GST

देश में हर घंटे आत्महत्या कर रहा है एक किसान, केंद्र सरकार ज़िम्मेदार: कांग्रेस

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि केंद्र सरकार ने 2022 में किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, लेकिन अब वह सुप्रीम कोर्ट के समक्ष बहस कर रही है कि किसानों को लागत के 50 प्रतिशत से अधिक एमएसपी की पेशकश बाजारों को विकृत कर देगी.

देश को बांटना बंद करें, विभाजनकारी गतिविधियों पर रोक का प्रयास करे सरकार: गोदरेज अध्यक्ष

गोदरेज इंडस्ट्रीज के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक नादिर गोदरेज ने कहा, ‘मुझे लगता है कि देश को बांटना बंद कर इसे एकजुट करने की कोशिश करनी चाहिए. मुझे भरोसा है कि सरकार भी आर्थिक वृद्धि के लिए इसे ज़रूरी मानती है, हमें इस पर ध्यान देना चाहिए.’

संसद में महंगाई पर बहस: विपक्ष और वित्त मंत्री सेब की तुलना संतरे से कर रहे हैं

संगठित क्षेत्र के प्रदर्शन के आधार पर अर्थव्यवस्था के सार्वभौमिक और व्यापक पुनरुद्धार का दावा करना बेहद भ्रामक है.

संसद निष्क्रिय हो गई है, लोकतंत्र सांस लेने के लिए संघर्ष कर रहा है: पी. चिदंबरम

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने एक साक्षात्कार में कहा कि संस्थानों को नियंत्रित, कमज़ोर किया जा रहा है या उन पर कब्ज़ा कर लिया गया है. भले ही हमारे पास लोकतंत्र का कवच है, लेकिन भीतर से यह कवच खोखला हो चुका है.

25 किलो से कम वज़नी पैकेटबंद आटा, दाल और अनाज महंगे हुए, केंद्र ने 5 प्रतिशत जीएसटी लगाया

केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने अनाज से लेकर दालों और दही से लेकर लस्सी तक खाद्य पदार्थों पर जीएसटी लगाए जाने से संबंधित बार-बार पूछे जाने वाले सवालों पर स्पष्टीकरण जारी किया है. इसमें कहा गया है कि जीएसटी उन उत्पादों पर लगेगा जिनकी आपूर्ति पैकेटबंद सामग्री के रूप में की जा रही है और इन पैकेटबंद सामान का वज़न 25 किलोग्राम से कम होना चाहिए. इससे पहले केवल ब्रांडेड अनाज-दालें ही जीएसटी के दायरे में आती थीं.

जीएसटी के पांच साल: इस जटिल कर व्यवस्था को और आसान बनाने की ज़रूरत है

पिछले पांच वर्षों में जीएसटी क़ानून निश्चित रूप से बदलाव हुए हैं और समय-समय पर संशोधनों के ज़रिये करदाताओं के सामने आने वाले कई मुद्दे स्पष्ट हुए हैं. लेकिन अब भी कई ऐसे मसले बाक़ी हैं जो जीएसटी व्यवस्था के अमल को प्रभावित करते हैं.

मोदी सरकार के आठ साल बाद देश में बेरोज़गारी का हाल कुछ ख़ास बदला नहीं है

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के अनुसार, मई में भारत की बेरोज़गारी दर 7.1% रही. आंकड़े मूल रूप से दावा करते हैं कि सही प्रकार की नौकरियां न मिलने से निराश होकर कामकाजी उम्र के 90 करोड़ भारतीयों में से आधों, विशेष रूप से महिलाओं, ने रोज़गार की तलाश करना ही बंद कर दिया है.

मार्च में सरकार को जीएसटी संग्रह के रूप में रिकॉर्ड 1.42 लाख करोड़ रुपये मिले

माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह मार्च में सालाना आधार पर 15 प्रतिशत अधिक है. रिकॉर्ड संग्रह के साथ यह संशोधित बजट लक्ष्य को पार कर गया है. केंद्र ने 2021-22 के लिए 5.70 लाख करोड़ रुपये जीएसटी संग्रह का संशोधित बजट लक्ष्य रखा था. इससे पहले जनवरी 2022 में जीएसटी संग्रह रिकॉर्ड 1.40 लाख करोड़ रुपये था.

तंगी के लिए कथित तौर पर प्रधानमंत्री को ज़िम्मेदार ठहराकर दंपति ने ज़हर खाया, पत्नी की मौत

उत्तर प्रदेश के बागपत ज़िले के बड़ौत का मामला है. आर्थिक तंगी से जूझ रहे एक जूता व्यापारी और उनकी पत्नी ने इसके लिए कथित तौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज़िम्मेदार बताते हुए फेसबुक लाइव के दौरान ज़हर खा लिया. व्यापारी ने वीडियो में आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री छोटे व्यापारियों और किसानों के हितैषी नहीं हैं.

भारत में लॉकडाउन ने छोटे व्यवसायों को भारी नुकसान पहुंचाया: सरकारी अध्ययन

लोकसभा में एक सवाल के जवाब में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री नारायण राणे ने बताया कि उनके मंत्रालय द्वारा कराए गए एक अध्ययन में सामने आया है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान 67 फीसदी एमएसएमई तीन महीने से अस्थायी तौर पर बंद थे और 50 फीसदी से अधिक इकाइयों ने अपने राजस्व में 25 फीसदी से अधिक की गिरावट का सामना किया.

नगालैंड: राजनीतिक समूहों और सरकारी एजेंसियों द्वारा कथित अवैध करों को लेकर 12 घंटे का बंद

कन्फेडेरेशन ऑफ नगालैंड चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने नगा राजनीतिक समूहों द्वारा कई कर लगाने की समस्या को तत्काल हल करने और जीएसटी के तहत आने वाले सामान पर नगर निकाय द्वारा लिए जाने वाले सभी तरह के करों को हटाने को लेकर नौ सितंबर को मुख्यमंत्री को प्रतिवेदन दिया था, जिस पर राज्य सरकार का संतोषजनक जवाब न आने के विरोध में बंद का आह्वान किया गया है.

क्या श्रमिकों का फैक्ट्रियों से खेतों में बड़ी संख्या में पलायन ‘विकास’ की गाड़ी का उल्टी दिशा में जाना है

सतत आर्थिक विकास के किसी भी दौर के साथ-साथ ग़रीबी में कमी आती है और श्रमबल कृषि से उद्योगों और सेवा क्षेत्रों की तरफ गतिशील होता है. हालिया आंकड़े दिखाते हैं कि देश में एक साल में क़रीब 1.3 करोड़ श्रमिक ऐसे क्षेत्रों से निकलकर खेती से जुड़े हैं. वैश्विक महामारी एक कारण हो सकता है, लेकिन मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों ने इसकी ज़मीन पहले ही तैयार कर दी थी.

मांग में वृद्धि की वजह से नहीं केंद्र की ग़लत नीतियों और कुप्रबंधन से बढ़ी महंगाई: पी. चिदंबरम

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिंदबरम ने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि व्यापक संकट की ऐसी स्थिति में बढ़ती महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ दी है और इसके लिए नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ज़िम्मेदार है. अगर सरकार यह ढोंग करती रही कि महंगाई नहीं है तो यह मुद्दा ज्यों का त्यों बना रहेगा.

परिवार के ऊपर क़र्ज़ 2020-21 में उछलकर जीडीपी का 37.3 प्रतिशत पहुंचा: एसबीआई रिपोर्ट

एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि महामारी की दूसरी लहर के कारण क़र्ज़ का यह अनुपात चालू वित्त वर्ष में और बढ़ सकता है. परिवारिक क़र्ज़ का स्तर जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से बढ़ रहा है. इससे पहले नवंबर 2016 में नोटबंदी लागू की गई थी. परिवार पर बढ़ता क़र्ज़ का मतलब है कि उनकी वित्तीय बचत दर, खपत और स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ने के कारण कम हुई है.

देश को पीछे धकेल दिया गया है, अर्थव्यवस्था और सामाजिक सद्भाव बर्बाद हो गए हैं: लालू यादव

बीते अप्रैल महीने में चारा घोटाले से संबंधित मामलों में ज़मानत पर रिहा होने के बाद राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने पार्टी की रजत जयंती के अवसर पर तीन साल में ​पहली बार किसी सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित किया. केंद्र पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अयोध्या के बाद कुछ लोग मथुरा की बात कर रहे हैं. ये लोग देश को तोड़ना चाहते हैं, लेकिन हम पीछे हटने वाले लोग नहीं हैं.