केंद्र सरकार पेगासस जैसा जासूसी स्पायवेयर ‘कॉग्नीटे’ ख़रीद रही है: कांग्रेस

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि चूंकि पेगासस बदनाम हो गया है, इसलिए ‘मिनिमम गवर्नेंस-मैक्सिमम सर्विलांस’ वाली सरकार बाज़ार में एक नए स्पायवेयर की तलाश कर रही है. ‘कॉग्नीटे’ स्पायवेयर का इस्तेमाल राजनेताओं, मीडिया, कार्यकर्ताओं और एनजीओ की जासूसी करने के लिए किया जाएगा.

नफ़रती भाषण को लेकर प्रधानमंत्री की चुप्पी उनकी मौन सहमति का प्रतीक है: नसीरुद्दीन शाह

द वायर को दिए एक विशेष इंटरव्यू में नफ़रती भाषण को लेकर अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि इस संबंध में बोलना प्रधानमंत्री का कर्तव्य है, हम सभी की रक्षा करना उनका काम है. सरकार की चुप्पी हैरान करने वाली है. यह इस संबंध में उनकी मौन सहमति का प्रतीक है.

सिलेबस से सड़क तक संहार की राजनीति

वीडियो: स्कूली किताबों से मुग़ल इतिहास, महात्मा गांधी, उनके हत्यारे नाथूराम गोडसे और आरएसएस से संबंधित सामग्री को हटाए जाने के मसले पर चर्चा कर रहे हैं द वायर के संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन और दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अपूर्वानंद.

मीडिया वन पर बैन रद्द, कोर्ट ने कहा- हक़ से वंचित करने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा को इस्तेमाल किया

गृह मंत्रालय ने 2021 में मलयालम न्यूज़ चैनल ‘मीडिया वन’ को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का हवाला देते हुए सुरक्षा मंज़ूरी देने से इनकार के बाद जनवरी 2022 में इसके प्रसारण पर रोक लगाने को कहा था. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के निर्णय को रद्द करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर लोगों को अधिकारों से वंचित करने की आलोचना की है.

केंद्र द्वारा सीबीआई-ईडी के दुरुपयोग के ख़िलाफ़ विपक्ष की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज की

14 विपक्षी दलों की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि जांच एजेंसियों का उपयोग करने का एक स्पष्ट पैटर्न उभरा है. पूरे विपक्ष और अन्य मुखर नागरिकों को निशाना बनाने, उन्हें कमज़ोर करने और उन्हें संदिग्ध आधार पर जेल में डालने के लिए, इनका इस्तेमाल किया जा रहा है.

क्या आज़ादी और लोकतंत्र किसी देश का ‘आंतरिक मामला’ हो सकते हैं?

1971 में बांग्लादेश के संघर्ष के वक़्त जब भारत कई हलकों में पाकिस्तान के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप की तोहमतें झेल रहा था, लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने कहा था कि लोकतंत्र किसी देश का आंतरिक मामला नहीं हो सकता और उसका दमन सारे संसार की चिंता का विषय होना चाहिए.

अडानी समूह के प्रति सरकार की कृपादृष्टि महज़ धारणा का मामला नहीं है

जितनी आक्रामक तरीके से सत्ताधारी पार्टी की तरफ से एक कारोबारी दिग्गज की हिमायत की कोशिश की जा रही है, आख़िर वह समूह अचानक पार्टी के लिए इतने महत्वपूर्ण कैसे हो गया?

क्या राहुल गांधी संसद सदस्यता जाने के बाद मुख्य विपक्षी नेता के तौर पर उभर पाएंगे?

राहुल गांधी की सदस्यता जाने के बाद से बने माहौल में कांग्रेस इस नई और सकारात्मक छवि के बूते ख़ुद को सिर्फ और मजबूत कर सकती है. देश की सबसे पुरानी पार्टी का दायित्व है कि वह दूसरों के लिए जगह बनाए और किसी भी विपक्षी मोर्चे में इसे केंद्रीय भूमिका दिए जाने की मांग को इसके आड़े न आने दे.

हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट का असर; अडानी समूह ने कई परियोजनाओं को सीमित किया

ब्लूमबर्ग में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट का नतीजा यह रहा कि अडानी समूह द्वारा कुछ निवेशों को रोक दिया गया, इसके अलावा पूंजीगत व्यय में कटौती की गई और परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए एक अलग दृष्टिकोण पर विचार किया जाने लगा.

‘हमको शाहों की अदालत से तवक़्क़ो तो नहीं, आप कहते हैं तो ज़ंजीर हिला देते हैं’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दिनों विपक्ष को निशाना बनाते हुए कहा कि ‘जब कोर्ट कोई फैसला सुनाता है तो कोर्ट पर सवाल उठाया जाता है... (क्योंकि) कुछ दलों ने मिलकर भ्रष्टाचारी बचाओ अभियान छेड़ा हुआ है.’ हालांकि, यह कहते हुए वे भूल गए कि लोकतंत्र की कोई भी अवधारणा ‘कोर्ट पर सवालों’ की मनाही नहीं करती.

5 सालों में 19 हज़ार से ज़्यादा एससी, एसटी, ओबीसी छात्रों ने केंद्रीय शिक्षण संस्थान छोड़े: केंद्र

राज्यसभा में  एक सवाल के जवाब में केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री सुभाष सरकार ने बताया कि पिछले पांच सालों में 6,901 ओबीसी, 3,596 एससी और 3,949 एसटी छात्रों ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों से ड्रॉपआउट किया. इसी  अवधि में 2,544 ओबीसी, 1,362 एससी और 538 एसटी छात्र आईआईटी छोड़कर गए.

राहुल गांधी को संसद से बाहर करना ग़ैरक़ानूनी, अदालतों का ग़लत इस्तेमाल हो रहा है: कपिल सिब्बल

वीडियो: राहुल गांधी की संसद सदस्यता उन्हें सूरत की अदालत द्वारा मानहानि के एक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद रद्द हुई है. कोर्ट के इस निर्णय पर क़ानूनविदों ने सवाल उठाए हैं. इस मसले पर वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल से आरफ़ा ख़ानम शेरवानी की बातचीत.

‘राहुल-मुक्त’ संसद और विपक्ष-मुक्त भारत देश के आम लोगों के लिए घातक हैं

विपक्ष के बिना लोकतंत्र की नदी सूख जाएगी. हर सरकार ग़लती करती है और ग़लतियां होने, उन्हें सुधारने में कोई शर्म नहीं है. पर जिन देशों में एक ही दल और उसके सुप्रीम नेता को ही लोकप्रियता और जनसमर्थन प्राप्त हो और विपक्ष कमज़ोर या ग़ायब हो, वहां इस सरकार और नेता की कोई ग़लती आपदा का रूप ले लेती है.

चार साल में पहली बार जनवरी-फरवरी में मनरेगा में नौकरियां प्री-कोविड स्तर से नीचे पहुंचीं

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना के पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि इस साल जनवरी में सृजित ‘व्यक्ति-दिवसों’ की संख्या 20.69 करोड़ रही, जबकि फरवरी में यह संख्या 20.29 करोड़ रही. इससे पहले के तीन वर्षों में इन्हीं महीनों के दौरान यह संख्या काफी अधिक रही थी.

राहुल गांधी पर हुई कार्रवाई सबूत है कि उन्होंने भाजपा की कमज़ोर नस को दबा दिया है

राहुल गांधी का चीनी घुसपैठ और अडानी विवाद को उठाना भाजपा की सबसे बड़ी ताक़तों- राष्ट्रवाद और भ्रष्टाचार मुक्त छवि- पर चोट करता है. पहली बार है, जब भाजपा ने राहुल के हमलों के जवाब में ‘पप्पू’ कहकर मज़ाक नहीं बनाया. महीनेभर में राहुल को जिस तरह से घेरा गया, वह दिखाता है कि यह बौखलाई हुई है.  

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