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फेसबुक ने क़रीब 50,000 लोगों को निशाना बनाने वाले सात जासूसी फर्मों का ख़ुलासा किया

फीस लेकर जासूसी सेवाएं देने वाली ये कंपनियां इंटरनेट पर लोगों की ख़ुफ़िया जानकारी जुटाने और उनकी डिवाइस व एकाउंट में सेंध लगाने का काम करती थीं. सौ देशों में अपने ग्राहकों के लिए इनके निशाने पर नेता, चुनाव अधिकारी, मानवाधिकार कार्यकर्ता और मशहूर हस्तियां थे. इनमें एक भारतीय फर्म भी शामिल है.

फेसबुक: तीन स्टाफ मेमो में भारत में हेट स्पीच को लेकर चिंता जताई गई, कंपनी ने कहा- दिक्कत नहीं

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में फेसबुक पर हेट स्पीच और ध्रुवीकरण को लेकर कंपनी के स्टाफ ने 2018 से 2020 के दौरान कई बार चिंता जताई थी. कर्मचारियों के अलर्ट के बावजूद फेसबुक के तत्कालीन उपाध्यक्ष क्रिस कॉक्स की 2019 में हुई आंतरिक समीक्षा बैठक में इन्हें कोई तवज्जो नहीं दी गई.

धार्मिक नफ़रत को बढ़ाने देने के आरोपों से घिरे फेसबुक ने कंपनी का नाम ‘मेटा’ किया

यह घोषणा ऐसे समय पर आई है जब ‘फेसबुक पेपर्स’ के तहत विभिन्न खुलासे के बाद इसे दुनिया के कई हिस्सों में विधायी और नियामक जांच का सामना करना पड़ रहा है. इन खुलासों में यह भी पता चला है कि फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान वॉट्सऐप पर ‘हिंसा के लिए उकसाने और अफ़वाहों’ भरे मैसेजेस की बाढ़ आई गई थी और फेसबुक को स्पष्ट रूप से ये जानकारी थी.