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हाथरस गैंगरेप और हत्या: पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन को इलाहाबाद हाईकोर्ट का ज़मानत देने से इनकार

5 अक्टूबर 2020 को केरल के पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन और तीन अन्य को हाथरस सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले की रिपोर्टिंग के लिए जाते समय गिरफ़्तार किया गया था. पुलिस का आरोप है कि आरोपी क़ानून-व्यवस्था ख़राब करने के लिए हाथरस जा रहा था. कप्पन पर पीएफआई से जुड़े होने का भी आरोप है.

तीस्ता सीतलवाड़ और श्रीकुमार को ज़मानत नहीं, जज बोले- साज़िश रचकर राज्य को बदनाम किया

अहमदाबाद पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़, गुजरात के दो आईपीएस अधिकारी आरबी श्रीकुमार और संजीव भट्ट के ख़िलाफ़ बीते 25 जून को एक एफआईआर दर्ज की थी. इन पर आरोप है कि इन्होंने 2002 के गुजरात दंगों को लेकर राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ अन्य मंत्रियों, अफसरों और राज्य सरकार को बदनाम करने की साज़िश रची थी.

एल्गार परिषद मामला: हेनी बाबू और तीन अन्य आरोपियों की ज़मानत याचिका ख़ारिज

एनआईए ने कबीर कला मंच के सदस्यों- सागर गोरखे, रमेश गायचोर और ज्योति जगताप की ज़मानत याचिकाओं का भी विरोध किया. वहीं, आरोपियों के वकील ने कहा कि केंद्रीय एजेंसी के पास यह दिखाने के लिए कोई सबूत नहीं है कि उनके मुवक्किलों ने यूएपीए के तहत कोई अपराध किया था जिसके तहत उन पर मामला दर्ज किया गया.

प्रधानमंत्री मोदी से एल्गार परिषद मामले में गिरफ़्तार कार्यकर्ताओं को ज़मानत देने की अपील

इस पत्र में कहा गया कि साइबर हमलों और भीमा-कोरेगांव एल्गार परिषद मामले में साक्ष्यों को प्लांट करने के संबंध में खुलासे को देखते हुए गिरफ़्तार किए गए इन कार्यकर्ताओं को कम से कम ज़मानत दी जानी चाहिए. एल्गार परिषद मामले में अब तक 16 कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों को गिरफ़्तार किया जा चुका है. इनमें से एक फादर स्टेन स्वामी की कोरोना की वजह से हिरासत में ही मौत हो गई थी.

एल्गार परिषद मामला: आठ आरोपियों ने ज़मानत से इनकार के आदेश में सुधार का अदालत से किया अनुरोध

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीते एक दिसंबर को वकील एवं नागरिक अधिकार कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज को तकनीकी ख़ामी के आधार पर ज़मानत दे दी थी और आठ अन्य आरोपियों की इसी आधार पर ज़मानत की अर्जी खारिज़ कर दी थी. आरोपियों ने दावा किया है कि उन्हें ज़मानत से इनकार करने का आदेश ‘तथ्यात्मक त्रुटि’ पर आधारित है.

एल्गार परिषद मामले में आरोपी सुधा भारद्वाज तीन साल बाद जेल से रिहा

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 60 वर्षीय अधिवक्ता और कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज को बीते एक दिसंबर को ज़मानत दे दी थी. भारद्वाज को अगस्त 2018 में पुणे पुलिस द्वारा जनवरी 2018 में भीमा-कोरेगांव में हुई हिंसा और माओवादियों से कथित संबंधों के आरोप में यूएपीए के तहत गिरफ़्तार किया गया था.

सुधा भारद्वाज को ज़मानत: सबसे बड़े लोकतंत्र में क्या राजनीतिक क़ैदियों के अधिकार सुरक्षित हैं?

वीडियो: भीमा-कोरेगांव एल्गार परिषद मामले में साढ़े तीन साल से जेल में बंद वकील सुधा भारद्वाज को बीते दिनों बॉम्बे हाईकोर्ट ने डिफॉल्ट ज़मानत दे दी है. हालांकि, अदालत ने अन्य आठ आरोपियों की ज़मानत अर्ज़ी एक बार फ़िर ख़ारिज कर दी है.

एनआईए कोर्ट ने सुधा भारद्वाज को जेल से रिहा करने की अनुमति दी

राष्ट्रीय जांच एजेंसी की विशेष अदालत द्वारा वकील और कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज को 50 हज़ार रुपये के मुचलके पर रिहाई देते हुए कहा गया कि उन्हें अदालत के न्यायाधिकार क्षेत्र में ही रहना होगा और बिना कोर्ट की अनुमति के मुंबई छोड़कर नहीं जाना होगा. साथ ही उनके मीडिया से बातचीत पर भी रोक लगाई गई है.

सुप्रीम कोर्ट ने सुधा भारद्वाज की ज़मानत के ख़िलाफ़ एनआईए की याचिका ख़ारिज की

शीर्ष अदालत ने कार्यकर्ता और वकील सुधा भारद्वाज की डिफ़ॉल्ट ज़मानत के ख़िलाफ़ एनआईए द्वारा दी गई दलीलों पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिखता.

एल्गार परिषदः एनआईए ने सुधा भारद्वाज को डिफॉल्ट ज़मानत दिए जाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एल्गार परिषद मामले में मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील सुधा भारद्वाज को इस आधार पर ज़मानत दी है कि उनके ख़िलाफ़ निश्चित अवधि में आरोपपत्र दायर नहीं किया गया.

एल्गार परिषद: सुधा भारद्वाज को हाईकोर्ट से ज़मानत मिली, अन्य आठ की याचिका ख़ारिज

सुधा भारद्वाज को निश्चित अवधि में उनके ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर न करने के आधार पर ज़मानत दी गई है. जिन आठ सह-आरोपियों की अपील ख़ारिज हुई है, उनमें सुधीर धवले, वरवरा राव, रोना विल्सन, सुरेंद्र गाडलिंग, शोमा सेन, महेश राउत, वर्नोन गोन्साल्विस और अरुण फरेरा शामिल हैं.

केयूडब्ल्यूजे का आरोप- सिद्दीक़ कप्पन को नहीं मिली मेडिकल सहायता, यूपी सरकार के ख़िलाफ़ याचिका

केरल के पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन और तीन अन्य को पांच अक्टूबर 2020 को हाथरस सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले की रिपोर्टिंग के लिए जाते समय गिरफ़्तार किया गया था. केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अवमानना याचिका में आरोप लगाया गया है कि उचित चिकित्सीय देखभाल की कमी की वजह से कप्पन बीमार हैं और वे गंभीर दर्द से जूझ रहे हैं.

सिद्दीक़ कप्पन की गिरफ़्तारी का एक साल पूरा होने पर पत्रकारों ने की रिहाई की मांग, प्रदर्शन

5 अक्टूबर 2020 को केरल के पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन और तीन अन्य को हाथरस सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले की रिपोर्टिंग के लिए जाते समय गिरफ़्तार किया गया था. कप्पन की तत्काल रिहाई की मांग को लेकर विभिन्न पत्रकार संघों ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के बाहर प्रदर्शन करते हुए कहा कि उन पर लगाए गए आरोप मनमाने हैं.

यूपी पुलिस ने चार्जशीट में कहा- सिद्दीक़ कप्पन अपने लेख में मुस्लिमों को भड़काते हैं

यूपी पुलिस ने पिछले साल अक्टूबर में हाथरस जाने के रास्ते में केरल के पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन समेत चार युवकों को गिरफ़्तार किया था. पुलिस ने कप्पन के लेखों के आधार पर कहा है कि वे ज़िम्मेदार पत्रकार नहीं हैं और माओवादियों के समर्थन में लिखते हैं.

हाथरस मामला: शांतिभंग के लिए गिरफ़्तार अतीक़-उर-रहमान की हालत गंभीर, परिवार ने की रिहाई की मांग

वीडियो: देशद्रोह और यूएपीए के तहत गिरफ़्तार उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर निवासी अतीक़-उर-रहमान की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है. परिवार और उनके वकील का कहना है कि वह दिल की बीमारी से पीड़ित हैं. बार-बार अर्ज़ी देने के बाद भी न तो सुनवाई हो रही न उनका सही इलाज करवाया जा रहा है. द वायर ने अतीकुर्रहमान के वक़ील मधुवन दत्त, भाई और पत्नी से बात की.