Labourers

मध्य प्रदेश: हाईवे पर काम कर रहे मज़दूरों को तेज रफ़्तार कार ने कुचला, चार की मौत

घटना रतलाम ज़िले की है, जहां जमुनिया गांव के पास हाईवे पर रेलिंग ठीक करने का काम कर रहे कई मज़दूर एक तेज रफ़्तार कार की चपेट में आ गए. बताया गया है कि घटना में आठ मज़दूरों के अलावा कार में सवार पांच लोग भी घायल हुए हैं. घायल मज़दूरों की हालत गंभीर है. 

मिज़ोरम: पत्थर की खदान धंसने की घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 11 हुई

बीते 14 नवंबर को दक्षिण मिजोरम के हनहथियाल जिले में स्थित पत्थर की एक खदान धंसने से वहां  काम कर रहे 12 लोग लापता हो गए थे. अब तक 11 शव बरामद किए जा चुके हैं और एक व्यक्ति अभी भी लापता है.

मिज़ोरम: पत्थर की खदान धंसने की घटना में कम से कम आठ लोगों की मौत, चार लापता

दक्षिण मिज़ोरम के हनहथियाल ज़िले में यह हादसा सोमवार दोपहर बाद तीन बजे हुआ, जब श्रमिक मौदढ़ गांव स्थित पत्थर की एक खदान में काम कर रहे थे. खदान धंसने से 12 लोग लापता हो गए थे, जिनमें से आठ लोगों के शव मंगलवार सुबह बरामद किए जा चुके हैं.

कर्नाटक: मज़दूरों का आरोप- प्रधानमंत्री की रैली में जाने पर पैसे देने का वादा पूरा नहीं किया गया

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बीते 11 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली कर्नाटक के देवनहल्ली क्षेत्र में हुई थी. मज़दूरों के एक समूह ने आरोप लगाया है कि इस रैली में शामिल होने पर उन्हें एक व्यक्ति ने 500 रुपये का भुगतान करने को कहा था.

गुजरात: अहमदाबाद में निर्माणाधीन इमारत का एलिवेटर गिरने से सात मज़दूरों की मौत

घटना गुजरात विश्वविद्यालय के पास एक निर्माण स्थल पर हुई. पुलिस ने बताया कि पांच मजदूर 13वीं मंजिल पर एलिवेटर शाफ्ट से दीवार पर प्लास्टर कर रहे थे, तभी वे जिस लकड़ी के तख़्ते पर खड़े थे, वो टूटकर सीधे बेसमेंट में जा गिरा. इससे 5वीं मंजिल पर काम कर रहे दो अन्य लोग भी संतुलन खोकर नीचे गिर गए.

अरुणाचल प्रदेश की सड़क परियोजना में मज़दूरी करने गए असम के 19 मज़दूर दो हफ़्तों से लापता

सभी मज़दूर चीन सीमा से सटे अरुणाचल प्रदेश के कुरुंग कुमे ज़िले में ‘सीमा सड़क संगठन’ की एक सड़क निर्माण परियोजना में कार्यरत थे. उन्हें असम के स्थानीय ठेकेदार काम का वादा करके अरुणाचल के दामिन स्थित एक शिविर में ले गए थे. 3 जुलाई के बाद से परिजनों का उनसे संपर्क नहीं हो पाया है. 13 जुलाई को जब स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी हुई, तब तलाशी अभियान शुरू किया गया.

देश में केरल के श्रमिकों को मिलती है सर्वाधिक मज़दूरी: रिपोर्ट

रिज़र्व बैंक की एक रिपोर्ट बताती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण, सामान्य कृषि और ग़ैर-कृषि श्रमिकों की दैनिक मज़दूरी के मामले में केरल सबसे आगे है. वहीं, एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार केरल के विधायकों को देश में सबसे कम वेतन मिलता है.

काली स्याही और जानलेवा हमले किसानों की आवाज़ को नहीं दबा सकते: राकेश टिकैत

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में सोमवार को एक कार्यक्रम के दौरान कुछ अराजक तत्वों ने भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत पर स्याही फेंक दी थी. पुलिस ने इस सिलसिले में तीन लोगों को गिरफ़्तार किया है. टिकैत ने इस घटना के लिए पुलिस को ज़िम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया है कि उन पर हमला भाजपा नीत राज्य सरकार की मिलीभगत से किया गया था.

यूपी: ग़ुलामी, उत्पीड़न, बेदख़ली से लड़ते हुए वनटांगियों का संघर्ष आज भी जारी है

गोरखपुर और महराजगंज के जंगल में स्थित 23 वन ग्रामों के वनटांगियों को वन अधिकार क़ानून लागू होने के डेढ़ दशक और कड़े संघर्ष के बाद ज़मीन पर अधिकार मिला. लेकिन आज भी यहां विकास की रफ़्तार धीमी ही है.

‘ऐ महराज! राशन-पानी पर केहू वोट देला, हमार वोट फिक्स बा’

ग्राउंड रिपोर्ट: पूर्वांचल में मीडिया के एक तबके द्वारा बनाए गए ‘लाभार्थी नैरेटिव’ पर स्थानीय लोगों की बढ़ी हुई राजनीतिक चेतना हावी दिखती है. मीडिया में हो रही बहस के उलट ज़मीन पर तस्वीर कुछ अलग ही है.

एक दिन में सर्वाधिक टीके देने के लिए क्या पहले भाजपा शासित राज्यों ने खुराकों में कमी की थी?

स्क्रोल डॉट इन की एक रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले कुछ दिनों में भाजपा शासित राज्यों द्वारा टीकाकरण की गति को धीमा करना सोमवार को भारत के रिकॉर्ड 86 लाख टीके की खुराक देने का कारण हो सकता है.

देश के बड़े अनौपचारिक कार्यबल को कोविड-19 टीकाकरण में प्राथमिकता दी जानी चाहिए

एक अनुमान के अनुसार लगभग 70% शहरी कार्यबल अनौपचारिक रूप से कार्यरत हैं. अनौपचारिक श्रमिकों के काम की अनिश्चित प्रकृति पहले ही जोखिम भरी होती है, जिससे उनके कोविड-19 के संपर्क में आने का ख़तरा बढ़ जाता है. मौजूदा टीकाकरण ढांचे में कई बाधाओं के चलते ऐसे कामगारों के टीकाकरण की संभावना कम है.

कोविड संकट: ज़िंदा लोग इंतज़ार कर रहे हैं, लाशें पूछ रही हैं देश का इंचार्ज कौन है

कोरोना संक्रमण मोदी सरकार की स्क्रिप्ट के हिसाब से नहीं आया था और इसीलिए इसका कोई तसल्लीबख़्श जवाब उसके पास नहीं है.

कोविड संकट के लिए ‘सिस्टम’ नहीं, मोदी का इसे व्यवस्थित रूप से बर्बाद करना दोषी है: अरुण शौरी

साक्षात्कार: पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने द वायर से बात करते हुए देश के कोविड संकट के लिए नरेंद्र मोदी सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया और कहा कि सरकार लोगों को उनके हाल पर छोड़ चुकी है, ऐसे में अपनी सुरक्षा करें और एक दूसरे का ख़याल रखें.

केवल सरकार विफल नहीं हुई हैं, हम मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों के गवाह बन रहे हैं…

संकट पैदा करने वाली यह मशीन, जिसे हम अपनी सरकार कहते हैं, हमें इस तबाही से निकाल पाने के क़ाबिल नहीं है. ख़ाससकर इसलिए कि इस सरकार में एक आदमी अकेले फ़ैसले करता है, जो ख़तरनाक है- और बहुत समझदार नहीं है. स्थितियां बेशक संभलेंगी, लेकिन हम नहीं जानते कि उसे देखने के लिए हममें से कौन बचा रहेगा.