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जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद 34 बाहरियों ने सूबे में ज़मीनें खरीदींः केंद्र

केंद्रीय गृहराज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक सवाल के जवाब में लोकसभा को बताया कि जम्मू कश्मीर सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार सूबे के बाहर के 34 लोगों ने अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से केंद्रशासित प्रदेश में ज़मीनें खरीदी हैं. ये संपत्तियां जम्मू, रियासी, उधमपुर और गांदेरबल ज़िलों में हैं.

उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने समान नागरिक संहिता के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाने को मंज़ूरी दी

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि समान नागरिक संहिता का दायरा विवाह-तलाक़, ज़मीन-जायदाद, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे विषयों पर सभी नागरिकों के लिए समान क़ानून लागू करने का होगा, चाहे वे किसी भी धर्म में विश्वास रखते हों.

जम्मू: अतिक्रमण बताकर तोड़े गए मुस्लिमों के दशकों पुराने मकान, विरोध में उतरे लोग

जम्मू विकास प्राधिकरण की अतिक्रमण हटाने की मुहिम ने क्षेत्र में विरोध भड़का दिया है. आरोप हैं कि प्रशासन मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने के लिए चुनिंदा कार्रवाई कर रहा है.

असमः अख़बारों का मुख्यमंत्री के परिवार के कथित ज़मीन घोटाले के ज़िक्र वाला लेख छापने से इनकार

द वायर और द क्रॉसकरेंट ने एक रिपोर्ट में बताया था कि असम में ज़रूरतमंदों के लिए चिह्नित ज़मीन किस तरह मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़ी कंपनी के पास पहुंची थी. इस मुद्दे का ज़िक्र करते हुए साहित्य अकादमी से सम्मानित लेखक हीरेन गोहेन ने एक लेख लिखा था, जिसे राज्य के तीन अख़बारों ने प्रकाशित करने से मना कर दिया.

असम के मुख्यमंत्री व उनके परिवार ने हड़पी भूमिहीनों की ज़मीन, तत्काल पद से हटाया जाए: कांग्रेस

कांग्रेस ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा और उनके परिवार पर ऐसी 18 एकड़ ज़मीन हड़पने का आरोप लगाया जो भूमिहीनों के लिए चिह्नित थी. कांग्रेस ने शर्मा को तत्काल पद से हटाने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक विशेष जांच दल से जांच कराने की भी मांग उठाई है.

असम: ज़रूरतमंदों के लिए चिह्नित ज़मीन मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़ी कंपनी के पास कैसे पहुंची

एक्सक्लूसिव: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा की पत्नी रिनिकी भूयां शर्मा द्वारा शुरू की गई कंपनी आरबीएस रिएल्टर्स द्वारा ‘सीलिंग सरप्लस’ भूमि का अधिग्रहण राज्य सरकार की भूमि आवंटन नीति पर सवाल खड़े करता है.

केंद्र की स्वामित्व योजना से बाहर रखे जाने पर क्यों नाख़ुश है दिल्ली की ग्रामीण आबादी

साल 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘स्वामित्व योजना’ की शुरुआत की थी. तब बताया गया था कि ग्रामीण ज़मीनों का सर्वेक्षण करने के बाद उनका मालिकाना हक़ ग्रामीण आबादी को दिया जाएगा. इस साल जुलाई में संसद में बताया गया कि दिल्ली की ग्रामीण क्षेत्र में यह योजना लागू नहीं होगी, जिसके बाद से यहां के लोगों ने केंद्र की इस उपेक्षा पर सवाल उठाए हैं.

रक्षा संपत्तियों को पट्टे पर न दें, अपने उपयोग के लिए रखें: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने तीन लोगों की की रिट याचिकाओं को ख़ारिज करते हुए यह सुझाव दिया. तीनों पेट्रोल पंप के मालिक हैं. तीनों ने एक दशक से अधिक समय से किराये के रूप में कई करोड़ रुपये का भुगतान नहीं करने पर रक्षा विभाग द्वारा उन्हें ज़मीन से हटाए जाने की कार्रवाई को चुनौती दी है.

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के आसपास के गांवों की ज़मीन का सरकार को सहमालिक बनाने का विरोध

गुजरात के नर्मदा ज़िले के केवड़िया स्थित गोरा गांव की सरपंच के मुताबिक, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास स्थित एक अभयारण्य के आसपास के 121 गांवों को ईको सेंसेटिव ज़ोन में शामिल करने की योजना है. यहां की ज़मीनों का राज्य सरकार को सहमालिक बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिसके लिए गांववालों से सहमति नहीं ली गई है.