ने कहा कि संशोधित क़ानून की भाषा स्पष्ट नहीं है, नतीजतन अंतरधार्मिक विवाह करने वालों पर हमेशा तलवार लटकती रहेगी. जमीयत उलेमा-ए-हिंद की गुजरात शाखा ने पिछले महीने एक याचिका में कहा था कि क़ानून की कुछ संशोधित धाराएं असंवैधानिक हैं.

गुजरात: धर्म परिवर्तन रोधी क़ानून के तहत पहला मामला दर्ज, छह आरोपी हिरासत में

गुजरात के वडोदरा शहर के एक थाने आरोपी 26 वर्षीय समीर क़ुरैशी उनके माता-पिता, बहन चाचा और एक अन्य व्यक्ति के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कराई है. पुलिस ने इन्हें हिरासत में ले लिया है. 24 वर्षीय युवती ने आरोप लगाया है कि सोशल मीडिया पर ग़लत पहचान के ज़रिये शादी के नाम पर आरोपी ने उनके साथ कई बार बलात्कार किया और जबरन धर्म परिवर्तन कराया.

गुजरात सरकार जबरन धर्म परिवर्तन के ख़िलाफ़ 15 जून से लागू करेगी विधेयक

गुजरात धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक के अनुसार, शादी करके या किसी की शादी कराके या शादी में मदद करके जबरन धर्मांतरण कराने पर तीन से पांच साल तक की क़ैद की सज़ा सुनाई जा सकती है और दो लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है. भाजपा शासित उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में इसी तरह के क़ानून पहले से ही प्रभावी हैं.

गुजरात: परिवार ने धर्मांतरण कर जबरन शादी की शिकायत की, महिला ने कहा- सहमति से हुआ विवाह

गुजरात के वडोदरा शहर का मामला. महिला के परिवार ने राज्य में हाल ही में पारित धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक, 2021 के तहत जबरन धर्मांतरण का मामला दर्ज करने की मांग की थी, लेकिन महिला ने आरोप से इनकार कर दिया. इसके बाद परिवार को शिकायत वापस लेनी पड़ी.

गुजरात विधानसभा ने जबरन धर्मांतरण कराने के मामले में सज़ा के प्रावधान वाला विधेयक पारित किया

गुजरात विधानसभा ने ‘गुजरात धार्मिक स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक, 2021’ को मंज़ूरी दे दी. इसमें अधिकतम 10 वर्ष की सज़ा का प्रावधान है. विधेयक के अनुसार, शादी करके या किसी की शादी कराके या शादी में मदद करके जबरन धर्मांतरण कराने पर तीन से पांच साल तक की क़ैद की सजा सुनाई जा सकती है और दो लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है.