Covid-19 Pandemic

कैलाश सत्यार्थी. (फोटो: रॉयटर्स)

स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार बनाने से मज़बूत होगा स्वास्थ्य सेवा का पूरा तंत्र: कैलाश सत्यार्थी

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी ने कहा है कि कोरोना महामारी के दौरान हमारी स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्गति उजागर हो गई. ग़रीब, वंचित और आम आदमी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल पाएं, इसके लिए स्वास्थ्य तंत्र को मज़बूत बनाना होगा. इसी नाते सरकार से मांग की है कि स्वास्थ्य को संवैधानिक अधिकार का दर्जा दिया जाए. यह समय की ज़रूरत है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

साल 2020 में रेल की पटरियों पर हुई मौतों का कारण अतिक्रमण: रेलवे

हाल ही में आरटीआई आवेदन के जवाब में रेलवे ने बताया था कि साल 2020 में रेल की पटरियों पर 8,733 लोगों की मौत हो गई, जिनमें से अधिकतर प्रवासी मज़दूर थे. रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष सुनीत शर्मा ने कहा है कि ये मौतें अतिक्रमण के कारण हुई हैं न कि रेल हादसों की वजह से. इनका रेलवे से कुछ लेना-देना नहीं है.

(फोटोः पीटीआई)

साल 2020 में 8,000 से अधिक लोगों की रेल पटरियों पर जान गई, इनमें ज़्यादातर प्रवासी मज़दूर थे: आरटीआई

आरटीआई आवेदन के जवाब में दी गई जानकारी में अधिकारियों ने बताया कि मृतकों में अधिकतर प्रवासी मज़दूर थे, जिन्होंने पटरियों पर चलकर घर पहुंचने का विकल्प चुना था, क्योंकि इससे वे लॉकडाउन नियमों के उल्लंघन के लिए पुलिस से बच सकते थे और उनका यह भी मानना था कि वे रास्ता नहीं भटकेंगे.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

कोरोना महामारी की दूसरी लहर से एक करोड़ लोग हुए बेरोज़गार: सीएमआईई

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के आकलन के अनुसार, बेरोज़गारी दर मई में 12 प्रतिशत रही, जो अप्रैल में 8 प्रतिशत थी. यानी इस दौरान क़रीब एक करोड़ भारतीयों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है. इसका मुख्य कारण कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर है.

भोपाल का एक शवदाह गृह. (फोटो: पीटीआई)

भोपाल: मृतकों का अधिकारिक आंकड़ा 104, लेकिन 2,557 लोगों के अंतिम संस्कार कोविड प्रोटोकॉल से हुए

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित दो श्मशान घाटों और एक क़ब्रिस्तान के रिकॉर्ड के अनुसार, एक अप्रैल से 30 अप्रैल तक कुल 3,811 लोगों का अंतिम संस्कार किया गया, जिनमें से 2,557 शवों को अंतिम संस्कार कोविड प्रोटोकॉल के मुताबिक किया गया. इस पर मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि प्रदेश में कोविड से हुईं मौतों को छिपाया नहीं जा रहा है.

Gandhinagar: Congress General Secretary Priyanka Gandhi Vadra addresses a public meeting ahead of Lok Sabha elections, in Gandhinagar, Tuesday, March 12, 2019. (PTI Photo) (PTI3_12_2019_000096B)

उत्तर प्रदेश सरकार कोरोना वायरस के आंकड़े छुपा रही है: प्रियंका गांधी

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि कोरोना वायरस नियंत्रण को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की कोई व्यवस्था और योजना ही नहीं दिख रही है. आज स्थिति यह हो गई है कि राजधानी लखनऊ में लाशों की कतार लग गई हैं. प्रदेश का आम आदमी अपने परिजन का अंतिम संस्कार भी सम्मानित तरीके से करने में लाचार है. सुबह से देर रात तक शवदाह गृहों और क़ब्रिस्तानों में लोग अपने मृत प्रियजनों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

कोविड-19: भोपाल में सोशल मीडिया पर झूठी ख़बरें एवं संदेश फैलाने वालों के ख़िलाफ़ होगी कार्रवाई

मध्य प्रदेश में बुधवार को कोविड-19 संक्रमण के 9,720 मामले सामने आए और 51 लोगों की मौत हो गई. जो एक दिन का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. इसके साथ ही प्रदेश में इस वायरस से अब तक संक्रमित पाए गए लोगों की कुल संख्या 363,352 तक पहुंच गई.

(प्रतीकात्मक फोटो :रॉयटर्स)

विश्व में कुल बाल वधुओं में से आधी भारत सहित पांच देशों में: यूनिसेफ

संयुक्त राष्ट्र एजेंसी यूनिसेफ के रिपोर्ट के मुताबिक, दशक के अंत से पहले एक करोड़ अतिरिक्त बाल विवाह हो सकते हैं. इससे इस प्रथा को कम करने की वर्षों की प्रगति को ख़तरा उत्पन्न हो सकता है. दुनिया में आज अनुमानित 65 करोड़ लड़कियों और महिलाओं का विवाह बचपन में हुआ है. इनमें से आधी संख्या बांग्लादेश, ब्राज़ील, इथियोपिया, भारत और नाइज़ीरिया में है.

दिल्ली के सराय रोहिल्ला रेलवे स्टेशन के पास बसी एक बस्ती. (फोटो: पीटीआई)

आम बजट ने लफ़्फ़ाज़ी के अलावा शहरी ग़रीबों को कुछ नहीं दिया

वैश्विक महामारी दौर में केंद्रीय बजट के बाद शहरों के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण था जिसमें शब्दों के परे ऐतिहासिक करने का अवसर था. शहरी ग़रीबों को लगा था कि यह बजट उनका होगा, लेकिन कुछ घोषणाओं व शब्दों के खेल के अलावा बजट में महत्वपूर्ण रूप से उनकी बात नहीं हो पाई.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

साल के मध्य तक आठ करोड़ से ज्यादा लोग हुए विस्थापित, कोविड-19 से स्थिति हुई गंभीर: यूएनएचसीआर

शरणार्थियों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी ने कहा कि पहले से चल रहे और हालिया संघर्ष की स्थिति तथा कोरोना महामारी के कारण 2020 में लोगों के जीवन पर बेहद गंभीर प्रभाव पड़ा. विस्थापन के लिए मजबूर हुए 7.95 करोड़ लोगों में 3.4 करोड़ बच्चे थे.

(फोटो: पीटीआई)

महामारी के कारण 2030 तक एक अरब से ज़्यादा लोग घोर ग़रीबी की ओर जा सकते हैं: संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के अध्ययन में कहा गया है कि कोविड-19 के प्रभावों से उबरने की प्रक्रिया काफी लंबे समय तक चलेगी. कोविड-19 एक अहम पड़ाव है और विश्व के नेता अभी जो निर्णय लेंगे, उससे विश्व की दिशा बदल सकता है.

दिल्ली के सराय रोहिल्ला रेलवे स्टेशन के पास बसी एक बस्ती. (फोटो: पीटीआई)

केंद्र ने अदालत से कहा, रेल लाइन के साथ बसी झुग्गियों पर फिलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी

बीते 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में दिल्ली में लगभग 140 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक के आसपास में फैली क़रीब 48,000 झुग्गी-झोपड़ियों को तीन महीने के भीतर हटाने का आदेश दिया था.

अश्वीन कुमार, (फोटो: पीटीआई)

पूर्व सीबीआई निदेशक अश्वनी कुमार शिमला स्थित घर में मृत पाए गए

1973 बैच के 69 वर्षीय आईपीएस अधिकारी अश्वनी कुमार नगालैंड के राज्यपाल और हिमाचल प्रदेश पुलिस के पूर्व प्रमुख भी रहे थे. बुधवार को शिमला के पास उनके घर में उनका शव फंदे से लटकता मिला. पुलिस ने बताया कि उन्हें एक सुसाइड नोट मिला है जिस पर लिखा है कि वह एक नई यात्रा पर जा रहे हैं.

(फोटो: पीटीआई)

खाद्य सुरक्षा क़ानून के तहत विशेष रूप से सक्षम लोगों को भी कम दाम में अनाज मिलना चाहिए: कोर्ट

एक जनहित याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की गई थी कि कोविड-19 महामारी के दौर में विभिन्न खाद्य सुरक्षा तथा ग़रीबी उन्मूलन योजनाओं का लाभ विशेष रूप से सक्षम लोगों को भी दिया जाना चाहिए.

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़. (फोटो साभार: यूट्यूब ग्रैब/Increasing Diversity by Increasing Access)

कोरोना संकट हाशिये के लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा की ज़रूरत को दर्शाता है: जस्टिस चंद्रचूड़

सुप्रीम कोर्ट के जज डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि इन लोगों ने पिछले 70 सालों से इंतज़ार किया है. अब इन्हें और इंतज़ार करने के लिए नहीं कहा जा सकता है. हाशिये पर पड़े लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा और सार्वजनिक अधिकार सुनिश्चित करने की ज़रूरत है.