Hindi Cinema

अभिनेता मिथिलेश चतुर्वेदी का निधन

‘गदर: एक प्रेम कथा’, ‘कोई मिल गया’ और ‘रेडी’ फिल्म जैसी फिल्मों में काम कर चुके मिथिलेश चतुर्वेदी को 10 दिन पहले दिल का दौरा पड़ने के कारण मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

आमिर ख़ान ने अपनी फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ के बहिष्कार पर कहा, उन्हें देश से प्यार है

फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ का बहिष्कार करने का आह्वान करते हुए ट्विटर पर किए गए कई पोस्ट में 2015 के एक विवाद को याद दिलाया गया है. उस वक़्त आमिर ख़ान ने कहा था कि वह भारत में ‘असहिष्णुता’ बढ़ने की कई घटनाओं के चलते सतर्क हो गए हैं और उनकी तत्कालीन पत्नी किरण राव ने सुझाव दिया था कि उन्हें संभवत: देश छोड़ देना चाहिए.

‘घोड़े को जलेबी खिलाने ले जा रिया हूं’ फिल्म की टीम के साथ ख़ास बातचीत

वीडियो: हाल ही में आई फिल्म ‘घोड़े को जलेबी खिलाने ले जा रिया हूं’ में आज की दिल्ली के दिल में कहीं छिपे-बसे शाहजहांनाबाद को दिखाने की कोशिश की गई है. फिल्म की निर्माता-निर्देशक अनामिका हक्सर, एडिटर परेश कामदार, संवाद लेखक एवं अभिनेता लोकेश जैन और अभिनेता रविंद्र साहू से बातचीत.

Tezpur: Bollywood actor Naseeruddin Shah perform during Kartik Hazarika National Theatre Festival, in Tezpur, Thursday, Jan 10, 2019. (PTI Photo) (PTI1_10_2019_000133B)

मु​स्लिमों के ख़िलाफ़ नफ़रत रोकने के लिए नसीरुद्दीन शाह ने प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया

अभिनेता शाहरुख़, सलमान और आमिर ख़ान की राजनीतिक मुद्दों पर चुप्पी को लेकर अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने कहा, ‘मैं उनके लिए नहीं बोल सकता. मुझे लगता है कि उन्हें लगता है कि वे बहुत अधिक जोख़िम उठा रहे होंगे, लेकिन फ़िर मुझे नहीं पता कि वे इसके बारे में अपनी अंतरात्मा को कैसे समझाते हैं. मुझे लगता है कि वे ऐसी स्थिति में हैं, जहां उनके पास खोने के लिए बहुत कुछ है.’

फिल्म ‘रनवे 34’ में पायलटों के पेशे का चित्रण वास्तविकता से परे है: भारतीय पायलट संघ

भारतीय पायलट संघ ने अजय देवगन की हाल में रिलीज़ हुई फिल्म ‘रनवे 34’ का विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि फिल्म में पायलटों के पेशे का चित्रण वास्तविकता से परे है और इससे हवाई सफर करने वाले यात्रियों के मन में आशंकाएं पैदा हो सकती हैं. फिल्म में पायलटों को ग़ैर-ज़िम्मेदाराना व्यवहार करते तथा कॉकपिट में धूम्रपान करते हुए दिखाया गया है.

अभिनेता सलीम ग़ौस का निधन

सलीम ग़ौस ने अपने अभिनय की शुरुआत 1978 में फिल्म स्वर्ग नरक से की थी, जिसके बाद उन्होंने चक्र, सारांश, मोहन जोशी हाज़िर हो जैसी कई अन्य फिल्मों में अभिनय किया था. उन्होंने श्याम बेनेगल की टीवी सीरीज़ भारत एक खोज में राम, कृष्ण और टीपू सुल्तान की भूमिकाएं निभाई थीं. साथ वह दूरदर्शन के प्रसिद्ध धारावाहिक वागले की दुनिया का भी हिस्सा थे.

हिंदी को लेकर जारी फिल्मी हस्तियों की बहस के बीच दो पूर्व सीएम बोले, यह राष्ट्रभाषा नहीं

बीते दिनों कन्नड अभिनेता किचा सुदीप द्वारा हिंदी को राष्ट्रभाषा कहने के संबंध में एक बयान दिया था, जिस पर बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन ने पटलवार करते हुए कहा था कि हिंदी हमारी मातृभाषा और राष्ट्रीय भाषा थी, है और हमेशा रहेगी. हिंदी फिल्मों की तुलना में दक्षिण की ‘केजीएफ चैप्टर 2’ और ‘आरआरआर’ जैसी फिल्मों की सफलता ने हिंदी बनाम अन्य की बहस को फिर से तेज़ कर दिया है.

चिरंजीवी ने कहा, जब हिंदी सिनेमा को ही भारतीय सिनेमा बताया गया तो उन्हें अपमानित महसूस हुआ था

साल 1989 का एक वाकया सुनाते हुए तेलुगू अभिनेता चिरंजीवी ने बताया कि उनकी फिल्म ‘रुद्रवीणी’ को नरगिस दत्त सम्मान देने के लिए दिल्ली बुलाया गया था. उन्होंने कहा कि इससे पहले हुए एक कार्यक्रम के दौरान भारतीय सिनेमा के इतिहास को चित्रित करने वाली एक दीवार पर हिंदी सिनेमा की जानकारी भरी हुई थी, लेकिन दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग के बारे में बहुत ही कम जानकारी दी गई थी.

हिंदी सिनेमा तमिल-तेलुगू में फिल्में डब कर रहा है, लेकिन सफलता दर कम है: दक्षिण भारतीय अभिनेता

हिंदी फिल्मों की तुलना में दक्षिण भारतीय फिल्मों को मिली जबरदस्त सफलता के संदर्भ में कन्नड अभिनेता किचा सुदीप ने कहा है कि आज हम ऐसी फिल्में बना रहे हैं, जो वैश्विक स्तर पर नाम कमा रही हैं. उनका बयान ऐसे समय आया है, जब हाल में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि सरकार चलाने का माध्यम राजभाषा है और इससे निश्चित रूप से हिंदी का महत्व बढ़ेगा. समय आ गया है कि राजभाषा को देश की एकता का महत्वपूर्ण अंग बनाया जाए.

द कश्मीर फाइल्स का सिर्फ एक ही सच है, और वो है मुस्लिमों से नफ़रत

लोग ये बहस कर सकते हैं कि फिल्म में दिखाई गई घटनाएं असल में हुई थीं और कुछ हद तक वे सही भी होंगे. लेकिन किसी भी घटना के बारे में पूरा सच, बिना कुछ भी घटाए, जोड़े और बिना कुछ भी बदले ही कहा जा सकता है. सच कहने के लिए न केवल संदर्भ चाहिए, बल्कि प्रसंग और परिस्थिति बताया जाना भी ज़रूरी है.

द कश्मीर फाइल्स ने हिंदुत्ववादियों को मुस्लिमों के ख़िलाफ़ ज़हर उगलने का बहाना दे दिया है

सिनेमाघरों में द कश्मीर फाइल्स देखने वालों के नारेबाज़ी और सांप्रदायिक जोश से भरे वीडियो तात्कालिक भावनाओं की अभिव्यक्ति लगते हैं, लेकिन ऐसे कई वीडियो की पड़ताल में कट्टर हिंदुत्ववादी कार्यकर्ताओं और संगठनों की भूमिका स्पष्ट तौर पर सामने आती है. 

द कश्मीर फाइल्स एक प्रोपगैंडा फिल्म है, जिसका मक़सद मुस्लिमों के ख़िलाफ़ भावनाएं भड़काना है

विवेक रंजन अग्निहोत्री भाजपा के पसंदीदा फिल्मकार के रूप में उभर रहे हैं और उन्हें पार्टी का पूरा समर्थन मिल रहा है.

‘द कश्मीर फाइल्स’ एजेंडा के तहत बनाई गई फिल्म हैं: अशोक कुमार पांडेय

वीडियो: ‘कश्मीर और कश्मीरी पंडित’ नामक किताब के लेखक अशोक कुमार पांडे ने हाल ही में रिलीज़ फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ के बारे में बात की. उन्होंने समझाया कि 1990 में कश्मीरी पंडितों के साथ जो हुआ, वह स्वतंत्र भारत की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक था. उन्होंने यह भी बताया कि कैसे अल्पसंख्यकों के बीच असुरक्षा का माहौल बनाने के लिए फिल्म का इस्तेमाल किया जाता है.

भाजपा धर्म के आधार पर लोगों को उकसाने के लिए ‘कश्मीर फाइल्स’ का प्रचार कर रही: महबूबा मुफ़्ती

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ़्ती ने कश्मीर घाटी से कश्मीरी पंडितों के पलायन का कारण रहीं परिस्थितियों की जांच के लिए एक समिति गठित करने की भी मांग की. उन्होंने मुसलमानों के प्रति नफ़रत की भावना नहीं रखने की अपील करते हुए कहा कि दिल्ली दंगे और 2002 में गुजरात में हुई सांप्रदायिक हिंसा के लिए ज़िम्मेदार परिस्थितियों की भी जांच होनी चाहिए.

Mumbai: NCP President Sharad Pawar gestures as he speaks during an exclusive interview with PTI, at his residence in Mumbai, Saturday, March 16, 2019. (PTI Photo) (Story No. BMM1) (PTI3_16_2019_000097B)

कश्मीरी पंडितों के पलायन के समय कांग्रेस की नहीं, वीपी सिंह की सरकार थी: शरद पवार

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार ने कहा कि घाटी से कश्मीरी पंडितों के पलायन पर आधारित फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ में दिखाया गया है कि उस समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, जबकि ऐसा नहीं है. यह बाद दोहराते हुए शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि उस समय कश्मीरी पंडितों के विस्थापन और हत्याओं की भाजपा ने निंदा तक नहीं की थी.