तमिलनाडु: महिला पत्रकारों को ‘बदसूरत’ और ‘अनपढ़’ कहने वाले भाजपा नेता पर जुर्माना

भाजपा नेता एसवी शेखर ने 2018 के फेसबुक पोस्ट में एक महिला पत्रकार के बारे में अपमानजनक टिप्पणी थी और महिला पत्रकारों को ‘अनपढ़’, ‘बेवकूफ़’ और ‘बदसूरत’ भी कहा था. अदालत ने उन्हें जेल सज़ा सुनाई और 15,000 रुपये का जुर्माना लगाया था. जुर्माना भरने के बाद अदालत ने उन्हें हाईकोर्ट में अपील करने के लिए जेल की सजा को निलंबित कर दिया.

ग़ैर-ज़िम्मेदाराना व्यवहार और अफ़वाहें फैलाना भाजपा के शीर्ष नेताओं की आदत बन गई है: स्टालिन

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और राज्यपाल आरएन रवि तमिलनाडु के मंदिरों में अयोध्या के राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के सीधे प्रसारण को रोकने का आरोप लगाया था. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने आरोप लगाया कि अफ़वाह फैलाना उच्च पदों पर बैठे भाजपा नेताओं की आदत बन गई है.

तमिलनाडु: कोर्ट ने ईडी द्वारा पांच कलेक्टरों को अवैध खनन के मामले में भेजे समन रद्द किए

ईडी ने रेत खनन में कथित अनियमितताओं के संबंध में तमिलनाडु के ज़िला कलेक्टरों को जारी समन के ख़िलाफ़ राज्य सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट का रुख़ किया था. इस पर अदालत ने कहा है कि प्रथमदृष्टया, भेजे गए समन ईडी के अधिकारक्षेत्र में नहीं आते हैं.

ईडी के ख़िलाफ़ कोर्ट में तमिलनाडु सरकार, कहा- केंद्र विपक्षी राज्यों को कमज़ोर करने की कोशिश में

ईडी ने रेत खनन में कथित अनियमितताओं के संबंध में तमिलनाडु के 10 ज़िला कलेक्टरों को समन जारी किया था. इसके ख़िलाफ़ मद्रास हाईकोर्ट का रुख़ करते हुए राज्य सरकार ने कहा है कि मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम के तहत ईडी की यह कार्रवाई उन मामलों में दख़ल है जो राज्य के अधिकारक्षेत्र में आते हैं.

तमिलनाडु के गांव में बलात्कार और अत्याचार के 30 साल पुराने मामले में 215 अधिकारियों को जेल

तमिलनाडु के धर्मपुरी ज़िले के आदिवासी गांव वाचथी में 20 जून 1992 को वन और पुलिस विभाग के अधिकारियों ने तस्करी के चंदन की लकड़ी की तलाश में छापा मारा था. इस दौरान ग्रामीणों पर अत्याचार करने के अलावा 18 महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया था. मद्रास हाईकोर्ट ने आरोपियों के दोषी ठहराने के सत्र अदालत के फैसले का बरक़रार रखा है.

जस्टिस चंद्रू जैसी शख़्सियतें भले ही किसी की रोल माॅडल न रह गई हों, लेकिन उन पर चर्चा ज़रूरी है

वकालत की अपनी पारी को विराम देकर जस्टिस के. चंद्रू 31 जुलाई, 2006 को जब मद्रास उच्च न्यायालय के जज बने तो मामलों की सुनवाई और फैसलों की गति ही नहीं तेज की, न्याय जगत की कई पुरानी औपनिवेशिक परंपराओं और दकियानूसी रूढ़ियों को भी तोड़ डाला. साथ ही कई नई और स्वस्थ परंपराओं का निर्माण भी किया.

नेताओं द्वारा आम आदमी की जमीन हड़पना दिनदहाड़े डक़ैती: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट एक वृद्धा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कहा गया था कि डीएमके वार्ड सचिव 13 साल से अधिक समय तक उनकी भूमि पर कब्ज़ा कर रखा था. अदालत ने कहा कि राजनीतिक ताक़त का इस्तेमाल करके एक शक्तिहीन आम आदमी से ज़मीन छीनना दिनदहाड़े हुई डक़ैती के अलावा कुछ नहीं है.

हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को निकाय चुनाव में ट्रांसजेंडर्स को आरक्षण देने का निर्देश दिया

मद्रास हाईकोर्ट ने कुड्डालोर ज़िला कलेक्टर को नैनार्कुप्पम ग्राम पंचायत के अध्यक्ष और सदस्यों को हटाने का भी निर्देश दिया, जिसने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए भूमि आवंटन को रद्द करने के लिए एक प्रस्ताव परित किया था. अदालत ने कहा कि जब तक बहुसंख्यक समाज लिंग के आधार पर अल्पसंख्यक समूह को बहिष्कृत करता रहेगा, यह केवल ख़राब सामाजिक जीवन स्थितियों को बढ़ावा देगा.

बिहार के श्रमिकों पर हमले की फेक न्यूज़ पर कोर्ट ने दैनिक भास्कर से ‘भूल सुधार’ छापने को कहा

तमिलनाडु में बिहार के श्रमिकों पर हमले की फ़र्ज़ी ख़बर को लेकर तमिलनाडु पुलिस ने दैनिक भास्कर के ख़िलाफ़ दो मामले दर्ज किए थे. इसे लेकर समूह के डिजिटल डिवीज़न के संपादक ने मद्रास हाईकोर्ट से अग्रिम ज़मानत मांगी थी. कोर्ट ने इसे मंज़ूर करते हुए कहा कि बिना सत्यता की पुष्टि किए फर्ज़ी ख़बर छापना दुखद है.

मंदिर के पुजारी की नियुक्ति में जाति की कोई भूमिका नहीं: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने 2018 में दायर एक याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि किसी भी जाति या पंथ के किसी भी व्यक्ति को पुजारी के रूप में नियुक्त किया जा सकता है, बशर्ते वह मंदिर में किए जाने वाले आवश्यक अनुष्ठानों में पारंगत और निपुण व्यक्ति हो. याचिका में सलेम ज़िले के श्री सुगवनेश्वर स्वामी मंदिर में पुजारियों की भर्ती के लिए निकाले गए एक विज्ञापन को चुनौती दी थी.

ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में तमिलनाडु के मंत्री को हिरासत में लिया, विपक्ष ने कार्रवाई की निंदा की

ईडी ने मंगलवार को तमिलनाडु के बिजली मंत्री वी. सेंथिल बालाजी के घर और परिसरों में तलाशी शुरू करने के बाद बुधवार तड़के उन्हें हिरासत में ले लिया. यह मामला 2011 से 2016 के बीच राज्य के परिवहन विभाग में कथित रूप से नौकरी के लिए कैश के घोटाले से जुड़ा है. तब बालाजी अन्नाद्रमुक सरकार में परिवहन मंत्री थे.

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