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दिल्ली दंगा मामले में दोषी ठहराए गए पहले व्यक्ति को मिली पांच साल जेल की सज़ा

अदालत ने बीते साल छह दिसंबर को दिनेश यादव को 73 वर्षीय मनोरी देवी के घर को दिल्ली दंगों के दौरान 25 फरवरी, 2020 को आग लगाने वाली दंगाई भीड़ का सक्रिय सदस्य होने का दोषी पाया था. अदालत ने दोषी तय करते हुए कहा था कि केवल यह तथ्य कि यादव को शिकायतकर्ता के घर में घुसते या तोड़फोड़ या लूटपाट या आग लगाते नहीं देखा गया था, इसका मतलब यह नहीं है कि वह केवल चुपचाप दर्शक की भांति खड़ा था.

दिल्ली दंगा: हाईकोर्ट ने कहा, व्यक्तिगत स्वतंत्रता सुनिश्चित करना अदालत का संवैधानिक कर्तव्य

2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े हत्या के एक मामले में छह आरोपियों को ज़मानत देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि ज़मानत नियम है और जेल अपवाद. यह सुनिश्चित करना अदालत का संवैधानिक कर्तव्य है कि सरकार द्वारा अतिरिक्त शक्तियों का इस्तेमाल किए जाने की स्थिति में व्यक्तिगत स्वतंत्रता से किसी को मनमाने तरीके से वंचित नहीं किया जाए.

महामारी के बीच जेल में बंद राजनीतिक क़ैदियों की स्थिति बदहाल

वीडियो:  कथित माओवादी लिंक मामले में सज़ा काट रहे प्रोफेसर जीएन साईबाबा हाल ही में कोरोना संक्रमित पाए गए हैं, जिसके बाद उनकी पत्नी ने उनकी रिहाई की मांग की है. दिल्ली दंगों संबंधी मामलों में गिरफ़्तार एक अन्य राजनीतिक क़ैदी ख़ालिद सैफ़ी की पत्नी नरगिस ने भी जेल की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए हैं. उनसे बातचीत.

GN Saibaba PTI

नागपुर जेल में जीएन साईबाबा कोरोना संक्रमित हुए, पत्नी ने अस्पताल भेजने की गुहार लगाई

माओवादी गतिविधियों में कथित संलिप्तता के चलते नागपुर जेल में उम्रक़ैद की सज़ा काट रहे दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर साईबाबा दूसरी बार कोरोना पॉज़िटिव पाए गए हैं.

अदालत ने ज़मानत पर चल रहीं सुधा भारद्वाज को मुंबई के बजाय ठाणे में रहने की अनुमति दी

एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में क़रीब तीन साल बाद ज़मानत पर रिहा हुईं, अधिवक्ता और कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज ने अर्ज़ी देकर ठाणे स्थित मित्र के घर में रहने की अनुमति मांगी थी और कहा था कि मुंबई में घर पाना महंगा है. अदालत ने इसे स्वीकार करते हुए उन्हें हर हफ़्ते ठाणे के वर्तक नगर पुलिस थाने में हाज़िरी देने का निर्देश दिया है.

भाजपा ने त्रिपुरा हिंसा को कम करके दिखाया, ‘स्वाभाविक’ प्रतिक्रिया कहकर सही ठहराया: रिपोर्ट

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया द्वारा गठित फैक्ट फाइंडिंग टीम ने त्रिपुरा पुलिस और प्रशासन पर हिंसा से निपटने में ‘ईमानदारी की कमी’ प्रदर्शित करने का आरोप लगाया है. टीम की रिपोर्ट में कहा गया कि यह दिखाने के लिए बड़ी कॉन्सपिरेसी थ्योरी तैयार की गई कि सांप्रदायिक हिंसा को उजागर करने वाली स्वतंत्र पत्रकारिता एक चुनी गई सरकार को ‘राज्य के दुश्मनों द्वारा कमज़ोर करने’ का एक प्रयास है.

विशेष अदालतों में यूएपीए के मामलों की सुनवाई में तेज़ी लाना महत्वपूर्ण: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट एक आरोपी की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने कहा है कि वह आठ साल से हिरासत में हैं और मामले में आरोप तय किए जाने बाकी हैं. मामले में सुनवाई में देरी हुई है, क्योंकि केवल दो नामित एनआईए अदालतें हैं, जो ग़ैर-एनआईए मामलों के साथ ज़मानत मामले, अन्य आईपीसी अपराध और मकोका मामलों की सुनवाई भी कर रही हैं.

अधिकार कार्यकर्ता रोना विल्सन के आईफोन में पेगासस स्पायवेयर डाला गया था: फॉरेंसिक रिपोर्ट

अमेरिका के मैसाचुसेट्स स्थित डिजिटल फॉरेंसिक्स कंपनी आर्सेनल कंसल्टिंग की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, एल्गार परिषद मामले में गिरफ़्तार क़ैदियों के अधिकार कार्यकर्ता रोना विल्सन के फोन को कई बार सफलतापूर्वक हैक किया गया था.

जामिया हिंसा मामले में जेएनयू छात्र शरजील इमाम को ज़मानत मिली

दिल्ली की एक अदालत ने दिसंबर 2019 में जामिया मिलिया इस्लामिया में हुई हिंसा से संबंधित मामले में शरजील इमाम को ज़मानत देते हुए कहा कि अपराध की प्रकृति और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए उनका आवेदन को मंज़ूर किया जाता है कि उन्हें जांच के दौरान गिरफ़्तार नहीं किया गया था.

राजद्रोह मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने शरजील इमाम की ज़मानत याचिका पर पुलिस से जवाब मांगा

सीएए-एनआरसी के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों में जामिया और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में कथित भड़काऊ भाषण देने के आरोप में यूएपीए के तहत गिरफ़्तार जेएनयू छात्र शरजील इमाम ने उनकी ज़मानत याचिका खारिज़ करने को चुनौती दी है. उनका कहना है कि उनके सभी सह आरोपियों को इस मामले में ज़मानत मिल चुकी है लेकिन वे अब भी बीते 20 महीने से जेल में हैं.

राजद्रोह मामलाः इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शरजील इमाम को ज़मानत दी

जेएनयू छात्र शरजील इमाम को सीएए-एनआरसी के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों में जामिया और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में कथित भड़काऊ भाषण देने के आरोप में यूएपीए के तहत गिरफ़्तार किया था. इससे पहले अक्टूबर में दिल्ली की अदालत ने इमाम को उनके इसी भाषण के लिए ज़मानत देने से इनकार कर दिया था.

ज़मानत देने के लिए कठिन शर्तें लगाना ज़मानत से इनकार करने के समान: सुप्रीम कोर्ट

शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी उड़ीसा उच्च न्यायालय के उस आदेश को ख़ारिज करते हुए की जिसमें धोखाधड़ी के मामले में ज़मानत की मांग करने वाले एक व्यक्ति के आवेदन को अनुमति देते हुए 20 लाख रुपये की नकद ज़मानत राशि और 20 लाख रुपये की अचल संपत्ति की शर्त लगाई गई थी.

त्रिपुरा में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं की कवरेज को लेकर गिरफ़्तार महिला पत्रकारों को ज़मानत

त्रिपुरा में हो रही हिंसा के संबंध में मस्जिदों पर हमले और तोड़फोड़ के मामलों को कवर कर रहीं एचडब्ल्यू न्यूज़ नेटवर्क की इन दो महिला पत्रकारों के ख़िलाफ़ एक स्थानीय विहिप नेता की शिकायत पर राज्य के कुमारघाट थाने में एफ़आईआर दर्ज की गई है. शिकायत में दावा किया गया है कि मुस्लिम समुदाय के लोगों से मिलने के दौरान पत्रकारों ने हिंदू समुदाय और त्रिपुरा सरकार के ख़िलाफ़ भड़काऊ बातें कही थीं.

अग्रिम ज़मानत देने से पहले अदालत को अपराध की गंभीरता देखनी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा हत्या के दो आरोपियों को दी गई अग्रिम ज़मानत के आदेश को रद्द करते हुए की. शीर्ष अदालत ने कहा कि अपराध गंभीर प्रकृति का है, जिसमें एक व्यक्ति की हत्या की गई. प्राथमिकी और बयान संकेत देते हैं कि आरोपी की अपराध में विशेष भूमिका है.

दिल्ली दंगे पलभर में नहीं हुए, पूर्व नियोजित साज़िश थी: हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से कहा गया कि फ़रवरी 2020 में देश की राष्ट्रीय राजधानी को हिला देने वाले दंगे स्पष्ट रूप से पल भर में नहीं हुए और वीडियो फुटेज में मौजूद प्रदर्शनकारियों के आचरण से यह स्पष्ट रूप से पता चलता है. यह सरकार के कामकाज को अस्त-व्यस्त करने के साथ-साथ शहर में लोगों के सामान्य जीवन को बाधित करने के लिए सोचा-समझा प्रयास था.