Democracy

बोस शर्मिंदा होते कि उनका इस्तेमाल गांधी, नेहरू को कमतर दिखाने के लिए हो रहा है: रामचंद्र गुहा

‘इंडिया आफ्टर गांधी’ के तीसरे संस्करण के विमोचन के अवसर पर इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने कहा कि उन्हें हैरानी है कि भाजपा साथ मिलकर काम करने वाले महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल को कैसे एक-दूसरे का प्रतिद्वंद्वी दर्शाने में कामयाब रही है.

जम्मू कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल होनी चाहिए: राहुल गांधी

श्रीनगर में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के समापन से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष में मतभेद ज़रूर हैं, लेकिन वह भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खिलाफ एक साथ खड़ा होगा और लड़ेगा.

भारत जोड़ो यात्रा ने प्रभावी तरीके से ‘पप्पू’ छवि को ध्वस्त किया है

भारत जोड़ो यात्रा के बाद कांग्रेस साथ आकर पूरे जी-जान से चुनाव लड़ सकेगी, यह सवाल अब भी बाकी है, मगर जिस बात को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है, वह यह है कि राहुल गांधी ने ऐसे समय में जब देश में ध्रुवीकरण बढ़ रहा है, एक वैकल्पिक विचार पेश किया- कि देश को एक बार फिर साथ जोड़ने की ज़रूरत है.

कॉलेजियम की सिफ़ारिशों पर केंद्र का फैसला न लेना लोकतंत्र के लिए घातक: पूर्व जज

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन ने क़ानून मंत्री किरेन रिजिजू की कॉलेजियम पर सार्वजनिक टिप्पणियों को निंदनीय बताते हुए कहा कि अदालत के फैसले स्वीकार करना उनका कर्तव्य है. उन्होंने जोड़ा कि अगर यह गढ़ (न्यायपालिका) भी गिर जाता है तो हम अंधकार युग के गर्त में चले जाएंगे.

न्यायपालिका को प्रधानमंत्री कार्यालय का हिस्सा बनाने की कोशिश की जा रही है: कांग्रेस

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर  निशाना साधते हुए कहा कि संविधान की अनदेखी की जा रही है, संवैधानिक निकायों को कमज़ोर किया जा रहा है और न्यायपालिका को नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है.

हर व्यक्ति स्वतंत्र है, हमें एक दूसरे की स्वतंत्रता का सम्मान और रक्षा करनी चाहिए: मोहन भागवत

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने गणतंत्र दिवस समारोह में कहा कि बाबा साहेब ने कहा था कि देश आपस में लड़कर ग़ुलाम हो गया, किसी दुश्मन के सामर्थ्य के कारण नहीं. हम आपस में लड़ते रहे, इसलिए गुलाम हुए.. हमारा बंधुवाद समाप्त हो गया. स्वतंत्रता और समता एक साथ लानी है तो बंधुभाव लाना चाहिए.

संविधान केवल दस्तावेज़ नहीं है बल्कि जीवन जीने का एक माध्यम है

जब संविधान के ‘बुनियादी ढांचे के सिद्धांत’ पर विवाद छिड़ा हुआ है, तो ऐसे में ज़रूरी मालूम होता है कि इसकी मूल भावना और उसके उद्देश्य को आम लोगों तक ले जाया जाए क्योंकि जब तक ‘गण’ हमारे संविधान को नहीं समझेगा हमारा लोकतंत्र सिर्फ एक ‘तंत्र’ बनकर रह जाएगा.

नागरिकों को विरोध करने की अनुमति देने संबंधी पुलिस नियम जानने का अधिकार: गुजरात हाईकोर्ट

एक याचिकाकर्ता ने दिसंबर 2019 में सीएए के ख़िलाफ़ प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी, जिससे गुजरात पुलिस ने इनकार कर दिया. तब उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत उन नियमों को प्रकाशित करने के लिए कहा, जो पुलिस को प्रदर्शन या रैलियां करने की अनुमति देने या अस्वीकार करने का अधिकार देते हैं. हालांकि उनके आवेदन को गुजरात पुलिस द्वारा ख़ारिज कर दिया गया था.

भारत जोड़ो यात्रा में न कोई चुनाव परिणाम खोजें और न ही कांग्रेस का पुनरुत्थान

भारत जोड़ो यात्रा एक ऐसी कोशिश है, जिसका प्रभाव निकट भविष्य पर पड़ेगा या नहीं, और पड़ेगा तो कितना, यह कहना मुश्किल है. इसे सिर्फ़ चुनावी नतीजों से जोड़कर देखना भूल है. इससे देश में बातचीत का एक नया सिलसिला शुरू हुआ है जो अब तक के घृणा, हिंसा और इंसानियत में दरार डालने वाले माहौल के विपरीत है.

जम्मू कश्मीर में निवेश को लेकर गृह मंत्रालय की रिपोर्ट लोकसभा में दिए गए आंकड़े से अलग

गृह मंत्रालय ने 2022 की अपनी समीक्षा रिपोर्ट में कहा है कि बीते तीन सालों में मोदी सरकार के नेतृत्व में जम्मू कश्मीर में 56,000 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, लेकिन इससे पहले दिसंबर में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में समान अवधि में 1,084 करोड़ रुपये का निवेश होने की बात कही थी.

New Delhi: A view of the Supreme Court, in New Delhi, on Thursday. (PTI Photo / Vijay Verma)(PTI5_17_2018_000040B)

मंत्रियों के बयानों के लिए सरकार को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट, एक जज असहमत

मंत्रियों और उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार पर प्रतिबंध से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 4:1 के बहुमत से यह फैसला सुनाया है. हालांकि जस्टिस बीवी नागरत्ना ने इससे असहमति जताते हुए कहा कि अगर कोई मंत्री अपनी आधिकारिक क्षमता में अपमानजनक बयान देता है तो इसके लिए सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है.

नया साल: चिंता, चुनौती, आशा

नए साल में असल चिंता का विषय है, भारत में ऐसे हिंदू दिमाग़ का निर्माण जो श्रेष्ठतावाद के नशे में चूर है. मुसलमान मित्रविहीन अवस्था में है. चंद बुद्धिजीवी ही उसके साथ हैं. कश्मीर में मुसलमानों को अधिकार से वंचित किया जा रहा है. असम में उसे कोने में धकेला जा रहा है और पूरे देश में क़ानूनों और ग़ुंडों के गठजोड़ के ज़रिये उसे प्रताड़ित किया जा रहा है.

बुनियादी अधिकार अब ‘लक्ज़री’ बन गए हैं, उन्हें मिलते हैं जो सरकार के रुख़ को मानते हैं: मुफ़्ती

जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने प्रधान न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को लिखे एक पत्र में आरोप लगाया कि 2019 के बाद से जम्मू कश्मीर के प्रत्येक निवासी के मौलिक अधिकारों को मनमाने ढंग से निलंबित कर दिया गया है और विलय के समय दी गई संवैधानिक गारंटी को अचानक असंवैधानिक रूप से निरस्त कर दिया गया.

न्यायपालिका की स्वतंत्रता छीनने का कोई भी प्रयास लोकतंत्र पर हमला होगा: जस्टिस लोकुर

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मदन बी. लोकुर ने न्यायपालिका के साथ सरकार के बढ़ते टकराव पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान की मूल संरचना का हिस्सा और लोकतंत्र का आधार है. सरकार क़ानून या संवैधानिक संशोधन के माध्यम से इसे किसी भी तरह वापस नहीं ले सकती है.

पत्रकार का अपनी स्वतंत्रता खोना, जज द्वारा अपनी स्वतंत्रता खोने जितना बुरा: जस्टिस श्रीकृष्णा

1992-93 के मुंबई दंगों के कारणों की जांच करने वाले आयोग के अध्यक्ष रहे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बीएन श्रीकृष्णा ने एक समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि दो पेशों को निश्चित रूप से स्वतंत्र होना चाहिए, एक न्यायाधीश का और दूसरा पत्रकार का. अगर उन्हें रोका जाएगा तो लोकतंत्र को नुकसान होगा.