Madras High Court

(फोटो साभार: विकिपीडिया)

सुप्रीम कोर्ट का निर्वाचन आयोग के ख़िलाफ़ मद्रास हाईकोर्ट की टिप्पणियां हटाने से इनकार

मद्रास हाईकोर्ट ने बीते 26 अप्रैल को निर्वाचन आयोग की आलोचना करते हुए उसे देश में कोविड-19 की दूसरी लहर के लिए ‘अकेले’ ज़िम्मेदार क़रार दिया था और कहा था कि वह ‘सबसे ग़ैर ज़िम्मेदार संस्था’ है. इन टिप्पणियों को हटाने के लिए आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को रुख़ किया था.

(फोटो: रॉयटर्स)

मौखिक बयान महत्वपूर्ण, मीडिया को इन्हें प्रकाशित करने से नहीं रोक सकते: सुप्रीम कोर्ट

कोविड प्रबंधन पर मद्रास हाईकोर्ट द्वारा चुनाव आयोग पर की गई टिप्पणियों को लेकर आयोग की याचिका पर शीर्ष अदालत ने कहा कि लोकतंत्र तभी जीवित रहता है जब उसके संस्थानों को मजबूत किया जाता है. हमें सुनिश्चित करना होता है कि जज अपने विचार रखने के लिए पर्याप्त स्वतंत्र हों. साथ ही अदालत में होने वाली हर बात को मीडिया रिपोर्ट करे ताकि जज गरिमा से अदालती कार्यवाही करें.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

कोविड: कोर्ट ने कहा, यह सुनिश्चित करें कि मतगणना का दिन सुपर स्प्रेडर कार्यक्रम न बन जाए

मद्रास हाईकोर्ट ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिए केंद्र की मोदी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों उठाने में कथित तौर पर लापरवाही को लेकर नाराज़गी जताते हुए कहा कि कि वह 14 महीनों से कर क्या रही थी? दो मई को असम, पश्चिम बंगाल, केरल, पुदुचेरी और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में डाले गए मतों की गिनती होनी है.

चुनाव आयोग. (फोटो: रॉयटर्स)

कोर्ट की फटकार के बाद चुनाव आयोग ने कहा, कोविड नियम लागू करवाना हमारी ज़िम्मेदारी नहीं

मद्रास हाईकोर्ट द्वारा कोविड-19 संबंधी प्रोटोकॉल लागू करवाने में चुनाव आयोग की नाकामी की आलोचना के बाद आयोग ने कहा है कि महामारी से जुड़े क़ानूनी प्रावधानों के क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी राज्य सरकारों की आपदा प्रबंधन इकाइयों की है और उसने कभी यह भूमिका अपने हाथ में नहीं ली.

(फोटो: पीटीआई)

कोविड-19: अदालत की फटकार के बाद मतगणना के दौरान या बाद में विजय जुलूस पर पाबंदी

चुनाव आयोग ने कोविड-19 के चलते पांच राज्यों में दो मई को होने वाली मतगणना के दौरान या इसके बाद जीत का जश्न मनाने के लिए जुलूस निकालने पर रोक लगा दी है. इससे पहले सोमवार को मद्रास हाईकोर्ट ने आयोग की तीखी आलोचना करते हुए उसे देश में महामारी की दूसरी लहर के लिए अकेले ज़िम्मेदार बताया था.

मद्रास हाईकोर्ट. (फोटो साभार: फेसबुक/@Chennaiungalkaiyil)

कोरोना की दूसरी लहर के लिए चुनाव आयोग ज़िम्मेदार, अफसरों पर हत्या का मुक़दमा होना चाहिए: कोर्ट

तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव की मतगणना में कोविड प्रोटोकॉल के पालन संबंधी एक याचिका की सुनवाई में मद्रास हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को कड़ी फटकार लगाई है. अदालत ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सर्वोपरि है और यह चिंताजनक है कि संवैधानिक अधिकारियों को इस बारे में याद दिलाना पड़ रहा है.

Samastipur: BJP supporters during Prime Minister Narendra Modi's election rally, for the second phase of Bihar Assembly polls, in Samastipur district, Sunday, Nov. 1, 2020. (PTI Photo)(PTI01-11-2020_000091B)

पुदुचेरी भाजपा पर आधार से मतदाताओं की जानकारी लेने के आरोप विश्वसनीय: हाईकोर्ट

पुदुचेरी में भाजपा द्वारा आधार के ज़रिये मतदाताओं के मोबाइल नंबर एकत्र करने के मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग को इसे आचार संहिता के उल्लंघन के तौर पर लेना चाहिए और पार्टी के ख़िलाफ़ अलग से आपराधिक जांच करनी चाहिए. कोर्ट ने यूआईडीएआई से भी जवाब तलब किया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

पुदुचेरी: भाजपा पर वोटरों की निजी जानकारी पाने का आरोप, हाईकोर्ट ने कहा- जांच की ज़रूरत

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि भाजपा की पुदुचेरी इकाई के पास अवैध तरीके से मतदाताओं के आधार कार्ड का विवरण उपलब्ध है और वे इसका चुनाव में इस्तेमाल कर रहे हैं. हाईकोर्ट ने इसके चलते चुनाव स्थगित किए जाने के संबंध में निर्वाचन आयोग से जानकारी मांगी है.

मद्रास हाईकोर्ट. (फोटो साभार: फेसबुक/@Chennaiungalkaiyil)

राष्ट्रीय ध्वज का चित्रण करने वाला केक काटना अपराध नहीं: मद्रास हाईकोर्ट

साल 2013 को तमिलनाडु के कोयंबटूर में क्रिसमस का जश्न मनाने के लिए आयोजित एक सार्वजनिक समारोह में एक केक काटा गया था. कथित तौर पर जिसमें भारतीय मानचित्र और तिरंगा झंडा बनाया गया था. इसे राष्ट्रीय ध्वज का अपमान बताते हुए हिंदू पब्लिक पार्टी के एक सदस्य ने अदालत में चुनौती दी थी.

मद्रास हाईकोर्ट. (फोटो साभार: फेसबुक/@Chennaiungalkaiyil)

भूख हड़ताल पर बैठना आत्महत्या की धारा के तहत अपराध नहीं: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने साल 2013 में भूख हड़ताल में भाग लेने वाले शख़्स के ख़िलाफ़ आपराधिक कार्यवाही रद्द करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने भूख हड़ताल पर बैठकर केवल विरोध किया है जो आईपीसी की धारा 309 के तहत अपराध नहीं बनता है. आईपीसी की धारा 309 के तहत आत्महत्या का प्रयास अपराध है.

मद्रास हाईकोर्ट (फोटो: पीटीआई)

धर्म का अधिकार जीवन के अधिकार से बड़ा नहीं: मद्रास हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी तमिलनाडु के प्राचीन श्रीरंगम रंगनाथस्वामी मंदिर में उत्सव और अनुष्ठानों के नियमित आयोजन संबंधी याचिका पर की. अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि मंदिर में कोविड-19 प्रोटोकॉल से समझौता किए बगैर धार्मिक रस्मों के आयोजन की संभावना तलाश की जाए.

मद्रास हाईकोर्ट (फोटो: पीटीआई)

तमिलनाडु: सीबीआई के पास से 100 किलो से अधिक सोना ग़ायब, हाईकोर्ट ने सीबी-सीआईडी को सौंपी जांच

यह 103 किलो सोना उस 400.47 किलोग्राम बहुमूल्य धातु और जेवरात का हिस्सा है, जिसे सीबीआई ने 2012 में तमिलनाडु में सुरना कॉर्पोरेशन लिमिटेड के कार्यालय की तलाशी के दौरान जब्त किया था. मद्रास हाईकोर्ट ने सीबीआई की यह दलील खारिज कर दी कि यदि जांच स्थानीय पुलिस करेगी तो उसकी प्रतिष्ठा को बट्टा लगेगा.

madurai bench madras high court

मद्रास हाईकोर्ट ने महिलाओं-बच्चों की सुरक्षा का हवाला देकर ‘सेक्सुअल ऐड’ के ख़िलाफ़ आदेश दिया

मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने कहा कि केबल ऑपरेटरों को यह सुनिश्चित होगा कि केबल सेवा पर आने वाले कार्यक्रमों में महिलाओं का चित्रण ‘सौंदर्यमय और सुरुचिपूर्ण’ तथा ‘शालीनता के स्थापित मानदंडों के भीतर’ हो.

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मद्रास हाईकोर्ट ने सीएए प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ केस ख़ारिज किया, कहा- विरोध शांतिपूर्ण था

मद्रास हाईकोर्ट की पीठ सीएए और एनआरसी को लेकर प्रदर्शन कर दो व्यक्तियों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने इसे लेकर अपने ख़िलाफ़ दर्ज एफ़आईआर को ख़ारिज करने की मांग की थी.

बेनिक्स और पी. जयराज. (फोटो: पीटीआई)

तमिलनाडु: हिरासत में पिता-पुत्र की मौत मामले में फरार पुलिसकर्मी गिरफ़्तार

तमिलनाडु के सथनकुलम क़स्बे में लॉकडाउन नियमों के उल्लंघन के आरोप में बीते 19 जून को पिता-पुत्र को गिरफ़्तार किया गया था. दो दिन बाद एक अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी. इस मामले में बीते एक जुलाई को छह पुलिसकर्मियों पर हत्या का केस दर्ज किया गया था.